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Sant Kabir Nagar News: फर्जी बैनामा कराने के मामले में 25 लोगों पर केस दर्ज करने का आदेश
Wed, 20 Dec 2023 11:49 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Wed, 20 Dec 2023 11:49 PM IST
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पीडि़त अधिवक्ता की अपील पर न्यायिक मजिस्ट्रेट ने दिया आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। न्यायालय न्यायिक मजिस्ट्रेट भारती तायल की कोर्ट ने फर्जी तरीके से 13 एकड़ भूमि के फर्जी बैनामा में आरोपी बनाए गए 25 लोगों के विरुद्ध थानाध्यक्ष धनघटा को केस दर्ज करने का आदेश दिया है
पीड़ित अधिवक्ता राम अनुज राय ने बताया कि वह थाना धनघटा अंतर्गत ग्राम सिरसी के रहने वाले हैं। उसके बाबा गौरी शंकर राय के चाचा राम अचल राय की 13 एकड़ भूमि, जिसका मूल्य लगभग तीन करोड़ रुपये है। आरोप है कि ग्राम सिरसी उपरोक्त अराजियत की भूमि का फर्जी बैनामा नौ नवम्बर 1979 को भैसाटीकर और सिरसी के करीब 25 लोगाें ने करा लिया।
उक्त फर्जी दस्तावेज के आधार पर अपना नामांतरण भी सहायक चकबंदी अधिकारी के न्यायालय में राम अचल की जगह किसी दीगर व्यक्ति का अंगूठा निशानी लगवा कर फर्जी समझौते के आधार पर करवा लिया। आरोप है कि राम अचल राय को जानकारी हुई तो उन्होंने उक्त फर्जी बैनामा व फर्जी सुलहनामा के आधार पर पारित नामांतरण आदेश के विरुद्ध अपील बंदोबस्त अधिकारी के न्यायालय में प्रस्तुत किया। अपील अब भी बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी अधिकारी के न्यायालय में विचाराधीन है। राम अचल राय की मृत्यु हो चुकी है।
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पीड़ित अधिवक्ता राम अचल राय द्वारा प्रस्तुत अपील के इकलौते वारिस हैं। पीड़ित अधिवक्ता ने आरोप लगाया है कि आरोपियों द्वारा कूटरचित दस्तावेज बैनामा आरोपियों की कस्टडी में है। इसको प्रस्तुत कर पाना और उक्त दस्तावेज पर लगाए गए फर्जी अंगूठा का मिलान राम अचल द्वारा लिखित किसी अन्य पंजीकृत दस्तावेज से करना उसके लिए संभव नहीं है। इसलिए विवादित बैनामा दस्तावेज बिना पुलिस विवेचना के संभव नहीं होगा। फर्जी राम अचल बनकर उनकी जगह किस व्यक्ति ने निशानी अंगूठा लगाया। इसका पता लगाया जाना बिना पुलिस विवेचना के संभव नहीं है। पीड़ित अधिवक्ता ने इसकी सूचना थाना धनघटा में दी परंतु कोई कार्रवाई नहीं हुई। उसके बाद लिखित सूचना पंजीकृत डाक से एसपी को दी। परंतु आज तक आरोपियों के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं होने पर पीड़ित अधिवक्ता ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने पीड़ित अधिवक्ता की सारी बातों को सुनने के बाद सभी 25 आरोपियों के विरुद्ध थानाध्यक्ष धनघटा को केस पंजीकृत करने तथा विवेचना करने के साथ ही सात दिन के अंदर आख्या भी प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। न्यायालय न्यायिक मजिस्ट्रेट भारती तायल की कोर्ट ने फर्जी तरीके से 13 एकड़ भूमि के फर्जी बैनामा में आरोपी बनाए गए 25 लोगों के विरुद्ध थानाध्यक्ष धनघटा को केस दर्ज करने का आदेश दिया है
पीड़ित अधिवक्ता राम अनुज राय ने बताया कि वह थाना धनघटा अंतर्गत ग्राम सिरसी के रहने वाले हैं। उसके बाबा गौरी शंकर राय के चाचा राम अचल राय की 13 एकड़ भूमि, जिसका मूल्य लगभग तीन करोड़ रुपये है। आरोप है कि ग्राम सिरसी उपरोक्त अराजियत की भूमि का फर्जी बैनामा नौ नवम्बर 1979 को भैसाटीकर और सिरसी के करीब 25 लोगाें ने करा लिया।
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उक्त फर्जी दस्तावेज के आधार पर अपना नामांतरण भी सहायक चकबंदी अधिकारी के न्यायालय में राम अचल की जगह किसी दीगर व्यक्ति का अंगूठा निशानी लगवा कर फर्जी समझौते के आधार पर करवा लिया। आरोप है कि राम अचल राय को जानकारी हुई तो उन्होंने उक्त फर्जी बैनामा व फर्जी सुलहनामा के आधार पर पारित नामांतरण आदेश के विरुद्ध अपील बंदोबस्त अधिकारी के न्यायालय में प्रस्तुत किया। अपील अब भी बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी अधिकारी के न्यायालय में विचाराधीन है। राम अचल राय की मृत्यु हो चुकी है।
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पीड़ित अधिवक्ता राम अचल राय द्वारा प्रस्तुत अपील के इकलौते वारिस हैं। पीड़ित अधिवक्ता ने आरोप लगाया है कि आरोपियों द्वारा कूटरचित दस्तावेज बैनामा आरोपियों की कस्टडी में है। इसको प्रस्तुत कर पाना और उक्त दस्तावेज पर लगाए गए फर्जी अंगूठा का मिलान राम अचल द्वारा लिखित किसी अन्य पंजीकृत दस्तावेज से करना उसके लिए संभव नहीं है। इसलिए विवादित बैनामा दस्तावेज बिना पुलिस विवेचना के संभव नहीं होगा। फर्जी राम अचल बनकर उनकी जगह किस व्यक्ति ने निशानी अंगूठा लगाया। इसका पता लगाया जाना बिना पुलिस विवेचना के संभव नहीं है। पीड़ित अधिवक्ता ने इसकी सूचना थाना धनघटा में दी परंतु कोई कार्रवाई नहीं हुई। उसके बाद लिखित सूचना पंजीकृत डाक से एसपी को दी। परंतु आज तक आरोपियों के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं होने पर पीड़ित अधिवक्ता ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने पीड़ित अधिवक्ता की सारी बातों को सुनने के बाद सभी 25 आरोपियों के विरुद्ध थानाध्यक्ष धनघटा को केस पंजीकृत करने तथा विवेचना करने के साथ ही सात दिन के अंदर आख्या भी प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।