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लेडुआ-महुआ और मेंहदावल कस्बे के दोनों युवक यूक्रेन से लौटे
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लेडुआ-महुआ और मेंहदावल कस्बे के दोनों युवक यूक्रेन से लौटे
बखिरा(संतकबीरनगर)। यूक्रेन में फंसे क्षेत्र के लेडुआ-महुआ और मेंहदावल कस्बे के दोनों युवक घर लौट आए हैं। दोनों एमबीबीएस के छात्र हैं। लेडुआ महुआ के निवासी मोहम्मद शाद घर पहुंचे परिजनों की आंखें खुशी से भर आईं। जबकि मेंहदावल के आयुष दिल्ली में ही अपने चाचा के पास रुक गए हैं।
लेडुआ-महुआ निवासी मोहम्मद इशहाक अंसारी के छोटे बेटे मोहम्मद शाद अंसारी यूक्रेन के यूगानो शहर में स्थित विश्वविद्यालय से एमबीबीएस कर रहे हैं। वह एमबीबीएस तृतीय वर्ष के छात्र हैं। रूस और यूक्रेन के बीच जंग छिड़ने के बाद मोहम्मद शाद अंसारी के परिजन काफी चिंतित थे। वे भारत सरकार से भारतीय नागरिकों को वापस लाने की गुहार लगा रहे हैं। मोहम्मद शाद अंसारी ने बताया कि वे लोग पोलैंड की सीमा के करीब स्थित पश्चिमी यूक्रेन में रहते थे। हालांकि अब तक उस क्षेत्र में कोई दिक्कत नहीं थी, लेकिन यहां रहने वाले लोग हमेशा किसी अनहोनी से आशंकित रहते थे। मोहम्मद शाद ने बताया कि यूनिवर्सिटी में तीन दिन पूर्व तक ऑफलाइन कक्षाएं चलने की वजह से वह वापस नहीं आ सका था। फिलहाल यूक्रेन में मार्शल लॉ लगा दिया गया है। आगे बताया कि भारतीय दूतावास से संदेश के जरिए वहां फंसे हुए छात्र संपर्क कर रहे हैं, लेकिन फोन से संपर्क नहीं हो पा रहा है। इससे वहां फंसे छात्र और अन्य भारतीय परेशान हैं। भारत सरकार के प्रयास से वह पोलैंड बार्डर से हवाई जहाज से भारत पहुंचा। उसके बाद वह दिल्ली से लखनऊ और फिर घर आ गया। मोहम्मद शाद ने बताया कि मेडिकल पढ़ाई का यह तीसरा वर्ष है। युद्ध की वजह से ऐसे हालात बने कि उसे घर लौटना पड़ा। वह अपनी आगे की पढ़ाई व भविष्य के प्रति काफी चिंतित हैं। हालात सामान्य होने पर वह पुन: यूक्रेन जाने का प्रयास करेंगे। यदि भारत सरकार ने यूक्रेन से मेडिकल पढ़ाई अधूरी छोड़कर घर लौटे छात्रों की आगे की पढ़ाई के लिए कुछ की तो वह अच्छा होगा। फिलहाल वह युद्ध के माहौल से उबर कर परिजनों के पास आने से काफी सुकून महसूस कर रहे हैं।
इसी तरह मेंहदावल कस्बे के रहने वाले आयुष कुमार भी यूक्रेन में एमबीबीएस द्वितीय वर्ष के छात्र हैं। पिता डॉक्टर अजय कुमार गुुप्ता ने बताया कि आयुष शुक्रवार की सुबह दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचा। वह दिल्ली में ही अपने चाचा के पास रुका है। वह दिल्ली से 11 मार्च को घर आएगा। वैसे बेटे की वापसी से पूरा परिवार खुश है। मां सुनीता, छोटे भाई आर्यन और अरनव भी बेहद खुश हैं। परिजनों ने भारत सरकार को धन्यवाद दिया और जो अन्य वहां फंसे हैं, उन्हें वापस लाने की मांग की।
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बखिरा(संतकबीरनगर)। यूक्रेन में फंसे क्षेत्र के लेडुआ-महुआ और मेंहदावल कस्बे के दोनों युवक घर लौट आए हैं। दोनों एमबीबीएस के छात्र हैं। लेडुआ महुआ के निवासी मोहम्मद शाद घर पहुंचे परिजनों की आंखें खुशी से भर आईं। जबकि मेंहदावल के आयुष दिल्ली में ही अपने चाचा के पास रुक गए हैं।
लेडुआ-महुआ निवासी मोहम्मद इशहाक अंसारी के छोटे बेटे मोहम्मद शाद अंसारी यूक्रेन के यूगानो शहर में स्थित विश्वविद्यालय से एमबीबीएस कर रहे हैं। वह एमबीबीएस तृतीय वर्ष के छात्र हैं। रूस और यूक्रेन के बीच जंग छिड़ने के बाद मोहम्मद शाद अंसारी के परिजन काफी चिंतित थे। वे भारत सरकार से भारतीय नागरिकों को वापस लाने की गुहार लगा रहे हैं। मोहम्मद शाद अंसारी ने बताया कि वे लोग पोलैंड की सीमा के करीब स्थित पश्चिमी यूक्रेन में रहते थे। हालांकि अब तक उस क्षेत्र में कोई दिक्कत नहीं थी, लेकिन यहां रहने वाले लोग हमेशा किसी अनहोनी से आशंकित रहते थे। मोहम्मद शाद ने बताया कि यूनिवर्सिटी में तीन दिन पूर्व तक ऑफलाइन कक्षाएं चलने की वजह से वह वापस नहीं आ सका था। फिलहाल यूक्रेन में मार्शल लॉ लगा दिया गया है। आगे बताया कि भारतीय दूतावास से संदेश के जरिए वहां फंसे हुए छात्र संपर्क कर रहे हैं, लेकिन फोन से संपर्क नहीं हो पा रहा है। इससे वहां फंसे छात्र और अन्य भारतीय परेशान हैं। भारत सरकार के प्रयास से वह पोलैंड बार्डर से हवाई जहाज से भारत पहुंचा। उसके बाद वह दिल्ली से लखनऊ और फिर घर आ गया। मोहम्मद शाद ने बताया कि मेडिकल पढ़ाई का यह तीसरा वर्ष है। युद्ध की वजह से ऐसे हालात बने कि उसे घर लौटना पड़ा। वह अपनी आगे की पढ़ाई व भविष्य के प्रति काफी चिंतित हैं। हालात सामान्य होने पर वह पुन: यूक्रेन जाने का प्रयास करेंगे। यदि भारत सरकार ने यूक्रेन से मेडिकल पढ़ाई अधूरी छोड़कर घर लौटे छात्रों की आगे की पढ़ाई के लिए कुछ की तो वह अच्छा होगा। फिलहाल वह युद्ध के माहौल से उबर कर परिजनों के पास आने से काफी सुकून महसूस कर रहे हैं।
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इसी तरह मेंहदावल कस्बे के रहने वाले आयुष कुमार भी यूक्रेन में एमबीबीएस द्वितीय वर्ष के छात्र हैं। पिता डॉक्टर अजय कुमार गुुप्ता ने बताया कि आयुष शुक्रवार की सुबह दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचा। वह दिल्ली में ही अपने चाचा के पास रुका है। वह दिल्ली से 11 मार्च को घर आएगा। वैसे बेटे की वापसी से पूरा परिवार खुश है। मां सुनीता, छोटे भाई आर्यन और अरनव भी बेहद खुश हैं। परिजनों ने भारत सरकार को धन्यवाद दिया और जो अन्य वहां फंसे हैं, उन्हें वापस लाने की मांग की।
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