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Sant Kabir Nagar News: मिठाई खा रहे हैं तो हो जाएं सतर्क, दूषित मिठाई खपाने की हो रही तैयारी
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शहर में मिठाई की दुकान की जांच करती खाद्य टीम-स्रोत खाद्य विभाग
संतकबीरनगर। होली पर मिठाई जरा देख समझ कर खरीदें। कहीं ऐसा न हो कि हलवाई आपको बासी मिठाई दे दे। हम डरा नहीं रहे हैं, बल्कि आपको सावधान कर रहे है। नियम के तहत दुकानदारों को खुद अपनी दुकानों पर तैयार मिठाई की वैधता तिथि का अंकन करना है, लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है।
यह मामला शनिवार को खाद्य सुरक्षा एवं औषधि विभाग की छापेमारी में खुला है। टीम ने 20 किलो दूषित मिठाई नष्ट कराई। इसके साथ ही खोआ, छेना का नमूना लेकर जांच के लिए भेजा है। शासन ने एक जून 2022 को निर्देश जारी किए कि दुकानदार अपने प्रतिष्ठानों पर तैयार होने वाले खाद्य पदार्थों के बनने व उपयोग करने की तिथि यानी उसकी वैधता तिथि का अंकन करेंगे, जिससे ग्राहकों को पता चले कि जो मिठाई वह खरीद रहे हैं, वह कब बनी और वह कब तक उपयोग करने लायक है।
इस नियम का अनुपालन कराए जाने की जिम्मेदारी खाद्य सुरक्षा एवं औषधि विभाग की है। इसमें दूध से बनी मिठाइयां जैसे छेना, रसगुल्ला और रबड़ी बनने के बाद सिर्फ दो दिन के खाने के लिए सुरक्षित मानी गई है। जबकि बर्फी पांच दिन के लिए सुरक्षित है। सूखी मिठाइयां और बेसन से बनी मिठाइयों की वैधता सात दिन है। आलम यह है कि होली नजदीक आते ही मिलावट का खेल शुरू हो गया है।
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शनिवार को खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने शहर के गोला बाजार स्थित भगवती स्वीट में छापा मारा। यहां 20 किलो दूषित मिठाई मिली। सहायक आयुक्त खाद्य एवं औषधि प्रशासन सतीश कुमार ने बताया कि मिठाई से दुर्गंध आ रही थी। टीम ने इसे तत्काल नष्ट करा दिया। इसके साथ ही साफ-सफाई नहीं मिली। टीम ने दुकान से खोआ और छेना का सैंपल लिया। उसे जांच के लिए प्रयोगशाला भेज दिया। उन्होंने बताया कि साफ-सफाई ठीक न होने पर सुधार की नोटिस दी गई है। इस दौरान खाद्य सुरक्षा अधिकारी मिश्रीलाल समेत अन्य मौजूद रहे।
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खराब मिठाई को फिर से बना देते हैं चाकलेट बर्फी
जो मिठाई एक सप्ताह से अधिक की बनी होती है और वह खराब हो जाती है, दुकानदार इसे फेंकते नहीं हैं, बल्कि कारीगर उसे फिर भूनकर चाकलेट बर्फी बनाते हैं। इनमें वह चीनी का प्रयोग करते हैं। इसके बाद यह फिर बिक्री के लिए तैयार हो जाती है। अगर इसका लगातार सेवन किया जाता है तो वह पेट के लिए हानिकारक होती है।
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पर्व के बाद शुगर, ब्लड प्रेशर से अधिक पेट संबंधी बीमारियों से पीड़ित अस्पताल पहुंचते हैं। यदि बाजार से मिठाई खरीदनी है तो वहां की सफाई, मिठाई कब की बनी है इन सब बातों का ध्यान रखें। गुणवत्ता विहीन मिठाई खाने से अस्थमा, शुगर व ब्लड प्रेशर के मरीजों की दिक्कत बढ़ जाती है। इसलिए खानपान का विशेष ख्याल रखें। इसे खाने से पेट संबंधी बीमारी हो सकती है। केमिकल युक्त दूध व अन्य सामग्री लीवर को प्रभावित करती है।
-डॉ. रमाशंकर, वरिष्ठ फिजिशियन जिला अस्पताल
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नियम है कि दुकानदार अपने यहां तैयार मिठाई आदि खाद्य पदार्थ की वैधता का निर्धारण स्वयं करें। दुकानदारों को जागरूक करके ऐसा करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। लोग भी मिठाई या खाद्य पदार्थ खरीदते समय उसकी गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखें। शनिवार को 20 किलो दूषित मिठाई नष्ट कराया गया है। दो सैंपल लिए गए है।
- सतीश कुमार, सहायक आयुक्त खाद्य एवं औषधि प्रशासन
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यह मामला शनिवार को खाद्य सुरक्षा एवं औषधि विभाग की छापेमारी में खुला है। टीम ने 20 किलो दूषित मिठाई नष्ट कराई। इसके साथ ही खोआ, छेना का नमूना लेकर जांच के लिए भेजा है। शासन ने एक जून 2022 को निर्देश जारी किए कि दुकानदार अपने प्रतिष्ठानों पर तैयार होने वाले खाद्य पदार्थों के बनने व उपयोग करने की तिथि यानी उसकी वैधता तिथि का अंकन करेंगे, जिससे ग्राहकों को पता चले कि जो मिठाई वह खरीद रहे हैं, वह कब बनी और वह कब तक उपयोग करने लायक है।
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इस नियम का अनुपालन कराए जाने की जिम्मेदारी खाद्य सुरक्षा एवं औषधि विभाग की है। इसमें दूध से बनी मिठाइयां जैसे छेना, रसगुल्ला और रबड़ी बनने के बाद सिर्फ दो दिन के खाने के लिए सुरक्षित मानी गई है। जबकि बर्फी पांच दिन के लिए सुरक्षित है। सूखी मिठाइयां और बेसन से बनी मिठाइयों की वैधता सात दिन है। आलम यह है कि होली नजदीक आते ही मिलावट का खेल शुरू हो गया है।
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शनिवार को खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने शहर के गोला बाजार स्थित भगवती स्वीट में छापा मारा। यहां 20 किलो दूषित मिठाई मिली। सहायक आयुक्त खाद्य एवं औषधि प्रशासन सतीश कुमार ने बताया कि मिठाई से दुर्गंध आ रही थी। टीम ने इसे तत्काल नष्ट करा दिया। इसके साथ ही साफ-सफाई नहीं मिली। टीम ने दुकान से खोआ और छेना का सैंपल लिया। उसे जांच के लिए प्रयोगशाला भेज दिया। उन्होंने बताया कि साफ-सफाई ठीक न होने पर सुधार की नोटिस दी गई है। इस दौरान खाद्य सुरक्षा अधिकारी मिश्रीलाल समेत अन्य मौजूद रहे।
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खराब मिठाई को फिर से बना देते हैं चाकलेट बर्फी
जो मिठाई एक सप्ताह से अधिक की बनी होती है और वह खराब हो जाती है, दुकानदार इसे फेंकते नहीं हैं, बल्कि कारीगर उसे फिर भूनकर चाकलेट बर्फी बनाते हैं। इनमें वह चीनी का प्रयोग करते हैं। इसके बाद यह फिर बिक्री के लिए तैयार हो जाती है। अगर इसका लगातार सेवन किया जाता है तो वह पेट के लिए हानिकारक होती है।
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पर्व के बाद शुगर, ब्लड प्रेशर से अधिक पेट संबंधी बीमारियों से पीड़ित अस्पताल पहुंचते हैं। यदि बाजार से मिठाई खरीदनी है तो वहां की सफाई, मिठाई कब की बनी है इन सब बातों का ध्यान रखें। गुणवत्ता विहीन मिठाई खाने से अस्थमा, शुगर व ब्लड प्रेशर के मरीजों की दिक्कत बढ़ जाती है। इसलिए खानपान का विशेष ख्याल रखें। इसे खाने से पेट संबंधी बीमारी हो सकती है। केमिकल युक्त दूध व अन्य सामग्री लीवर को प्रभावित करती है।
-डॉ. रमाशंकर, वरिष्ठ फिजिशियन जिला अस्पताल
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नियम है कि दुकानदार अपने यहां तैयार मिठाई आदि खाद्य पदार्थ की वैधता का निर्धारण स्वयं करें। दुकानदारों को जागरूक करके ऐसा करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। लोग भी मिठाई या खाद्य पदार्थ खरीदते समय उसकी गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखें। शनिवार को 20 किलो दूषित मिठाई नष्ट कराया गया है। दो सैंपल लिए गए है।
- सतीश कुमार, सहायक आयुक्त खाद्य एवं औषधि प्रशासन