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मदद पर टिकी हैं ‘बालवीर’ की सांसें
ब्यूरो/अमर उजाला संतकबीरनगर
Updated Wed, 04 May 2016 11:55 PM IST
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पीड़ित घनश्याम गुप्ता अपने बच्चे के साथ।
- फोटो : अंबरीश मिश्रा
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चार साल के इकलौते बेटे को ‘बोन मैरो’ की बीमारी है। एम्स के डॉक्टरों ने उपचार में 14 लाख का खर्च बताया है। बाप ठेला चलाता है और मां सब्जी बेचती है। अब तक के उपचार में परिवार कर्जदार हो गया है। अपनी दर्द भरी दास्तान एडीएम को बताते हुए पिता फफक पड़ा। उपचार के लिए शासन स्तर से मदद दिलाने की मांग की।
महुली कसबा निवासी घनश्याम गुप्ता बंजरिया मोहल्ले में किराए पर परिवार सहित रहते हैं। वह ठेेला चलाते हैं और पत्नी संगीता सब्जी बेचती हैं। उनके दो बेटों की मौत पहले हो चुकी है। उनके पास इकलौता चार साल का बेटा बालवीर और 11 वर्ष की बेटी सलोनी है। घनश्याम बताते हैं कि 18 महीने पहले बालवीर काफी बीमार हो गया। मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने जांच पड़ताल करके बेटे को ‘बोन मैरो’ में खराबी की जानकारी बताई। इसके बाद पीजीआई और फिर एम्स में इलाज चला। एम्स के डॉक्टरों ने बेटे के इलाज में 14 लाख का खर्च बताया है।
घनश्याम ने बताया कि बीमार बेटे का उपचार में पत्नी के जेवरात बिक चुके हैं और कई संपर्क के लोगों से डेढ़ लाख से अधिक रुपये कर्ज ले चुके हैं। दो बेटों की मौत पहले ही हो चुकी है। इकलौते बेटे को बचाने के लिए कई जनप्रतिनिधियों से भी मिल चुके हैं। कुछ माह पूर्व सांसद शरद त्रिपाठी को तीस हजार का स्टीमेट दिया। सांसद की पहल से महज 15 हजार का सहयोग मिला। दुर्भाग्यवश जानकारी नहीं होने के कारण रुपया वापस चला गया। वह पैसा दुबारा मिल जाए, इसके लिए पत्राचार किया है।
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घनश्याम ने रूंधें गले से बताया कि उपचार में आने वाले खर्च 14 लाख की मदद पर बीमार बेटे की जिंदगी टिकी है। बेटे की जिंदगी बचाने के लिए जहां कोई मदद होने की संभावना दिखती है फौरन जाता हूं। डीएम से मुलाकात नहीं होने पर एडीएम केपी यादव को प्रार्थना पत्र देकर मदद दिलाने की मांग की।
बालवीर की इलाज के लिए 14 लाख खर्च होने की बात बताई है। रानी लक्ष्मी बाई महिला सम्मान कोष से मदद दिलाए जाने का आश्वासन दिया गया है। इसके लिए एम्स से स्टीमेट तैयार करवा कर मांग गया है। स्टीमेट के साथ प्रार्थना पत्र देने पर पत्रावली तैयार कर डीएम की अध्यक्षता वाली कमेटी के समक्ष प्रकरण को रखा जाएगा। प्रशासन की पूरी कोशिश होगी कि गरीब परिवार को बीमार बेटे के उपचार के लिए मदद दिलाई जाए।
विजय कुमार पांडेय, जिला प्रोवेशन अधिकारी।
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महुली कसबा निवासी घनश्याम गुप्ता बंजरिया मोहल्ले में किराए पर परिवार सहित रहते हैं। वह ठेेला चलाते हैं और पत्नी संगीता सब्जी बेचती हैं। उनके दो बेटों की मौत पहले हो चुकी है। उनके पास इकलौता चार साल का बेटा बालवीर और 11 वर्ष की बेटी सलोनी है। घनश्याम बताते हैं कि 18 महीने पहले बालवीर काफी बीमार हो गया। मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने जांच पड़ताल करके बेटे को ‘बोन मैरो’ में खराबी की जानकारी बताई। इसके बाद पीजीआई और फिर एम्स में इलाज चला। एम्स के डॉक्टरों ने बेटे के इलाज में 14 लाख का खर्च बताया है।
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घनश्याम ने बताया कि बीमार बेटे का उपचार में पत्नी के जेवरात बिक चुके हैं और कई संपर्क के लोगों से डेढ़ लाख से अधिक रुपये कर्ज ले चुके हैं। दो बेटों की मौत पहले ही हो चुकी है। इकलौते बेटे को बचाने के लिए कई जनप्रतिनिधियों से भी मिल चुके हैं। कुछ माह पूर्व सांसद शरद त्रिपाठी को तीस हजार का स्टीमेट दिया। सांसद की पहल से महज 15 हजार का सहयोग मिला। दुर्भाग्यवश जानकारी नहीं होने के कारण रुपया वापस चला गया। वह पैसा दुबारा मिल जाए, इसके लिए पत्राचार किया है।
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घनश्याम ने रूंधें गले से बताया कि उपचार में आने वाले खर्च 14 लाख की मदद पर बीमार बेटे की जिंदगी टिकी है। बेटे की जिंदगी बचाने के लिए जहां कोई मदद होने की संभावना दिखती है फौरन जाता हूं। डीएम से मुलाकात नहीं होने पर एडीएम केपी यादव को प्रार्थना पत्र देकर मदद दिलाने की मांग की।
बालवीर की इलाज के लिए 14 लाख खर्च होने की बात बताई है। रानी लक्ष्मी बाई महिला सम्मान कोष से मदद दिलाए जाने का आश्वासन दिया गया है। इसके लिए एम्स से स्टीमेट तैयार करवा कर मांग गया है। स्टीमेट के साथ प्रार्थना पत्र देने पर पत्रावली तैयार कर डीएम की अध्यक्षता वाली कमेटी के समक्ष प्रकरण को रखा जाएगा। प्रशासन की पूरी कोशिश होगी कि गरीब परिवार को बीमार बेटे के उपचार के लिए मदद दिलाई जाए।
विजय कुमार पांडेय, जिला प्रोवेशन अधिकारी।