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Sant Kabir Nagar News: फिर लौटे कुल्हड़ के दिन, बेरोजगार हाथों को मिला काम

Thu, 16 Mar 2023 12:04 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर Updated Thu, 16 Mar 2023 12:04 AM IST
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Back to the days of Kulhad
प्लास्टिक पर लगी रोक तो मिट्टी के बर्तनों की बढ़ी मांग
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कुम्हारों के लिए मिट्टी बनी बांधा, पड़ोसी जिले को मिल रहा लाभ
संवाद न्यूज एजेंसी
धनघटा। कुम्हारी कला का चलन फिर शुरू हो गया है। इससे बेरोजगार हो चुके हाथों को काम मिलने लगे हैं। मिष्ठान की दुकानों पर कुल्हड़ का प्रचलन बढ़ने से मांग भी रफ्तार पकड़ने लगी है। पड़ोसी जिले के लोग यहां पर कुल्हड़ की आपूर्ति करके जहां अपनी आमदनी बढ़ा रहे हैं, वहीं यहां के कुम्हार मिट्टी न मिलने के कारण इस काम के लाभ से वंचित हो रहे हैं।
करीब दो दशक पहले मिट्टी का बर्तन बनाकर कुम्हार बिरादरी के लोग आजीविका चलाया करते थे। किसी के घर शादी हो या दीपावली का पर्व, हर जगह मिट्टी के बर्तन का प्रयोग हुआ करता था। धीरे-धीरे आधुनिकता की ओर जब लोगों के कदम बढ़ने लगे तो मिट्टी के बर्तन की मांग कम होने लगी। शादी हो या कोई त्योहार चाहे मिष्ठान की दुकान हर जगह प्लास्टिक के सामानों का तेजी के साथ प्रयोग होने से कुम्हार परंपरागत रोजगार छोड़ने को विवश हो गए।
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सरकार ने जब प्लास्टिक के सामानों पर शिकंजा कसना शुरू किया तो लोग फिर पुराने ढर्रे पर लौटने लगे हैं। धनघटा क्षेत्र में मिष्ठान और चाय की दुकान पर लोग कुल्हड़ में चाय-पानी की मांग करने लगे तो दुकानदार भी कुल्हड़ रखना शुरू कर दिए। मिष्ठान और चाय के दुकानदार संदीप कुमार, रामकेश, मनोज, अनिल कुमार का कहना है कि ग्राहकों की मांग को पूरा करने के लिए कुल्हड़ आजमगढ़, आंबेडकरनगर और गोरखपुर जिले के व्यापारियों से खरीदना पड़ रहा है।
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स्थानीय लोग यदि कुल्हड़ बनाने का काम करते तो आसानी से कुल्हड़ भी उपलब्ध हो जाता और उनकी आमदनी भी होने लगती। राम नसीब प्रजापति, शिव मूरत प्रजापति, मनोहर प्रजापति, रविंद्र कुमार प्रजापति आदि का कहना है कि पहले गड्ढे और तालाब से मिट्टी निकाल कर बर्तन बनाने का काम किया जाता था। जब से मत्स्य पालन के लिए गड्ढे और तालाबों का नीलामी के माध्यम से पट्टा होने लगा, तब से पट्टा धारक तालाब से मिट्टी निकलने नहीं हो रहे हैं। इस कारण चाहकर भी मिट्टी का बर्तन नहीं बन पा रहे हैं।
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