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Sant Kabir Nagar News: कैटल कैचर को लेकर शासन सख्त, बीडीओ से जवाब-तलब

Tue, 01 Sep 2026 12:17 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 01 Sep 2026 12:17 AM IST
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Administration takes a tough stance on cattle catchers; seeks explanation from BDO.
सेमरियावां। किसानों की फसलों को छुट्टा पशुओं से बचाने और निराश्रित पशुओं को गोशालाओं तक पहुंचाने के लिए उपलब्ध कराए गए कैटल कैचर वाहन के करीब दो साल से ब्लॉक परिसर में खड़े होकर धूल फांकने की खबर का शासन ने संज्ञान लिया है। शासन स्तर से मामले को गंभीरता से लेते हुए खंड विकास अधिकारी से जवाब-तलब किया गया है। शासन की ओर से जवाब-तलब किए जाने के बाद वाहन के वास्तविक संचालन को लेकर जिम्मेदारी और बढ़ गई है।
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सेमरियावां ब्लॉक में 113 ग्राम पंचायतें और 183 राजस्व गांव हैं। क्षेत्र में छुट्टा पशु किसानों के लिए लंबे समय से परेशानी का कारण बने हुए हैं। खेतों में झुंड के रूप में पहुंचकर छुट्टा पशु फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं। वहीं कस्बों, प्रमुख चौराहों और सड़कों पर इनके जमावड़े से राहगीरों और वाहन चालकों के लिए हादसे का खतरा भी बना रहता है। इन समस्याओं से निजात दिलाने के लिए कैटल कैचर वाहन उपलब्ध कराया गया था, लेकिन वाहन करीब छह माह तक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सेमरियावां परिसर में खड़ा रहने के बाद ब्लॉक परिसर में पहुंचा दिया गया। यहां भी लंबे समय से इसका संचालन नहीं हुआ। स्थिति यह रही कि छुट्टा पशुओं को पकड़ने के लिए लाखों रुपये की लागत से उपलब्ध कराया गया वाहन खुद ही धूल और जंग की मार झेलता रहा। बीडीओ कृष्ण कुमार का कहना है कि कैटल कैचर वाहन को लेकर शासन से जवाब मांगा उसे भेजा जाएगा।
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खबर में उठे सवालों के बाद जागे जिम्मेदार
अमर उजाला ने 25 अगस्त के अंक में सेमरियावां में कैटल कैचर बना शोपीस, दो साल से नहीं घूमा चक्का शीर्षक से खबर प्रकाशित कर वाहन के बेकार खड़े रहने और किसानों की समस्या को प्रमुखता से उठाया था। खबर में यह भी बताया गया था कि गोशालाओं के निर्माण और छुट्टा पशुओं पकड़ने के लिए अभियान चलने के बावजूद कैटल कैचर वाहन का नियमित उपयोग नहीं किया जा रहा है। खबर सामने आने के बाद शासन ने मामले को गंभीरता से लिया और बीडीओ से जवाब मांगा है।
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अब नियमित संचालन की जगी उम्मीद
शासन की ओर से जवाब-तलब किए जाने के बाद अब क्षेत्र के किसानों को उम्मीद है कि कैटल कैचर वाहन को नियमित रूप से संचालित कराया जाएगा। इससे खेतों और सड़कों पर घूम रहे छुट्टा पशुओं को पकड़कर सुरक्षित गोशालाओं में पहुंचाया जा सकेगा और किसानों की फसलों को नुकसान के साथ सड़क हादसों का खतरा भी कम होगा।
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