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बारिश से बढ़ी ठंड, अलाव बना सहारा

Wed, 08 Jan 2020 11:06 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 08 Jan 2020 11:06 PM IST
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Cold rises due to rain, bonfire became bonfire
खलीलाबाद में बारिश में भीग कर गंतव्य पहुंचे लोग। - फोटो : KHALILABAD
बारिश से बढ़ी ठंड, अलाव बना सहारा
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संतकबीरनगर। मौसम का मिजाज बुधवार की सुबह अचानक बिगड़ गया। पहले तो बूंदाबांदी हुई, उसके बाद तेज बारिश से ठंड बढ़ गई। शहर से लेकर गांव तक जगह- जगह सड़कों पर कीचड़ पसर गया। जहां अलाव दिखा, वहीं लोग ठंड से बचने के लिए ठहर गए। सरकारी कार्यालयों में भी लोग हीटर का सहारा लेते देखे गए। बारिश से गेहूं की फसल को तो फायदा हुआ, लेकिन आलू, मटर और सरसों की फसलों के लिए नुकसान दायक बताया गया।
सुबह में बूंदाबादी हुई। दोपहर बाद तेज बारिश शुरू हो गई। सड़कों पर सन्नाटा पसर गया। सड़कें कीचड़ से सन गईं। इससे फिसलन का खतर बढ़ गया। ठंड से बचाव के लिए लोग घरों या फिर सुरक्षित सार्वजनिक स्थलों पर अलाव का सहारा लेते देखे गए। किसान सोनू गौड़, विजय शुक्ला, मेवालाल यादव, धीरज पांडेय और मोहित ने बताया कि बारिश से गेहूं की फसलों को फायदा है, लेकिन आलू, मटर और सरसों की फसलों के लिए नुकसानदायक है।
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ऐसे करें रोगों से फसलों की बचाव
जिला कृषि अधिकारी पीसी विश्वकर्मा ने बताया कि जनपद में छिटपुट होने वाली बारिश एवं तापमान में गिरावट के कारण रबी की फसलों में कीट रोग के प्रकोप की आशंका बढ़ गई है। गेहूं में पीली गेरूई रोग की आशंका है। गेहूं के पत्तियों पर पीले पाउडर की धारियों के रूप में दिखाई देता है तो प्रीपोकोलाजाल 25 प्रतिशत ईसी की 500 मिलीलीटर मात्रा को 600-700 लीटर पानी में घोल बना कर प्रति हेक्टेयर छिड़काव करना चाहिए। सरसों की फसल मं तुलासिता एवं अलटरनेरिया पत्ती धब्बा का खतरा बढ़ा है। इस रोग में पत्तियों पर जगह-जगह पीले गहरे भूरे रंग का धब्बा बनता है। आलू में अगेती या फिर पिछेती झुलसा रोग का खतरा बढ़ा है। पत्तियों में भूरे रंग का धब्बा बनता है। बाद में पत्ती झुलस जाती है। इससे बचाव के लिए कॉपर आक्सी क्लोराइड 50 प्रतिशत डब्लू पी की ढाई किलोग्राम मात्रा या जिनेब 75 प्रतिशत डब्लू पी की दो किलोग्राम मात्रा को 600-700 लीटर पानी में घोल बना कर छिड़काव करना चाहिए।
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