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जिला बाल संरक्षण समिति की बैठक हुई
Updated Sat, 03 Nov 2018 12:11 AM IST
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बाल संप्रेक्षा गृह स्थापित करनेे का डीएम ने दिए निर्देश
किराए के भवन में संचालित करने के लिए शासन को भेजा जाए प्रस्ताव
अमर उजाला ब्यूरो
संतकबीरनगर। कलेक्ट्रेट सभागार में शुक्रवार को जिला बाल संरक्षण समिति की बैठक हुई। इसमें डीएम भूपेंद्र एस चौधरी ने जिले में बाल संप्रेक्षा गृह स्थापित करने के लिए विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिले के किशोर बच्चों को बस्ती, लखनऊ या गोरखपुर भेजना पड़ता है। इसलिए जिले में ही इसकी स्थापना की जाए। शुरू में किराए के भवन के लिए प्रस्ताव शासन को भेजा जाए।
डीएम ने बताया कि बच्चों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए प्रदेश सरकार की ओर से किशोर न्याय कार्यक्रम, समेकित बाल संरक्षण कार्यक्रम, चाइल्ड सेवा, पुनर्वास एवं शिशु गृह स्कीम संचालित की जा रही है। उन्होंने जिला प्रोबेशन अधिकारी तथा श्रम प्रर्वतन अधिकारी को निर्देश दिए कि जिले के जरूरतमंद बच्चों को इन योजनाओं का लाभ दिलाएं। जिले में बच्चों को संरक्षण प्रदान करने के लिए जिला, ब्लॉक एवं ग्राम स्तर पर गठित बाल संरक्षण समितियों को सक्रिय भूमिका निभाना होगा। कोई भी कानून का उल्लंघन करने, सड़क पर रहने वाले बेघर, छह वर्ष आयु तक के विपदाग्रस्त, अनाथ, अपरिपक्व और निराश्रित बच्चों की सूचना बाल संरक्षण समिति को तत्काल उपलब्ध कराई जाए ताकि उनके रहने-खाने आदि की व्यवस्था कराई जा सके।
मंडलीय प्रोबेशन अधिकारी नरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि जिले के 794 ग्राम पंचायतों में से 759 ग्राम पंचायतों में बाल संरक्षण समिति का गठन किया जा चुका है। शेष 35 ग्राम पंचायतों में गठन की कार्रवाई की जा रही है। 248 ग्राम पंचायतों में बैठक करा ली गई है। चाइल्ड लाइन सेवा बस्ती में संचालित है, जिले में अभी यह क्रियाशील नहीं है। इसके लिए चाइल्ड लाइन इंडिया फाउंडेशन को अनुरोध पत्र भेजा जाना है। उन्होंने बताया कि जिले में बाल सम्प्रेक्षा गृह (किशोर) की स्थापना के लिए करीब ढाई एकड़ भूमि की आवश्यकता होगी।
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बैठक में एएसपी आसित श्रीवास्तव, सीएमओ डॉ. अभयचंद्र श्रीवास्तव, डीआईओएस शिव कुमार ओझा, डीपीआरओ आलोक प्रियदर्शी, वियजाश्री, चंद्रशेखर पांडेय,जिला प्रोबेशन अधिकारी राकेश कुमार ने आदि मौजूद रहे।
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किराए के भवन में संचालित करने के लिए शासन को भेजा जाए प्रस्ताव
अमर उजाला ब्यूरो
संतकबीरनगर। कलेक्ट्रेट सभागार में शुक्रवार को जिला बाल संरक्षण समिति की बैठक हुई। इसमें डीएम भूपेंद्र एस चौधरी ने जिले में बाल संप्रेक्षा गृह स्थापित करने के लिए विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिले के किशोर बच्चों को बस्ती, लखनऊ या गोरखपुर भेजना पड़ता है। इसलिए जिले में ही इसकी स्थापना की जाए। शुरू में किराए के भवन के लिए प्रस्ताव शासन को भेजा जाए।
डीएम ने बताया कि बच्चों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए प्रदेश सरकार की ओर से किशोर न्याय कार्यक्रम, समेकित बाल संरक्षण कार्यक्रम, चाइल्ड सेवा, पुनर्वास एवं शिशु गृह स्कीम संचालित की जा रही है। उन्होंने जिला प्रोबेशन अधिकारी तथा श्रम प्रर्वतन अधिकारी को निर्देश दिए कि जिले के जरूरतमंद बच्चों को इन योजनाओं का लाभ दिलाएं। जिले में बच्चों को संरक्षण प्रदान करने के लिए जिला, ब्लॉक एवं ग्राम स्तर पर गठित बाल संरक्षण समितियों को सक्रिय भूमिका निभाना होगा। कोई भी कानून का उल्लंघन करने, सड़क पर रहने वाले बेघर, छह वर्ष आयु तक के विपदाग्रस्त, अनाथ, अपरिपक्व और निराश्रित बच्चों की सूचना बाल संरक्षण समिति को तत्काल उपलब्ध कराई जाए ताकि उनके रहने-खाने आदि की व्यवस्था कराई जा सके।
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मंडलीय प्रोबेशन अधिकारी नरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि जिले के 794 ग्राम पंचायतों में से 759 ग्राम पंचायतों में बाल संरक्षण समिति का गठन किया जा चुका है। शेष 35 ग्राम पंचायतों में गठन की कार्रवाई की जा रही है। 248 ग्राम पंचायतों में बैठक करा ली गई है। चाइल्ड लाइन सेवा बस्ती में संचालित है, जिले में अभी यह क्रियाशील नहीं है। इसके लिए चाइल्ड लाइन इंडिया फाउंडेशन को अनुरोध पत्र भेजा जाना है। उन्होंने बताया कि जिले में बाल सम्प्रेक्षा गृह (किशोर) की स्थापना के लिए करीब ढाई एकड़ भूमि की आवश्यकता होगी।
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बैठक में एएसपी आसित श्रीवास्तव, सीएमओ डॉ. अभयचंद्र श्रीवास्तव, डीआईओएस शिव कुमार ओझा, डीपीआरओ आलोक प्रियदर्शी, वियजाश्री, चंद्रशेखर पांडेय,जिला प्रोबेशन अधिकारी राकेश कुमार ने आदि मौजूद रहे।