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Sant Kabir Nagar News: निजीकरण का फैसला वापस होने तक आंदोलन का किया एलान
Sat, 29 Nov 2025 11:41 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Sat, 29 Nov 2025 11:41 PM IST
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अधीक्षण अभियंता कार्यालय पर प्रदर्शन करते बिजली कर्मी-स्रोत बिजली निगम
संतकबीरनगर। बिजली के निजीकरण और इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट बिल 2025 के विरोध में बिजली कर्मियों ने शनिवार को अधीक्षण अभियंता कार्यालय पर धरना दिया। इस दौरान बिजली कर्मियों ने कहा कि जब तक निजीकरण का फैसला वापस नहीं होगा तब तक आंदोलन चलता रहेगा।
संघर्ष समिति के पदाधिकारी धीरेंद्र यादव ने कहा कि बिजली कर्मियों के आंदोलन को तेज करने के लिए किसान संगठनों और अखिल भारतीय ट्रेड यूनियनों के साथ सहमति बनी है। 14 दिसंबर को इसको लेकर वृहद आंदोलन की रणनीति तय की जाएगी। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के पदाधिकारी नारायण चंद्र चौरसिया ने कहा कि उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मचारी और इंजीनियर एक साल से अधिक से पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में लगातार संघर्ष कर रहे हैं। इसी बीच भारत सरकार ने पूरे देश के ऊर्जा क्षेत्र का निजीकरण करने के लिए इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट बिल 2025 का ड्राफ्ट जारी कर दिया है। इसके अतिरिक्त ग्रुप आफ मिनिस्टर्स की मीटिंग में लिए गए निर्णय के अनुसार राज्यों पर यह दबाव डाला जा रहा है कि केंद्र सरकार तभी वित्तीय सहायता करेगी जब राज्य निजीकरण के तीन विकल्पों में से एक विकल्प को स्वीकार करें। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों की निजीकरण की इन कोशिशें को देखते हुए बिजली के निजीकरण के विरोध में सारे देश के बिजली कर्मचारियों के साथ किसान और मजदूर संगठन भी साथ आ गए हैं। संघर्ष समिति के पदाधिकारी सूरज प्रजापति ने कहा कि यदि इस बीच पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का टेंडर प्रकाशित किया गया तो पूर्व निर्णय के अनुसार बिजली कर्मचारी, जूनियर इंजीनियर और इंजीनियर सामूहिक जेल भरो अभियान प्रारंभ कर देंगे जिसकी सारी जिम्मेदारी सरकार और प्रबंधन की होगी।
धरना में इंजीनियर मुकेश गुप्ता, सुनील प्रजापति, रंजन राज, प्रदुम्न कुमार, श्रवण प्रजापति, संजय यादव, अशोक कुमार, दिलीप सिंह, अमरनाथ, ओम हरि सिंह आदि मौजूद रहे।
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संघर्ष समिति के पदाधिकारी धीरेंद्र यादव ने कहा कि बिजली कर्मियों के आंदोलन को तेज करने के लिए किसान संगठनों और अखिल भारतीय ट्रेड यूनियनों के साथ सहमति बनी है। 14 दिसंबर को इसको लेकर वृहद आंदोलन की रणनीति तय की जाएगी। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के पदाधिकारी नारायण चंद्र चौरसिया ने कहा कि उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मचारी और इंजीनियर एक साल से अधिक से पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में लगातार संघर्ष कर रहे हैं। इसी बीच भारत सरकार ने पूरे देश के ऊर्जा क्षेत्र का निजीकरण करने के लिए इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट बिल 2025 का ड्राफ्ट जारी कर दिया है। इसके अतिरिक्त ग्रुप आफ मिनिस्टर्स की मीटिंग में लिए गए निर्णय के अनुसार राज्यों पर यह दबाव डाला जा रहा है कि केंद्र सरकार तभी वित्तीय सहायता करेगी जब राज्य निजीकरण के तीन विकल्पों में से एक विकल्प को स्वीकार करें। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों की निजीकरण की इन कोशिशें को देखते हुए बिजली के निजीकरण के विरोध में सारे देश के बिजली कर्मचारियों के साथ किसान और मजदूर संगठन भी साथ आ गए हैं। संघर्ष समिति के पदाधिकारी सूरज प्रजापति ने कहा कि यदि इस बीच पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का टेंडर प्रकाशित किया गया तो पूर्व निर्णय के अनुसार बिजली कर्मचारी, जूनियर इंजीनियर और इंजीनियर सामूहिक जेल भरो अभियान प्रारंभ कर देंगे जिसकी सारी जिम्मेदारी सरकार और प्रबंधन की होगी।
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धरना में इंजीनियर मुकेश गुप्ता, सुनील प्रजापति, रंजन राज, प्रदुम्न कुमार, श्रवण प्रजापति, संजय यादव, अशोक कुमार, दिलीप सिंह, अमरनाथ, ओम हरि सिंह आदि मौजूद रहे।
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