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कोरोना से अनाथ हुए बच्चों का सहारा बनेगी सीएम बाल सेवा योजना
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कोरोना से अनाथ हुए बच्चों का सहारा बनेगी सीएम बाल सेवा योजना
शून्य से 18 साल की उम्र के बच्चों को मिलेगा लाभ, माता या पिता किसी एक की मौत पर भी मिलेगा लाभ
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। कोरोना संक्रमण काल में माता-पिता या दोनों में से किसी एक की मौत के बाद अनाथ हुए बच्चों का भविष्य मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना से संवारा जाएगा। योजना को धरातल पर उतारने में महिला एवं बाल विकास विभाग पूरी मुस्तैदी से जुट गया है।
जिला प्रोबेशन कल्याण अधिकारी श्वेता त्रिपाठी ने बताया कि मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना से जिन बच्चों को लाभान्वित किया जाना है, उनकी श्रेणी तय कर दी गईं हैं। योजना में शून्य से 18 साल के ऐसे बच्चे शामिल किए जाएंगे जिनके माता-पिता दोनों की मृत्यु कोरोना संक्रमण काल में हो गई हो या माता-पितामें से एक की मृत्यु एक मार्च 2020 से पहले हो गई थी और दूसरे की मृत्यु कोविड काल में हो गई अथवा दोनों की मौत एक मार्च 2020 से पहले हो गई थी और वैध संरक्षक की मृत्यु कोविड काल में हो गई। शून्य से 18 साल के ऐसे बच्चे जिनके माता-पितामें से किसी एक की मृत्यु कोविड काल में हो गई हो और वह परिवार का मुख्य कर्ता हो और वर्तमान में जीवित माता या पिता सहित परिवार की आय दो लाख रुपये प्रतिवर्ष से अधिक न हो ऐसे बच्चाें को भी योजना में शामिल किया गया है। लाभार्थी अनिवार्य रूप से उत्तरप्रदेश का मूल निवासी हो।एक परिवार के सभी (जैविक तथा कानूनी रूप से गोद लिए गए) बच्चों को योजना का लाभ मिल सकेगा।
योजना के तहत मिलने वाला लाभ
योजना के तहत शून्य से 10 साल के बच्चों के वैध संरक्षक के बैंक खाते में 4000 रुपये प्रतिमाह दिए जाएंगे। शर्त यह होगी कि औपचारिक शिक्षा के लिए बच्चे का पंजीयन किसी मान्यता प्राप्त विद्यालय में कराया गया हो। समय से टीकाकरण कराया गया हो और बच्चे के स्वास्थ्य व पोषण का पूरा ध्यान रखा जा रहा हो। जो बच्चे पूरी तरह अनाथ हो गए हों और बाल कल्याण समिति के आदेश से विभाग के तहत संचालित बाल्य देखभाल संस्थाओं में आवासित कराए गए हों, उनको कक्षा छह से 12 तक की शिक्षा के लिए अटल आवासीय विद्यालयों व कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों में प्रवेशित कराया जाएगा।
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इस तरह करें आवेदन
जिला बाल संरक्षण इकाई और बाल कल्याण समिति द्वारा चिह्नांकन के 15 दिन के भीतर आवेदन प्रक्रिया पूर्ण कराई जाएगी। निर्धारित प्रारूप पूर्ण रूप से भरकर ऑफलाइन तरीके से ग्रामीण क्षेत्रों में ग्रामविकास/पंचायत अधिकारी या विकास खंड या जिला प्रोबेशन अधिकारी कार्यालय पर जमा करना होगा। शहरी क्षेत्रों में लेखपाल या तहसील या जिला प्रोबेशन अधिकारी कार्यालय में जमा किए जा सकते हैं। माता-पिता/माता या पिता की मृत्यु से दो वर्ष के भीतर आवेदन और अनुमोदन की तिथि से लाभ अनुमन्य होगा।
इन दस्तावेजों को लगाना होगा
- बच्चे और अभिभावक की नवीनतम फोटो सहित पूर्ण आवेदन
- माता/पिता दोनों जैसी भी स्थिति हो का मृत्यु प्रमाण पत्र
- कोविड-19 से मृत्यु का साक्ष्य
- आय प्रमाण पत्र (माता-पिता दोनों की मृत्यु की स्थिति में जरूरी नहीं)
- बच्चे का आयु प्रमाण पत्र
- शिक्षण संस्थान में पंजीयन का प्रमाण पत्र
- उत्तर प्रदेश का निवासी होने का घोषणा पत्र
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शून्य से 18 साल की उम्र के बच्चों को मिलेगा लाभ, माता या पिता किसी एक की मौत पर भी मिलेगा लाभ
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। कोरोना संक्रमण काल में माता-पिता या दोनों में से किसी एक की मौत के बाद अनाथ हुए बच्चों का भविष्य मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना से संवारा जाएगा। योजना को धरातल पर उतारने में महिला एवं बाल विकास विभाग पूरी मुस्तैदी से जुट गया है।
जिला प्रोबेशन कल्याण अधिकारी श्वेता त्रिपाठी ने बताया कि मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना से जिन बच्चों को लाभान्वित किया जाना है, उनकी श्रेणी तय कर दी गईं हैं। योजना में शून्य से 18 साल के ऐसे बच्चे शामिल किए जाएंगे जिनके माता-पिता दोनों की मृत्यु कोरोना संक्रमण काल में हो गई हो या माता-पितामें से एक की मृत्यु एक मार्च 2020 से पहले हो गई थी और दूसरे की मृत्यु कोविड काल में हो गई अथवा दोनों की मौत एक मार्च 2020 से पहले हो गई थी और वैध संरक्षक की मृत्यु कोविड काल में हो गई। शून्य से 18 साल के ऐसे बच्चे जिनके माता-पितामें से किसी एक की मृत्यु कोविड काल में हो गई हो और वह परिवार का मुख्य कर्ता हो और वर्तमान में जीवित माता या पिता सहित परिवार की आय दो लाख रुपये प्रतिवर्ष से अधिक न हो ऐसे बच्चाें को भी योजना में शामिल किया गया है। लाभार्थी अनिवार्य रूप से उत्तरप्रदेश का मूल निवासी हो।एक परिवार के सभी (जैविक तथा कानूनी रूप से गोद लिए गए) बच्चों को योजना का लाभ मिल सकेगा।
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योजना के तहत मिलने वाला लाभ
योजना के तहत शून्य से 10 साल के बच्चों के वैध संरक्षक के बैंक खाते में 4000 रुपये प्रतिमाह दिए जाएंगे। शर्त यह होगी कि औपचारिक शिक्षा के लिए बच्चे का पंजीयन किसी मान्यता प्राप्त विद्यालय में कराया गया हो। समय से टीकाकरण कराया गया हो और बच्चे के स्वास्थ्य व पोषण का पूरा ध्यान रखा जा रहा हो। जो बच्चे पूरी तरह अनाथ हो गए हों और बाल कल्याण समिति के आदेश से विभाग के तहत संचालित बाल्य देखभाल संस्थाओं में आवासित कराए गए हों, उनको कक्षा छह से 12 तक की शिक्षा के लिए अटल आवासीय विद्यालयों व कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों में प्रवेशित कराया जाएगा।
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इस तरह करें आवेदन
जिला बाल संरक्षण इकाई और बाल कल्याण समिति द्वारा चिह्नांकन के 15 दिन के भीतर आवेदन प्रक्रिया पूर्ण कराई जाएगी। निर्धारित प्रारूप पूर्ण रूप से भरकर ऑफलाइन तरीके से ग्रामीण क्षेत्रों में ग्रामविकास/पंचायत अधिकारी या विकास खंड या जिला प्रोबेशन अधिकारी कार्यालय पर जमा करना होगा। शहरी क्षेत्रों में लेखपाल या तहसील या जिला प्रोबेशन अधिकारी कार्यालय में जमा किए जा सकते हैं। माता-पिता/माता या पिता की मृत्यु से दो वर्ष के भीतर आवेदन और अनुमोदन की तिथि से लाभ अनुमन्य होगा।
इन दस्तावेजों को लगाना होगा
- बच्चे और अभिभावक की नवीनतम फोटो सहित पूर्ण आवेदन
- माता/पिता दोनों जैसी भी स्थिति हो का मृत्यु प्रमाण पत्र
- कोविड-19 से मृत्यु का साक्ष्य
- आय प्रमाण पत्र (माता-पिता दोनों की मृत्यु की स्थिति में जरूरी नहीं)
- बच्चे का आयु प्रमाण पत्र
- शिक्षण संस्थान में पंजीयन का प्रमाण पत्र
- उत्तर प्रदेश का निवासी होने का घोषणा पत्र