{"_id":"60ce2f908ebc3e335a0aac2a","slug":"children-remebered-father-khalilabad-news-gkp398738327","type":"story","status":"publish","title_hn":"पिता को याद कर भर आईं आंखें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पिता को याद कर भर आईं आंखें
विज्ञापन
धनघटा के उदहा गांव में पिता की मौत के बाद मासूम बच्चे।संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : KHALILABAD
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पिता को याद कर भर आईं आंखें
ठेले पर चाट बेचकर बच्चों का भविष्य संवारने का देखा था सपना
दो वक्त की रोटी के लिए मुहाल परिवार गांव वालों की दया पर निर्भर
संवाद न्यूज एजेंसी
धनघटा/रोसया। एक माह पूर्व ठेले पर चाट बेचकर बच्चों का भविष्य संवारने वाले पिता की मौत हो गई थी। फादर्स डे पर अपने पिता को याद कर बच्चे रो पड़े। पिता की मौत के बाद दो वक्त की रोटी के लिए मुहाल परिवार गांव वालों की दया पर निर्भर है।
शिवापार निवासी 47 वर्षीय जगजीवन ठेले पर चाट बेचकर परिवार का पालन-पोषण करते थे। कड़ी मेहनत करके बच्चों की उचित परवरिश और अच्छी शिक्षा दिलाकर कामयाब बनाने का सपना देखे थे। 13 मई को जगजीवन की तबीयत खराब हुई। तेज बुखार और सर्दी, खांसी से पीड़ित थे। इसकी वजह से उन्हें सीएचसी शनिचरा बाजार ले जाया गया, जहां कोरोना बताकर डॉक्टरों ने इलाज के लिए जिला अस्पताल ले जाने की सलाह दी। आर्थिक तंगी की चलते परिवार के लोग उन्हें कहीं ले जा नहीं पाए और 15 मई को उनकी मौत हो गई। पिता की मौत से बच्चे अनाथ हो गए। बड़ी बेटी 15 वर्षीय हीरा और नौ वर्षीय मीरा फादर्स डे पर अपने पिता को याद कर रो पड़ीं। दोनों बहनों ने अपनी छोटी पांच वर्षीय बहन जुगुना और भाई कान्हा के अलावा नौ माह के आर्यवन का जिक्र किया। बच्चों के सिर से पिता साया उठ जाने से वे अनाथ हो र्गइं। आर्थिक तंगी का हाल बयां की और बताया कि गांव के लोगों के सहयोग से किसी तरह पिता का क्रिया-कर्म हुआ। अब परिवार के लोगों के समक्ष दो वक्त की रोटी का संकट उत्पन्न हो गया। फादर्स डे पर सिर्फ पिता की यादें बची हैं। पीड़ित पत्नी निर्मला ने कहा कि प्रधान राम उजागिर दूबे और गांव के लोग सहारा बन गए हैं। प्रशासन से इस परिवार को मदद की दरकार है।
विज्ञापन
ठेले पर चाट बेचकर बच्चों का भविष्य संवारने का देखा था सपना
दो वक्त की रोटी के लिए मुहाल परिवार गांव वालों की दया पर निर्भर
संवाद न्यूज एजेंसी
धनघटा/रोसया। एक माह पूर्व ठेले पर चाट बेचकर बच्चों का भविष्य संवारने वाले पिता की मौत हो गई थी। फादर्स डे पर अपने पिता को याद कर बच्चे रो पड़े। पिता की मौत के बाद दो वक्त की रोटी के लिए मुहाल परिवार गांव वालों की दया पर निर्भर है।
शिवापार निवासी 47 वर्षीय जगजीवन ठेले पर चाट बेचकर परिवार का पालन-पोषण करते थे। कड़ी मेहनत करके बच्चों की उचित परवरिश और अच्छी शिक्षा दिलाकर कामयाब बनाने का सपना देखे थे। 13 मई को जगजीवन की तबीयत खराब हुई। तेज बुखार और सर्दी, खांसी से पीड़ित थे। इसकी वजह से उन्हें सीएचसी शनिचरा बाजार ले जाया गया, जहां कोरोना बताकर डॉक्टरों ने इलाज के लिए जिला अस्पताल ले जाने की सलाह दी। आर्थिक तंगी की चलते परिवार के लोग उन्हें कहीं ले जा नहीं पाए और 15 मई को उनकी मौत हो गई। पिता की मौत से बच्चे अनाथ हो गए। बड़ी बेटी 15 वर्षीय हीरा और नौ वर्षीय मीरा फादर्स डे पर अपने पिता को याद कर रो पड़ीं। दोनों बहनों ने अपनी छोटी पांच वर्षीय बहन जुगुना और भाई कान्हा के अलावा नौ माह के आर्यवन का जिक्र किया। बच्चों के सिर से पिता साया उठ जाने से वे अनाथ हो र्गइं। आर्थिक तंगी का हाल बयां की और बताया कि गांव के लोगों के सहयोग से किसी तरह पिता का क्रिया-कर्म हुआ। अब परिवार के लोगों के समक्ष दो वक्त की रोटी का संकट उत्पन्न हो गया। फादर्स डे पर सिर्फ पिता की यादें बची हैं। पीड़ित पत्नी निर्मला ने कहा कि प्रधान राम उजागिर दूबे और गांव के लोग सहारा बन गए हैं। प्रशासन से इस परिवार को मदद की दरकार है।
विज्ञापन