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Sant Kabir Nagar News: स्कूलों में शारीरिक दंड पर रोक... शिकायत प्रकोष्ठ का होगा गठन
Sat, 17 Aug 2024 01:10 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Sat, 17 Aug 2024 01:10 AM IST
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- महानिदेशक स्कूल शिक्षा ने परिषदीय विद्यालयों को दिए निर्देश
- शिकायत मिलने पर संबंधित शिक्षक के खिलाफ होगी कार्रवाई
- जिला स्तर पर शिकायत प्रकोष्ठ का होगा गठन
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को अब किसी भी तरह का शारीरिक दंड नहीं दिया जा सकेगा, अगर किसी भी बच्चे को शारीरिक दंड दिए जाने की शिकायत मिलती है तो जांच के बाद संबंधित शिक्षक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। साथ ही जिला स्तर पर शिकायत प्रकोष्ठ भी बनाया जाएगा। महानिदेशक स्कूल शिक्षा कंचन वर्मा ने परिषदीय विद्यालयों को निर्देश दिए हैं।
स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को बाल शिक्षा अधिकार के तहत पीटने पर पूरी तरह से प्रतिबंध है। इसके बाद भी कभी-कभार शिक्षकों द्वारा छात्र-छात्राओं की पिटाई की शिकायतें आ जाती हैं। वहीं शिक्षक बच्चों को पीटने की जगह उन्हें स्कूल का चक्कर लगाने व अन्य तरह से दंड दे दिया करते थे लेकिन अब इसे भी बंद कर दिया गया है। शिक्षक किसी तरह का कोई भी शारीरिक दंड बच्चों को नहीं दे सकेंगे। यहां तक कि बेंच पर हाथ ऊपर करके खड़ा नहीं कर सकेंगे। महानिदेशक स्कूल शिक्षा ने परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को शारीरिक दंड नहीं दिए जाने के निर्देश दिए हैं।
महानिदेशक कंचन वर्मा ने कहा कि है कि बच्चों को मारना-पीटना, घुटनों के बाल दौड़ना या फिर अन्य तरह से दंड अब नहीं दिया जा सकेगा। अगर इसकी शिकायत मिली तो शिक्षक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। कंपोजिट विद्यालय बूधाबाध के प्रधानाध्यापक विनोद कुमार यादव ने बताया कि निशुल्क बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम के तहत बच्चों को किसी भी प्रकार का दंड दिए जाने पर पहले से ही रोक है। वैसे बच्चों को शिक्षक किसी प्रकार का शारीरिक दंड नहीं देते हैं। अपवाद स्वरूप कहीं पर कोई घटना हो जाती है तो उसकी वजह एक तरफा नहीं होती है। अभिभावकों को भी बच्चों की गतिविधियों पर ध्यान देना चाहिए।
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अगर कहीं पर कोई शिक्षक बच्चों को बेवजह डांटता है या मारता है, तो उस बच्चों को अपनी बात कहने का पूरा अधिकार होगा। इसके लिए शिकायत प्रकोष्ठ बनेगा, जिसमें बच्चा शिकायत को बिना किसी डर के बता सकेगा। इससे बच्चों में किसी तरह का डर नहीं रहेगा और वह मनोयोग से स्कूल में रहकर शिक्षा ग्रहण कर सकेगा।
- अमित कुमार सिंह, बीएसए
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- शिकायत मिलने पर संबंधित शिक्षक के खिलाफ होगी कार्रवाई
- जिला स्तर पर शिकायत प्रकोष्ठ का होगा गठन
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को अब किसी भी तरह का शारीरिक दंड नहीं दिया जा सकेगा, अगर किसी भी बच्चे को शारीरिक दंड दिए जाने की शिकायत मिलती है तो जांच के बाद संबंधित शिक्षक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। साथ ही जिला स्तर पर शिकायत प्रकोष्ठ भी बनाया जाएगा। महानिदेशक स्कूल शिक्षा कंचन वर्मा ने परिषदीय विद्यालयों को निर्देश दिए हैं।
स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को बाल शिक्षा अधिकार के तहत पीटने पर पूरी तरह से प्रतिबंध है। इसके बाद भी कभी-कभार शिक्षकों द्वारा छात्र-छात्राओं की पिटाई की शिकायतें आ जाती हैं। वहीं शिक्षक बच्चों को पीटने की जगह उन्हें स्कूल का चक्कर लगाने व अन्य तरह से दंड दे दिया करते थे लेकिन अब इसे भी बंद कर दिया गया है। शिक्षक किसी तरह का कोई भी शारीरिक दंड बच्चों को नहीं दे सकेंगे। यहां तक कि बेंच पर हाथ ऊपर करके खड़ा नहीं कर सकेंगे। महानिदेशक स्कूल शिक्षा ने परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को शारीरिक दंड नहीं दिए जाने के निर्देश दिए हैं।
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महानिदेशक कंचन वर्मा ने कहा कि है कि बच्चों को मारना-पीटना, घुटनों के बाल दौड़ना या फिर अन्य तरह से दंड अब नहीं दिया जा सकेगा। अगर इसकी शिकायत मिली तो शिक्षक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। कंपोजिट विद्यालय बूधाबाध के प्रधानाध्यापक विनोद कुमार यादव ने बताया कि निशुल्क बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम के तहत बच्चों को किसी भी प्रकार का दंड दिए जाने पर पहले से ही रोक है। वैसे बच्चों को शिक्षक किसी प्रकार का शारीरिक दंड नहीं देते हैं। अपवाद स्वरूप कहीं पर कोई घटना हो जाती है तो उसकी वजह एक तरफा नहीं होती है। अभिभावकों को भी बच्चों की गतिविधियों पर ध्यान देना चाहिए।
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अगर कहीं पर कोई शिक्षक बच्चों को बेवजह डांटता है या मारता है, तो उस बच्चों को अपनी बात कहने का पूरा अधिकार होगा। इसके लिए शिकायत प्रकोष्ठ बनेगा, जिसमें बच्चा शिकायत को बिना किसी डर के बता सकेगा। इससे बच्चों में किसी तरह का डर नहीं रहेगा और वह मनोयोग से स्कूल में रहकर शिक्षा ग्रहण कर सकेगा।
- अमित कुमार सिंह, बीएसए