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Sant Kabir Nagar News: सीएचसी सेमरियावां में दो माह से सीबीसह जांच बंद
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सीएचसी सेमरियांवा की पैथालॉजी में जांच के लिए उपस्थित मरीज
सेमरियावां। सीएचसी सेमरियावां का पैथोलाॅजी में मरीजों को जांच सुविधाएं देने में नाकाम साबित हो रहा है। सीबीसी जांच मशीन में दो माह से ज्यादा समय से जांच केमिकल (रीजेंट) नहीं होने की वजह से जांच के लिए मरीज भटकने को मजबूर हैं। मजबूरी में मरीजों को प्राइवेट पैथोलाॅजी में अपनी जेब ढीली करनी पड़ रही है।
सीएचसी सेमरियावां में ब्लाॅक पब्लिक हेल्थ यूनिट भवन में 100 से अधिक जांच करने का दावा किया जाता है। लेकिन हकीकत कुछ और है। लैब सेंटर में सीबीसी जांच मशीन में दो माह से जांच केमिकल रीजेंट नहीं है। 30 शैय्या वाले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सेमरियावां के साथ ही आंशिक रूप से बघौली, बेलहर कला, सांथा और बस्ती जनपद के साऊंघाट, रुधौली ब्लाॅक के गांवों के लोग आते हैं। सीएचसी सेमरियावां पर पांच लाख से अधिक जनसंख्या इलाज के लिए आश्रित है। रोजाना 300-400 मरीज आते हैं।
चिकित्सक इनमें से 40 फीसदी मरीजों को सीबीसी खून जांच की सलाह देते हैं ताकि परीक्षण के हिसाब से इलाज किया जा सके। इरशाद अहमद, राम कुमार, अबूजर चौधरी, संतोष प्रजापति, अफसरूद्दीन आदि ने बताया कि सीएचसी लैब में सीबीसी मशीन में रीजेंट नहीं है कहकर मरीजों को लौटा दिया जाता है।
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दो माह से ज्यादा समय से यही हाल है। निजी पैथालॉजी वाले लैब के पास खड़े रहते हैं। मरीजों को मजबूरी में ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ते हैं।
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सीएचसी सेमरियावां में ब्लाॅक पब्लिक हेल्थ यूनिट भवन में 100 से अधिक जांच करने का दावा किया जाता है। लेकिन हकीकत कुछ और है। लैब सेंटर में सीबीसी जांच मशीन में दो माह से जांच केमिकल रीजेंट नहीं है। 30 शैय्या वाले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सेमरियावां के साथ ही आंशिक रूप से बघौली, बेलहर कला, सांथा और बस्ती जनपद के साऊंघाट, रुधौली ब्लाॅक के गांवों के लोग आते हैं। सीएचसी सेमरियावां पर पांच लाख से अधिक जनसंख्या इलाज के लिए आश्रित है। रोजाना 300-400 मरीज आते हैं।
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चिकित्सक इनमें से 40 फीसदी मरीजों को सीबीसी खून जांच की सलाह देते हैं ताकि परीक्षण के हिसाब से इलाज किया जा सके। इरशाद अहमद, राम कुमार, अबूजर चौधरी, संतोष प्रजापति, अफसरूद्दीन आदि ने बताया कि सीएचसी लैब में सीबीसी मशीन में रीजेंट नहीं है कहकर मरीजों को लौटा दिया जाता है।
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दो माह से ज्यादा समय से यही हाल है। निजी पैथालॉजी वाले लैब के पास खड़े रहते हैं। मरीजों को मजबूरी में ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ते हैं।