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कब्र में नहीं मिली लाश
Sant kabir nagar
Updated Sun, 15 Dec 2013 05:42 AM IST
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मेंहदावल/संतकबीरनगर। दो साल पहले हुई एक महिला की हत्या के मामले में आरोपी के कबूलनामे पर शनिवार को पुलिस ने राप्ती नदी के सिसई घाट पर कब्र को खुदवाया। मगर उसे वहां से लाश नहीं मिली। हालांकि आरोपी की निशानदेही पर पुलिस को हत्या में इस्तेमाल किया गया मफलर मिला है। पुलिस का दावा है कि बरामद मफलर से ही आरोपी ने गला कस कर युवती की हत्या की थी। जिस पर खून के निशान पाए गए हैं।
एसओ मेंहदावल राकेश यादव ने बताया कि घूरापाली निवासी आशा पुत्री चंद्रभान की मौत के मामले में कोर्ट के आदेश पर गत अगस्त में दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया था। गोरखपुर जनपद के सहजनवां थाना क्षेत्र के भगसा गांव निवासी आरोपी राम अशीष की तलाश हो रही थी। सीओ मेंहदावल एमए सिद्दीकी ने साक्ष्यों के आधार पर दहेज हत्या की धारा को हटाते हुए हत्या कर साक्ष्य छिपाने के आरोप में प्रथम दृष्टया राम अशीष को दोषी पाया। हत्या में मुकदमा तरमीम होने के बाद विवेचना एसओ राकेश यादव को मिली। पुलिस गिरफ्तारी का दबाव बना रही थी। गत छह दिसंबर को आरोपी राम अशीष ने कोर्ट में सरेंडर कर दिया। एसओ राकेश यादव ने बताया कि शुक्रवार को हत्यारोपी को कस्टडी रिमांड पर लेकर पूछताछ की गई। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि आशा भी शादीशुदा थी और उसकी भी शादी हुई थी। वह अपने चाचा लालमन के घर घूरापाली गांव में रहता था। वहीं उसकी आशा से जान पहचान हुई और धीरे-धीरे दोनों में अवैध संबंध हो गया। जब गांव के लोगों को दोनों के प्रेम प्रसंग की जानकारी हुई तो पंचायत में पति-पत्नी के रूप में दोनों को जीवन गुजारने पर सहमति बनी। पंचायत के फैसले से दोनों के परिजन सहमत नहीं हुए। जिससे मजबूरन वह प्रेमिका को लेकर हैदराबाद चला गया। करीब सात माह तक आशा को लेकर वह हैदराबाद रहा। उसी दौरान आशा गर्भवती हो गई। जिसको लेकर वह नवंबर 2011 में अपने गांव आया। परिजन गांव पर रखने को तैयार नहीं हुए तो दोनों पनियरा में रहने वाले अपने चाचा लक्ष्मन के साथ रहने लगे। पारिवारिक दबाव के कारण चाचा लक्ष्मन ने भी दोनों को खदेड़ दिया। दोनों राप्ती नदी के सिसई घाट से होकर घूरापाली गांव जा रहे थे। सिसई घाट पर दोनों के बीच कहासुनी हो गई। बात बढ़ने पर मारपीट में बदल गई। आरोपी ने गर्भवती आशा के पेट पर प्रहार कर दिया, जिससे वह बेहोश हो गई। बाद में मफलर से उसने गला कस कर प्रेमिका की हत्या कर दी। साक्ष्य छिपाने के लिए शव को नदी के किनारे बने गड्ढे में डाल कर मिट्टी से ढंक दिया। हत्या में प्रयुक्त मफलर को पुल पर बने झरोखे पर रख कर भाग गया। घूरापाली गांव जाकर आरोपी ने आशा को किसी के साथ फरार हो जाने की गलत सूचना दे दी। बाद में युवती के परिजनों ने हत्या की आशंका व्यक्त करते हुए कोर्ट की शरण ली। पूछताछ में आरोपी ने जुर्म स्वीकार किया। कस्टडी रिमांड पर लिए गए हत्यारोपी को शनिवार को वापस जेल भेज दिया गया।
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एसओ मेंहदावल राकेश यादव ने बताया कि घूरापाली निवासी आशा पुत्री चंद्रभान की मौत के मामले में कोर्ट के आदेश पर गत अगस्त में दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया था। गोरखपुर जनपद के सहजनवां थाना क्षेत्र के भगसा गांव निवासी आरोपी राम अशीष की तलाश हो रही थी। सीओ मेंहदावल एमए सिद्दीकी ने साक्ष्यों के आधार पर दहेज हत्या की धारा को हटाते हुए हत्या कर साक्ष्य छिपाने के आरोप में प्रथम दृष्टया राम अशीष को दोषी पाया। हत्या में मुकदमा तरमीम होने के बाद विवेचना एसओ राकेश यादव को मिली। पुलिस गिरफ्तारी का दबाव बना रही थी। गत छह दिसंबर को आरोपी राम अशीष ने कोर्ट में सरेंडर कर दिया। एसओ राकेश यादव ने बताया कि शुक्रवार को हत्यारोपी को कस्टडी रिमांड पर लेकर पूछताछ की गई। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि आशा भी शादीशुदा थी और उसकी भी शादी हुई थी। वह अपने चाचा लालमन के घर घूरापाली गांव में रहता था। वहीं उसकी आशा से जान पहचान हुई और धीरे-धीरे दोनों में अवैध संबंध हो गया। जब गांव के लोगों को दोनों के प्रेम प्रसंग की जानकारी हुई तो पंचायत में पति-पत्नी के रूप में दोनों को जीवन गुजारने पर सहमति बनी। पंचायत के फैसले से दोनों के परिजन सहमत नहीं हुए। जिससे मजबूरन वह प्रेमिका को लेकर हैदराबाद चला गया। करीब सात माह तक आशा को लेकर वह हैदराबाद रहा। उसी दौरान आशा गर्भवती हो गई। जिसको लेकर वह नवंबर 2011 में अपने गांव आया। परिजन गांव पर रखने को तैयार नहीं हुए तो दोनों पनियरा में रहने वाले अपने चाचा लक्ष्मन के साथ रहने लगे। पारिवारिक दबाव के कारण चाचा लक्ष्मन ने भी दोनों को खदेड़ दिया। दोनों राप्ती नदी के सिसई घाट से होकर घूरापाली गांव जा रहे थे। सिसई घाट पर दोनों के बीच कहासुनी हो गई। बात बढ़ने पर मारपीट में बदल गई। आरोपी ने गर्भवती आशा के पेट पर प्रहार कर दिया, जिससे वह बेहोश हो गई। बाद में मफलर से उसने गला कस कर प्रेमिका की हत्या कर दी। साक्ष्य छिपाने के लिए शव को नदी के किनारे बने गड्ढे में डाल कर मिट्टी से ढंक दिया। हत्या में प्रयुक्त मफलर को पुल पर बने झरोखे पर रख कर भाग गया। घूरापाली गांव जाकर आरोपी ने आशा को किसी के साथ फरार हो जाने की गलत सूचना दे दी। बाद में युवती के परिजनों ने हत्या की आशंका व्यक्त करते हुए कोर्ट की शरण ली। पूछताछ में आरोपी ने जुर्म स्वीकार किया। कस्टडी रिमांड पर लिए गए हत्यारोपी को शनिवार को वापस जेल भेज दिया गया।
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