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बिजली कटौती से आमजन बेहाल, बढ़ रहा आक्रोश
अमर उजाला ब्यूरो संतकबीरनगर
Updated Sun, 11 Oct 2015 12:50 AM IST
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सूखे की आशंका के बीच जिले में बिजली संकट से किसानों सहित
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आमजन जीवन बेहाल हो गया है। बिजली की कटौती के कारण लोगों की दिनचर्या
बिगड़ रही है।
बिजली कब आएंगी और कब जाएंगी यह किसी को पता नहीं रहता है। शेडयूल का कोई मतलब नहीं रह गया है। व्यापारी, छात्र, किसान,मजदूर,गृहिणी और नौकरी पेशे वाले लोग सभी परेशान हैं। अमर उजाला ने बिजली की समस्या पर कुछ लोगों से बातचीत की।
जय प्रकाश का कहना है कि बिजली के आने और जाने का कोई निश्चित समय नही है। रोस्टिग के बहाने कभी भी सप्लाई को बंद कर देते हैं। शेड्यूल का कोई मतलब नहीं रह गया है। बिजली हर घर की जरूरत है। बिजली की कम आपूर्ति से लोगों की दिनचर्या बिगड़ गई है।
गुड्डू का कहना है कि बिजली की अनियमित कटौती से विद्यार्थियों की पढ़ाई पर असर पड़ रहा है। विद्यालय से मिले होम वर्क को पूरा कर पाना संभव नही हैं । भीषण गर्मी में बिजली संकट से समस्या उत्पन्न हो गई है। यह सरकार की जिम्मेदारी है कि बिजली के आने जाने का समय निर्धारित हो। जनप्रतिनिधियों को भी पहल करनी चाहिए।
दिलीप कुमार का कहना है कि कम बारिश होने के कारण धान की फसल चौपट हो रही है। खेतों में पानी नजर नहीं आ रहा है। निजी साधन से सिंचाई महंगी पड़ रही है। धान की फसल बचाना मुश्किल हो रहा है। बिजली संकट के कारण गांवों में स्थित सरकारी नलकूप भी बंद पड़े है। धान की फसल सूखने के कगार पर है।
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बिजली कब आएंगी और कब जाएंगी यह किसी को पता नहीं रहता है। शेडयूल का कोई मतलब नहीं रह गया है। व्यापारी, छात्र, किसान,मजदूर,गृहिणी और नौकरी पेशे वाले लोग सभी परेशान हैं। अमर उजाला ने बिजली की समस्या पर कुछ लोगों से बातचीत की।
जय प्रकाश का कहना है कि बिजली के आने और जाने का कोई निश्चित समय नही है। रोस्टिग के बहाने कभी भी सप्लाई को बंद कर देते हैं। शेड्यूल का कोई मतलब नहीं रह गया है। बिजली हर घर की जरूरत है। बिजली की कम आपूर्ति से लोगों की दिनचर्या बिगड़ गई है।
गुड्डू का कहना है कि बिजली की अनियमित कटौती से विद्यार्थियों की पढ़ाई पर असर पड़ रहा है। विद्यालय से मिले होम वर्क को पूरा कर पाना संभव नही हैं । भीषण गर्मी में बिजली संकट से समस्या उत्पन्न हो गई है। यह सरकार की जिम्मेदारी है कि बिजली के आने जाने का समय निर्धारित हो। जनप्रतिनिधियों को भी पहल करनी चाहिए।
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दिलीप कुमार का कहना है कि कम बारिश होने के कारण धान की फसल चौपट हो रही है। खेतों में पानी नजर नहीं आ रहा है। निजी साधन से सिंचाई महंगी पड़ रही है। धान की फसल बचाना मुश्किल हो रहा है। बिजली संकट के कारण गांवों में स्थित सरकारी नलकूप भी बंद पड़े है। धान की फसल सूखने के कगार पर है।
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