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अटल बिहारी बाजपेयी से मिला था राजनीति का गुरुमंत्र

Fri, 16 Sep 2016 11:40 PM IST
ब्यूरो अमर उजाला/ संतकबीरनगर
ब्यूरो अमर उजाला/ संतकबीरनगर Updated Fri, 16 Sep 2016 11:40 PM IST
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Atal Bihari Bajpayi gave him mantras of politics
फाइल ‌प‌िक्‍चर - फोटो : अमर उजाला
रईमा गांव निवासी वयोवृद्ध नेता रामआसरे पासवान की लंबी बीमारी के चलते गुरुवार देर रात अस्पताल में मृत्यु के साथ जिले की राजनीति के एक युग का अंत हो गया। लोहिया से प्रेरित होकर सियासत में कदम रखने वाले रामआसरे पासवान को राजनीति की दीक्षा पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी से मिली। इसके बाद वह खलीलाबाद विधानसभा क्षेत्र से चार बार विधायक बने। 1997 में जब भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी तो उनको लघु सिंचाई राज्यमंत्री की जिम्मेदारी दी।
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कोतवाली क्षेत्र के रईमा गांव निवासी स्वर्गीय सुंदर प्रसाद के दो बेटों और दो बेटियों में रामआसरे पासवान दूसरे नंबर के थे। 1952 में कक्षा दो में पढ़ने वाले 12 वर्षीय रामआसरे हैंसर बाजार विधानसभा क्षेत्र में चचेरे भाई भीखम मुंशी की चुनावी जनसभा में जांघिया और कुर्ता पहने हाथ में झंडा लिए पहुंचे थे। इस सभा में डॉ. राममनोहर लोहिया आए थे। लोहिया ने उन्हें मंच पर बुलाया और उनका नाम पूछा। लोहिया के कहने पर रामआसरे पासी तबसे पासवान हो गए। गरीबी से जूझते परिवार को संभालने के लिए उन्होंने साइकिल से घूम कर छोलाछाप डॉक्टरी भी की। 
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गंवई राजनीति से सियासत शुरू करने वाले रामआसरे को प्रधान पद के चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद वह 1974 में जनसंघ से पहली बार खलीलाबाद विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़े। साइकिल से प्रचार किया और मात्र दो हजार रुपये में चुनाव निपटा दिया। इसी दौरान खलीलाबाद में अटल बिहारी बाजपेयी से उनकी पहली बार मुलाकात हुई थी। तब बाजपेयी ने उन्हें राजनीति का गुरुमंत्र दिया था। महज 800 मतों के अंतर से वह चुनाव हार गए थे। उसके बाद वह 1977 में जनता पार्टी से चुनाव लड़े और विधायक चुने गए।
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इसके बाद 1980 में लोक दल के टिकट पर फिर जीत हासिल की। 1985 में दलित मजदूर किसान पार्टी से वह चुनाव में उतरे, मगर हार मिली। 1989  में जनता दल से फिर चुनाव मैदान में उतरे और जीत मिली। जनता दल से 1997 में विधानसभा चुनाव में जीत पाकर फिर विधायक बने। तब भारतीय जनता पार्टी सरकार में उस दौरान लघु सिंचाई राज्य मंत्री बनाए गए थे। 
 
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