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असनहरा घाट पर पुल तैयार, राह हुई आसान
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कठिनईया नदी के स्नहरा घाट पर बन कर तैयार हुआ पुल।संवाद
- फोटो : KHALILABAD
असनहरा घाट पर पुल तैयार, राह हुई आसान
वर्ष 2013 से 2018 तक कई बार लोगों ने पुल के लिए था आंदोलन
पुल निर्माण में खर्च हुए 113 करोड़ रुपये
शोभित कुमार पांडेय
संतकबीरनगर। कठिनईया नदी के असनहरा घाट पर पुल बनकर तैयार हो गया है। इससे बस्ती के मुंडेरवा और संतकबीरनगर जिले के डेढ़ दर्जन से अधिक गांवों के लोगों की राह आसान हो गई है। पुल निर्माण से जल सत्याग्रह करने वालों के साथ क्षेत्रीय लोगों में खुशी की लहर है।
कठिनईया नदी के असनहरा घाट पर पुल निर्माण की मांग क्षेत्रीय लोग लंबे समय से कर रहे थे, लेकिन उनकी मांग अनसुनी हो जा रही थी। लोग चंदा जुटा कर हर साल बांस-बल्ली का अस्थायी पुल बनाते थे। बारिश में पुल बह जाता था। असनहरा घाट पर पुल निर्माण के लिए जनवरी 2013 में क्षेत्रीय लोगों ने तीन दिन तक आंदोलन किया था। प्रशासन ने समझाने मान गए थे।
वर्ष 2015 में नौ दिन तक लोगों ने आंदोलन किया था। वर्ष 2018 में असनहरा गांव के लोगों ने जल सत्याग्रह आंदोलन किया। एक अगस्त 2018 से आंदोलन शुरू हुआ और 24 अगस्त तक चला। पूर्व सांसद स्वर्गीय शरद त्रिपाठी, राज्यसभा सदस्य सकलदीप राजभर आदि जनप्रतिनिधियों ने आंदोलकारियों को समझया, तब जाकर लोग मान गए।
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पूर्व सांसद स्वर्गीय शरद त्रिपाठी की पहल से असनहरा घाट पर पुल स्वीकृत हुआ। कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश अभियंत्रण श्रम सहकारी संघ लिमिटेड ने कार्य कराया। ठेकेदार टिल्लू उपाध्याय ने बताया कि असनहरा घाट पर 113 करोड़ रुपये की लागत से 20 मीटर लंबा पुल बनाया गया है। कोरोना काल में पुल बनाने में दिक्कत आई। इससे अधिक वक्त लगा। अब पुल तैयार हो गया है। संवाद
...
संघर्ष रहा सार्थक, लोगों को मिला पक्का पुल
जल सत्याग्रह आंदोलन के संस्थापक रहे शैलेश राजभर ने कहा कि असनहरा घाट पर पुल निर्माण की मांग को लेकर ग्रामीणों के साथ लंबा संघर्ष किया गया। वर्ष 2013 से लेकर वर्ष 2018 तक कई बार जल सत्याग्रह करना पड़ा था। आंदोलन के दौरान14 सितंबर 2018 को जल सत्याग्रही देवीशरण की मौत हो गई थी। संघर्ष का परिणाम रहा कि पक्का पुल बनकर तैयार हो गया। पुल बन जाने से असनहरा, चंगेरा-मंगेरा, टेमा रहमत, छपिया, सालेहपुर, पिपरा, केनौना, छपिया-छितौना, जगदीशपुर, मुंडेरवा, मंझरिया समेत कई गांवों के लोगों को आने-जाने मेें सहूलियत होगी। सरोजा राजभर, सुखराम, रामसुमिरन, रामसूरत, राममिलन, कोमल, अनारा देवी, शोभा, केवला, रामकेश आदि ने खुशी जाहिर की।
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वर्ष 2013 से 2018 तक कई बार लोगों ने पुल के लिए था आंदोलन
पुल निर्माण में खर्च हुए 113 करोड़ रुपये
शोभित कुमार पांडेय
संतकबीरनगर। कठिनईया नदी के असनहरा घाट पर पुल बनकर तैयार हो गया है। इससे बस्ती के मुंडेरवा और संतकबीरनगर जिले के डेढ़ दर्जन से अधिक गांवों के लोगों की राह आसान हो गई है। पुल निर्माण से जल सत्याग्रह करने वालों के साथ क्षेत्रीय लोगों में खुशी की लहर है।
कठिनईया नदी के असनहरा घाट पर पुल निर्माण की मांग क्षेत्रीय लोग लंबे समय से कर रहे थे, लेकिन उनकी मांग अनसुनी हो जा रही थी। लोग चंदा जुटा कर हर साल बांस-बल्ली का अस्थायी पुल बनाते थे। बारिश में पुल बह जाता था। असनहरा घाट पर पुल निर्माण के लिए जनवरी 2013 में क्षेत्रीय लोगों ने तीन दिन तक आंदोलन किया था। प्रशासन ने समझाने मान गए थे।
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वर्ष 2015 में नौ दिन तक लोगों ने आंदोलन किया था। वर्ष 2018 में असनहरा गांव के लोगों ने जल सत्याग्रह आंदोलन किया। एक अगस्त 2018 से आंदोलन शुरू हुआ और 24 अगस्त तक चला। पूर्व सांसद स्वर्गीय शरद त्रिपाठी, राज्यसभा सदस्य सकलदीप राजभर आदि जनप्रतिनिधियों ने आंदोलकारियों को समझया, तब जाकर लोग मान गए।
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पूर्व सांसद स्वर्गीय शरद त्रिपाठी की पहल से असनहरा घाट पर पुल स्वीकृत हुआ। कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश अभियंत्रण श्रम सहकारी संघ लिमिटेड ने कार्य कराया। ठेकेदार टिल्लू उपाध्याय ने बताया कि असनहरा घाट पर 113 करोड़ रुपये की लागत से 20 मीटर लंबा पुल बनाया गया है। कोरोना काल में पुल बनाने में दिक्कत आई। इससे अधिक वक्त लगा। अब पुल तैयार हो गया है। संवाद
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संघर्ष रहा सार्थक, लोगों को मिला पक्का पुल
जल सत्याग्रह आंदोलन के संस्थापक रहे शैलेश राजभर ने कहा कि असनहरा घाट पर पुल निर्माण की मांग को लेकर ग्रामीणों के साथ लंबा संघर्ष किया गया। वर्ष 2013 से लेकर वर्ष 2018 तक कई बार जल सत्याग्रह करना पड़ा था। आंदोलन के दौरान14 सितंबर 2018 को जल सत्याग्रही देवीशरण की मौत हो गई थी। संघर्ष का परिणाम रहा कि पक्का पुल बनकर तैयार हो गया। पुल बन जाने से असनहरा, चंगेरा-मंगेरा, टेमा रहमत, छपिया, सालेहपुर, पिपरा, केनौना, छपिया-छितौना, जगदीशपुर, मुंडेरवा, मंझरिया समेत कई गांवों के लोगों को आने-जाने मेें सहूलियत होगी। सरोजा राजभर, सुखराम, रामसुमिरन, रामसूरत, राममिलन, कोमल, अनारा देवी, शोभा, केवला, रामकेश आदि ने खुशी जाहिर की।