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नौ गांवों में चकबंदी प्रक्रिया जल्द पूरी होने के आसार
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नौ गांवों में चकबंदी प्रक्रिया जल्द पूरी होने के आसार
संतकबीरनगर। जिले में सीएम के 100 दिन के अभियान के तहत नौ गांवों में चकबंदी प्रक्रिया पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है। उम्मीद है कि इन गांवों में चकबंदी की प्रक्रिया जल्द पूरी होने से किसानों को राहत मिलेगी।
जिला बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी चौधरी सुरेंद्र प्रसाद ने बताया कि जनपद के 69 गांवों में चकबंदी प्रक्रिया चल रही है। इसमें नौ गांवों की प्रक्रिया पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है। बढ़या और पिहुलाखोर गांव में कब्जा परिवर्तन का कार्य पूरा कर लिया गया है। इसके अलावा नीबा होरिल, मोहम्मदपुर कठार, मझौवा एकडग्गा, मुरादपुर, दुघरा कला और सांखी गांव में चकबंदी पूरी करने की कार्यवाही चल रही है। जिले में सबसे पुराना चकबंदी का गांव जंगलऊन है।
यहां 1992 से चकबंदी की प्रक्रिया चल रही है। वैसे तो पांच साल के भीतर ही चकबंदी प्रक्रिया पूर्ण कर लेने का नियम है, लेकिन जंगलऊन में समय अधिक लगा है। इसके पीछे वजह यह रही है कि यहां जिला बंदोबस्त अधिकारी का पद लंबे समय तक रिक्त रहा है। यहां का कार्य पूर्ण लिया गया है। सिर्फ गजट शेष है। वहीं, वर्ष 2005 से बगही में चकबंदी की प्रक्रिया चल रही है। यहां चक सीमांकन का कार्य चल रहा है। उसके बाद रिवीजन होगा। यहीं स्थिति मोहम्मदपुर कठार की भी है। पूरी कोशिश है कि 100 दिन के भीतर नौ गांवों की प्रक्रिया पूरी कर ली जाए।
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संतकबीरनगर। जिले में सीएम के 100 दिन के अभियान के तहत नौ गांवों में चकबंदी प्रक्रिया पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है। उम्मीद है कि इन गांवों में चकबंदी की प्रक्रिया जल्द पूरी होने से किसानों को राहत मिलेगी।
जिला बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी चौधरी सुरेंद्र प्रसाद ने बताया कि जनपद के 69 गांवों में चकबंदी प्रक्रिया चल रही है। इसमें नौ गांवों की प्रक्रिया पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है। बढ़या और पिहुलाखोर गांव में कब्जा परिवर्तन का कार्य पूरा कर लिया गया है। इसके अलावा नीबा होरिल, मोहम्मदपुर कठार, मझौवा एकडग्गा, मुरादपुर, दुघरा कला और सांखी गांव में चकबंदी पूरी करने की कार्यवाही चल रही है। जिले में सबसे पुराना चकबंदी का गांव जंगलऊन है।
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यहां 1992 से चकबंदी की प्रक्रिया चल रही है। वैसे तो पांच साल के भीतर ही चकबंदी प्रक्रिया पूर्ण कर लेने का नियम है, लेकिन जंगलऊन में समय अधिक लगा है। इसके पीछे वजह यह रही है कि यहां जिला बंदोबस्त अधिकारी का पद लंबे समय तक रिक्त रहा है। यहां का कार्य पूर्ण लिया गया है। सिर्फ गजट शेष है। वहीं, वर्ष 2005 से बगही में चकबंदी की प्रक्रिया चल रही है। यहां चक सीमांकन का कार्य चल रहा है। उसके बाद रिवीजन होगा। यहीं स्थिति मोहम्मदपुर कठार की भी है। पूरी कोशिश है कि 100 दिन के भीतर नौ गांवों की प्रक्रिया पूरी कर ली जाए।
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