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Sant Kabir Nagar News: रोजा-नमाज के साथ जकात व फितरा की अदायगी भी बेहद जरूरी

Sun, 16 Mar 2025 11:20 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 16 Mar 2025 11:20 PM IST
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Along with Roza and Namaz, paying Zakat and Fitra is also very important
सेमरियावां। माह ए रमजान आधा समाप्त हो गया है। रोजेदारों ने पंद्रह रोजा पूरा कर लिया है। माह ए रमजान में रोजा-नमाज व कुरान पढ़ने के साथ जकात और फितरा की अदायगी भी बेहद जरूरी है। जकात इस्लाम के पांच स्तंभों में से एक है। रमजान के महीने में ईद की नमाज से पहले फितरा और जकात देना हर हैसियतमंद साहब ए निसाब मुसलमान का फर्ज होता है। जिस मुसलमान के पास इतना पैसा या संपत्ति है कि उसके खर्च पूरे हो रहे हैं और वह किसी की मदद करने की स्थिति में है तो वह जकात देने के लायक बन जाता है।
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ऑल इंडिया तहफ्फुज ए मदारिस के सदर और जामिया अरबिया उमर फारूक दरियाबाद के मुहतमिम मौलाना नूरूलहुदा कासमी ने बताया कि हर हैसियतमंद साहब ए निसाब मुसलमान का जकात देना जरूरी होता है। आमदनी से पूरे साल में जो बचत होती है उसका 2.5 फीसदी हिस्सा किसी गरीब व जरूरतमंद को देना जकात कहलाता है। महिलाओं या पुरुषों के पास अगर ज़ेवर के रूप में भी कोई संपत्ति है तो उसकी कीमत के हिसाब से भी जकात दी जाती है।
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हर कमाने वाले को देना चाहिए जकात
अगर परिवार में पांच सदस्य हैं और वे सभी नौकरी या किसी भी जरिए से पैसा कमाते हैं तो परिवार के सभी सदस्यों पर जकात देना फर्ज माना जाता है। जैसे कोई बेटा या बेटी भी नौकरी या कारोबार के जरिए पैसा कमाते हैं तो सिर्फ उनके मां-बाप अपनी कमाई पर जकात देकर नहीं बच सकते हैं बल्कि कमाने वाले बेटे या बेटी का भी जकात देने का फर्ज होता है।
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जकात पर पहला हक अपनों का
जकात की रकम गरीब, विधवा, बेसहारा महिला, सगे रिश्तेदार जो जकात के हकदार को दे सकते हैं। जकात की रकम देने के लिए सबसे पहले अपने घर, खानदान में जो जकात के मुस्ताहिक हैं तलाश करें। सबसे पहला हक इनका है। फिर रिश्तेदारों, पड़ोस में तलाश करें। इसके बाद मिसकीन, यतीम, गरीब, विधवा, दिब्यांग, बेसहारा को जकात दिया जा सकता है।

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ईद की नमाज से पहले अदा करें फितरा
मौलाना नूरूलहुदा कासमी ने कहा कि फितरा वो रकम होती है जो खाते-पीते, साधन संपन्न घरानों के लोग आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को देते हैं। ईद की नमाज से पहले इसे अदा करना जरूरी होता है। इस तरह अमीर के साथ ही गरीब की भी ईद मन जाती है। फितरे की रकम भी गरीबों, बेवाओं व यतीमों और सभी जरूरतमंदों को दी जाती है। फितरा हर बालिग, नाबालिग औरत, मर्द, बुजुर्ग मुसलमान पर वाजिब है। सदका ए फितर की रकम से गरीबों में बांटना चाहिए।
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