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एमआईएस में लक्ष्य पूरा, जियो टैगिंग में हालत खराब
Santkabirnagar
Updated Fri, 28 Sep 2018 12:09 AM IST
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अमर उजाला
- फोटो : अमर उजाला
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संतकबीरनगर। जिले का पंचायतीराज विभाग शौचालय निर्माण के लक्ष्य को आंकड़ों के हिसाब से करीब-करीब पूरा कर चुका है। वर्ष-2012 के बेस लाइन सर्वे के अनुसार शौचालय विहीन 234332 परिवारों के पास शौचालय नहीं था। इनमें से अब तक 234306 परिवारों में शौचालय बन चुका है। केवल 26 शौचालयों का ही निर्माण शेष है, लेकिन निर्मित शौचालयों की फोटो अपडेट करने में जिला में पीछे है। अब तक केवल 71 प्रतिशत शौचालयों का ही फोटो अपलोड हो पाया है। बीते 20 दिनों में जियो टैगिंग के मामले में महज पांच फीसदी की बढ़ोत्तरी हो पाई है। इस हिसाब से देखा जाए तो गांधी जयंती के अवसर पर जिले को ओडीएफ घोषित करना मुश्किल होगा।
जिले में कुल 794 ग्राम पंचायत व 1605 राजस्व गांव हैं। वर्ष-2011 में हुई सामाजिक आर्थिक व जातीय जनगणना में जिले के 333437 परिवार थे। उस वक्त उनमें से केवल 99105 परिवारों में ही शौचालय था। शेष 234332 परिवार खुले में शौच जाते थे। पंचायतीराज विभाग के एमआईएस डॉटा के अनुसार स्वच्छ भारत कार्यक्रम के तहत शुरू हुए शौचालय निर्माण अभियान के तहत अब तक 234306 परिवारों में शौचालय निर्माण का कार्य पूरा हो गया है। शेष 26 शौचालयों का जो निर्माण अधूरा है उनमें सेमरियांवा ब्लॉक के परिवार शामिल हैं।
हालांकि आंकड़ों की यह गुलाबी तस्वीर जियो टैगिंग (बने शौचालय की वेबसाइट पर फोटो अपलोड करना) के मामले में फीकी पड़ती जा रही है। सितंबर की आठ तारीख तक जिले में 66.63 प्रतिशत निर्मित शौचालयों की फोटो अपलोड हुई थी, जबकि 27 सितंबर तक यह आंकड़ा 71 प्रतिशत पर ही पहुंचा था। मतलब यह कि अभी भी निर्मित शौचालयों की फोटो नहीं मिलने से एमआईएस डॉटा की पुष्टि बाकी है। अब जबकि महीना समाप्त होने में केवल तीन दिन ही शेष हैं तो जियो टैगिंग का कार्य पूरा होना काफी कठिन लग रहा है। इसके बिना जिले को ओडीएफ घोषित करना आसान नहीं होगा।
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कई जगह अभी शुरू ही नहीं हुआ है काम
खलीलाबाद ब्लॉक के चकदहीं ग्राम पंचायत को ओडीएफ बनाने के लिए अभी 40 शौचालयों के निर्माण की जरूरत है। इसके लिए तीन दिन पहले गांव में बैठक हुई है। चयनित लाभार्थियों का प्रस्तव भेजा गया है। इनके खाते में बजट भेजने के बाद भी तीन दिन में कार्य पूरा होना असंभव है। हैंसर व नाथनगर ब्लॉक के भी कई गांव ऐसे हैं जहां अभी सभी घरों में शौचालय नहीं बन पाया है।
शहरों में भी बाकी है शौचालय निर्माण
मगहर नगर पंचायत में पिछले सप्ताह महिलाओं ने चेयरमैन का घर घेर लिया था। इनका कहना था कि घर में शौचालय नहीं होने के बावजूद उन्हें खुले में शौच जाने से रोका जा रहा है। नगर पंचायत की चेयरमैन संगीता वर्मा का कहना था कि करीब 200 परिवारों में शौचालय निर्माण के बाद भी नगर को पूर्ण रूप से ओडीएफ बनाया जा सकता है।
समय से पूरा हो जाएगा लक्ष्य- डीपीआरओ
डीपीआरओ आलोक प्रियदर्शी का कहना है कि वर्ष-2011 की बेस लाइन सर्वे के अनुसार चिह्नि परिवारों में दो अक्तूबर से पहले शौचालय निर्माण कराया जाना है। एमआईएस डॉटा के अनुसार केवल 26 घरों में शौचालय निर्माण बाकी है। जियो टैगिंग का कार्य भी तेजी से चल रहा है। कर्मचारी रात-दिन कार्य में लगे हैं। पूरी उम्मीद है कि गांधी जयंती से पहले जिले के सभी 333437 परिवारों में शौचालय का निर्माण हो जाएगा।
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जिले में कुल 794 ग्राम पंचायत व 1605 राजस्व गांव हैं। वर्ष-2011 में हुई सामाजिक आर्थिक व जातीय जनगणना में जिले के 333437 परिवार थे। उस वक्त उनमें से केवल 99105 परिवारों में ही शौचालय था। शेष 234332 परिवार खुले में शौच जाते थे। पंचायतीराज विभाग के एमआईएस डॉटा के अनुसार स्वच्छ भारत कार्यक्रम के तहत शुरू हुए शौचालय निर्माण अभियान के तहत अब तक 234306 परिवारों में शौचालय निर्माण का कार्य पूरा हो गया है। शेष 26 शौचालयों का जो निर्माण अधूरा है उनमें सेमरियांवा ब्लॉक के परिवार शामिल हैं।
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हालांकि आंकड़ों की यह गुलाबी तस्वीर जियो टैगिंग (बने शौचालय की वेबसाइट पर फोटो अपलोड करना) के मामले में फीकी पड़ती जा रही है। सितंबर की आठ तारीख तक जिले में 66.63 प्रतिशत निर्मित शौचालयों की फोटो अपलोड हुई थी, जबकि 27 सितंबर तक यह आंकड़ा 71 प्रतिशत पर ही पहुंचा था। मतलब यह कि अभी भी निर्मित शौचालयों की फोटो नहीं मिलने से एमआईएस डॉटा की पुष्टि बाकी है। अब जबकि महीना समाप्त होने में केवल तीन दिन ही शेष हैं तो जियो टैगिंग का कार्य पूरा होना काफी कठिन लग रहा है। इसके बिना जिले को ओडीएफ घोषित करना आसान नहीं होगा।
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कई जगह अभी शुरू ही नहीं हुआ है काम
खलीलाबाद ब्लॉक के चकदहीं ग्राम पंचायत को ओडीएफ बनाने के लिए अभी 40 शौचालयों के निर्माण की जरूरत है। इसके लिए तीन दिन पहले गांव में बैठक हुई है। चयनित लाभार्थियों का प्रस्तव भेजा गया है। इनके खाते में बजट भेजने के बाद भी तीन दिन में कार्य पूरा होना असंभव है। हैंसर व नाथनगर ब्लॉक के भी कई गांव ऐसे हैं जहां अभी सभी घरों में शौचालय नहीं बन पाया है।
शहरों में भी बाकी है शौचालय निर्माण
मगहर नगर पंचायत में पिछले सप्ताह महिलाओं ने चेयरमैन का घर घेर लिया था। इनका कहना था कि घर में शौचालय नहीं होने के बावजूद उन्हें खुले में शौच जाने से रोका जा रहा है। नगर पंचायत की चेयरमैन संगीता वर्मा का कहना था कि करीब 200 परिवारों में शौचालय निर्माण के बाद भी नगर को पूर्ण रूप से ओडीएफ बनाया जा सकता है।
समय से पूरा हो जाएगा लक्ष्य- डीपीआरओ
डीपीआरओ आलोक प्रियदर्शी का कहना है कि वर्ष-2011 की बेस लाइन सर्वे के अनुसार चिह्नि परिवारों में दो अक्तूबर से पहले शौचालय निर्माण कराया जाना है। एमआईएस डॉटा के अनुसार केवल 26 घरों में शौचालय निर्माण बाकी है। जियो टैगिंग का कार्य भी तेजी से चल रहा है। कर्मचारी रात-दिन कार्य में लगे हैं। पूरी उम्मीद है कि गांधी जयंती से पहले जिले के सभी 333437 परिवारों में शौचालय का निर्माण हो जाएगा।