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बगैर डॉक्टर के संचालित हो रहे छह राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल
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बगैर डॉक्टर के संचालित हो रहे छह राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल
- पानी, बिजली और शौचालय की व्यवस्था बदहाल
अस्पताल से मरीजों का हो रहा मोह भंग
अमर उजाला ब्यूरो
संतकबीरनगर। मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने का दावा भले ही जिम्मेदार कर रहे हो, लेकिन हकीकत यह है कि चिकित्सक और कर्मचारी की कमी बनी हुई है। जिले में छह ऐसे राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल हैं, जो बिना डॉक्टर के संचालित हो रहे हैं। यहां की चिकित्सा व्यवस्था फार्मासिस्ट के भरोसे चल रही है।
जिले में कुल 18 राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल संचालित हो रहे हैं। इसके अलावा एक आयुष एकीकृत चिकित्सालय भी संचालित हो रहा है। राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल महुली, मोलनापुर, हरिहरपुर, मगहर, राजेडीहा और रमवापुर सरकारी में डॉक्टर उपलब्ध नहीं है। मोलनापुर, राजेडीहा और खलीलाबाद में राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल का खुद का भवन भी नहीं है। अस्पतालों में चतुर्थ श्रेणी कर्मी की भी कमी बनी हुई है। इसके अलावा पेजयल, शौचालय और बिजली की भी परेशानी है। कई केंद्रों का बिजली बिल लंबे समय से बकाया है और विद्युत निगम ने नोटिस जारी कर दिया है। ऐसे में आयुर्वेदिक अस्पतालों पर मरीजों को बेहतर उपचार की सुविधा नहीं मिल पा रही है।
हरिहरपुर निवासी विजय शुक्ला, सोनू गौड़, हियुवा नेता सुभाष त्रिपाठी ने बताया कि यहां लंबे समय से डॉक्टर का पद रिक्त है। यहां की चिकित्सा व्यवस्था फार्मासिस्ट के भरोसे है। पहले जब यहां डॉक्टर की तैनाती थी तो आसपास के गांवों के काफी संख्या में लोग इलाज कराने जाते थे। इधर व्यवस्था लचर होने से मरीज अब जाने से कतराने लगे हैं। शासन-प्रशासन को चाहिए कि राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल में डॉक्टर और संसाधन बढ़ाए, ताकि मरीजों को सुविधाएं मिल सके। नोडल अधिकारी डॉक्टर इंद्रेश कुमार ने बताया कि जो कमियां है, उसे दूर करने के लिए उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भेजी गई है। उम्मीद है कि जल्द ही समस्या दूर हो जाएगी।
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संतकबीरनगर जिले में 18 राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल संचालित हो रहा है। यह सच है कि छह जगह डॉक्टर की तैनाती नहीं है। लोहरौली और महुली में दो दिन डॉक्टर को संबंद्ध करके काम चलाया जा रहा है। तीन अस्पताल किराए के भवन में संचालित हो रहा है। चतुर्थ श्रेणी कर्मी की भी कमी है। वैसे प्रत्येक अस्पताल को संचालित किया जा रहा है, जहां डॉक्टर नहीं है, वहां फार्मासिस्ट पहुंचने वाले मरीजों को दवाएं दे रहे हैं। वैसे रिक्त पदों पर जल्द ही तैनाती होने की उम्मीद है। जहां जो कमिया है, उसे दुरुस्त कराया जाएगा।
-डॉक्टर वीके श्रीवास्तव, क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी
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- पानी, बिजली और शौचालय की व्यवस्था बदहाल
अस्पताल से मरीजों का हो रहा मोह भंग
अमर उजाला ब्यूरो
संतकबीरनगर। मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने का दावा भले ही जिम्मेदार कर रहे हो, लेकिन हकीकत यह है कि चिकित्सक और कर्मचारी की कमी बनी हुई है। जिले में छह ऐसे राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल हैं, जो बिना डॉक्टर के संचालित हो रहे हैं। यहां की चिकित्सा व्यवस्था फार्मासिस्ट के भरोसे चल रही है।
जिले में कुल 18 राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल संचालित हो रहे हैं। इसके अलावा एक आयुष एकीकृत चिकित्सालय भी संचालित हो रहा है। राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल महुली, मोलनापुर, हरिहरपुर, मगहर, राजेडीहा और रमवापुर सरकारी में डॉक्टर उपलब्ध नहीं है। मोलनापुर, राजेडीहा और खलीलाबाद में राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल का खुद का भवन भी नहीं है। अस्पतालों में चतुर्थ श्रेणी कर्मी की भी कमी बनी हुई है। इसके अलावा पेजयल, शौचालय और बिजली की भी परेशानी है। कई केंद्रों का बिजली बिल लंबे समय से बकाया है और विद्युत निगम ने नोटिस जारी कर दिया है। ऐसे में आयुर्वेदिक अस्पतालों पर मरीजों को बेहतर उपचार की सुविधा नहीं मिल पा रही है।
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हरिहरपुर निवासी विजय शुक्ला, सोनू गौड़, हियुवा नेता सुभाष त्रिपाठी ने बताया कि यहां लंबे समय से डॉक्टर का पद रिक्त है। यहां की चिकित्सा व्यवस्था फार्मासिस्ट के भरोसे है। पहले जब यहां डॉक्टर की तैनाती थी तो आसपास के गांवों के काफी संख्या में लोग इलाज कराने जाते थे। इधर व्यवस्था लचर होने से मरीज अब जाने से कतराने लगे हैं। शासन-प्रशासन को चाहिए कि राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल में डॉक्टर और संसाधन बढ़ाए, ताकि मरीजों को सुविधाएं मिल सके। नोडल अधिकारी डॉक्टर इंद्रेश कुमार ने बताया कि जो कमियां है, उसे दूर करने के लिए उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भेजी गई है। उम्मीद है कि जल्द ही समस्या दूर हो जाएगी।
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संतकबीरनगर जिले में 18 राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल संचालित हो रहा है। यह सच है कि छह जगह डॉक्टर की तैनाती नहीं है। लोहरौली और महुली में दो दिन डॉक्टर को संबंद्ध करके काम चलाया जा रहा है। तीन अस्पताल किराए के भवन में संचालित हो रहा है। चतुर्थ श्रेणी कर्मी की भी कमी है। वैसे प्रत्येक अस्पताल को संचालित किया जा रहा है, जहां डॉक्टर नहीं है, वहां फार्मासिस्ट पहुंचने वाले मरीजों को दवाएं दे रहे हैं। वैसे रिक्त पदों पर जल्द ही तैनाती होने की उम्मीद है। जहां जो कमिया है, उसे दुरुस्त कराया जाएगा।
-डॉक्टर वीके श्रीवास्तव, क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी