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Sant Kabir Nagar News: एक छत के नीचे सुविधाएं पाने का टूट रहा ख्वाब
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रानीपार गांव में अधूरा पंचायत भवन।संवाद
- फोटो : KHALILABAD
एक छत के नीचे सुविधाएं पाने का टूट रहा ख्वाब
नहीं बैठ रहे ग्राम सचिव, रोजगार सेवक व अन्य कर्मी
अधिकतर पंचायत भवनों में धूल फांक रहीं कुर्सियां व कंप्यूटर
संतकबीरनगर। पंचायत भवनों में एक छत के नीचे सभी सुविधाएं पाने का ग्रामीणों का ख्वाब टूट रहा है। ग्राम पंचायतों में न तो ग्राम सचिव बैठ रहे हैं और न ही रोजगार सेवक व अन्य कर्मी। ग्रामीणों को जन्म, मृत्यु, जाति, निवास, आय प्रमाणपत्र के साथ गोल्डन कार्ड के लिए ब्लॉक का चक्कर लगाना पड़ रहा है। वाईफाई की सुविधा से भी लोग वंचित हैं।
जिले में 754 ग्राम पंचायतें हैं। 497 ग्राम पंचायतों में पंचायत भवन बनाने का लक्ष्य तय किया गया था। अब तक 452 पंचायत भवन ही बन सके हैं। 45 पंचायत भवन अधूरे हैं। जिन ग्राम पंचायतों में पंचायत भवन बन गए हैं, वहां भी ग्रामीणों की जरूरत पूरी नहीं हो पा रही है।
छह माह पहले ग्राम पंचायतों को सक्रिय करने के लिए प्रत्येक पंचायत भवन के लिए एक लाख 75 हजार रुपये उपलब्ध कराए गए थे। पंचायत सहायकों की नियुक्ति की गई। कंप्यूटर उपलब्ध कराए गए, ताकि ग्रामीणों को संबंधित कागजात बनवाने के लिए ब्लॉक व तहसील की ओर रुख न करना पड़ें।
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वर्तमान में अधिकतर पंचायत भवनों में ग्राम सचिव, रोजगार सेवक और अन्य कर्मी नहीं बैठ रहे हैं। पंचायत सहायक के जिम्मे पूरी व्यवस्था छोड़ दी गई है। ग्राम पंचायत रानीपार में पंचायत भवन अधूरा पड़ा है। यहां की कुर्सी, कंप्यूटर आदि ग्राम प्रधान ने दूसरी जगह रखवा दिया है।
...
कोट
पंचायत भवनों को सक्रिय करने के निर्देश दिए गए हैं। रोस्टर बनाकर कर्मी पंचायत भवनों पर बैठना सुनिश्चित करें, ताकि ग्रामीणों को सुविधाएं मिल सकें।
- राजेंद्र प्रसाद, डीपीआरओ
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नहीं बैठ रहे ग्राम सचिव, रोजगार सेवक व अन्य कर्मी
अधिकतर पंचायत भवनों में धूल फांक रहीं कुर्सियां व कंप्यूटर
संतकबीरनगर। पंचायत भवनों में एक छत के नीचे सभी सुविधाएं पाने का ग्रामीणों का ख्वाब टूट रहा है। ग्राम पंचायतों में न तो ग्राम सचिव बैठ रहे हैं और न ही रोजगार सेवक व अन्य कर्मी। ग्रामीणों को जन्म, मृत्यु, जाति, निवास, आय प्रमाणपत्र के साथ गोल्डन कार्ड के लिए ब्लॉक का चक्कर लगाना पड़ रहा है। वाईफाई की सुविधा से भी लोग वंचित हैं।
जिले में 754 ग्राम पंचायतें हैं। 497 ग्राम पंचायतों में पंचायत भवन बनाने का लक्ष्य तय किया गया था। अब तक 452 पंचायत भवन ही बन सके हैं। 45 पंचायत भवन अधूरे हैं। जिन ग्राम पंचायतों में पंचायत भवन बन गए हैं, वहां भी ग्रामीणों की जरूरत पूरी नहीं हो पा रही है।
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छह माह पहले ग्राम पंचायतों को सक्रिय करने के लिए प्रत्येक पंचायत भवन के लिए एक लाख 75 हजार रुपये उपलब्ध कराए गए थे। पंचायत सहायकों की नियुक्ति की गई। कंप्यूटर उपलब्ध कराए गए, ताकि ग्रामीणों को संबंधित कागजात बनवाने के लिए ब्लॉक व तहसील की ओर रुख न करना पड़ें।
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वर्तमान में अधिकतर पंचायत भवनों में ग्राम सचिव, रोजगार सेवक और अन्य कर्मी नहीं बैठ रहे हैं। पंचायत सहायक के जिम्मे पूरी व्यवस्था छोड़ दी गई है। ग्राम पंचायत रानीपार में पंचायत भवन अधूरा पड़ा है। यहां की कुर्सी, कंप्यूटर आदि ग्राम प्रधान ने दूसरी जगह रखवा दिया है।
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कोट
पंचायत भवनों को सक्रिय करने के निर्देश दिए गए हैं। रोस्टर बनाकर कर्मी पंचायत भवनों पर बैठना सुनिश्चित करें, ताकि ग्रामीणों को सुविधाएं मिल सकें।
- राजेंद्र प्रसाद, डीपीआरओ