{"_id":"5b8ad0b742c7924657042b1a","slug":"71535824055-sant-kabir-nagar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"घाघरा का जलस्तर घटा, बाढ़ पीड़ितों की दिक्कतें बरकरार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
घाघरा का जलस्तर घटा, बाढ़ पीड़ितों की दिक्कतें बरकरार
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 01 Sep 2018 11:42 PM IST
विज्ञापन
ghaghra river
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हैंसर। घाघरा नदी का जल स्तर घटने लगा है। शनिवार की शाम नदी का जलस्तर खतरे के निशान से महज पांच सेमी ऊपर है। नदी का पानी कम होने से बाढ़ प्रभावित गांवों के लोग ने राहत का सांस ली है, लेकिन उनकी परेशानी कम नहीं हुई।
गांव में पानी भरने से हुए कीचड़ से उठ रही दुर्गंध संक्रामक बीमारियों को दावत दे रही है। बुखार समेत अन्य बीमारियों से पीड़ित लोग प्राइवेट डॉक्टरों से उपचार कराने को विवश हैं। गांव वालों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग भी राजस्व विभाग की तरह मुंह मोड़े हुए हैं।
घाघरा नदी का जलस्तर खतरे के निशान 79.35 को पार कर 79.47 पर पहुंच गया था। इससे नदी और बांध के बीच बसे गुनवतिया, चकदहा, भौंवापार, सियरकला, गायघाट के लोग बांध पर शरण लेने को विवश हो गए। बाढ़ की चपेट में आए सुअरहा, ढोलबजा, दौलतपुर, सरैया, खरैया, सियराम अधीन सिंह समेत 15 गांव के लोग किसी तरह अपने घरों पर रुके हुए थे।
विज्ञापन
रामदीन, सूरत, कमलेश, जर्नादन, फागू, राजेंद्र, जंगीलाल आदि का कहना है कि बाढ़ का पानी दो दिनों से कम हो रहा है। परिणामस्वरूप दरवाजे पर चढ़ा पानी उतर गया। लेकिन गांव की नालियों में गंदा पानी भरा हुआ है। उससे दुर्गंध उठने लगी है। कई बच्चे बुखार की चपेट में हैं तो कई लोग पेट दर्द से परेशान हैं।
बांध पर जो लोग शरण लिए हैं, वे दो दिन बारिश में भीगे तो शनिवार को धूप में रहने को विवश हुए। इससे लोगों की तबीयत खराब होने लगी है। यहां पर न तो राजस्व विभाग का कोई सुध लेने पहुंचा और न ही स्वास्थ्य विभाग का। बीमार पड़ रहे लोग प्राइवेट डॉक्टर से इलाज कराने को विवश हैं।
बाढ़ पीड़ितों का कहना है कि सरकारी सहायता अभी तक न तो मिली और न ही मिलने की उम्मीद है। एक महीने से फसल के ऊपर पानी है जिससे वह भी सड़ गई। ऐसे में बाढ़ उतरने के बाद भी दो जून की रोटी की चिंता सता रही है।
विज्ञापन
गांव में पानी भरने से हुए कीचड़ से उठ रही दुर्गंध संक्रामक बीमारियों को दावत दे रही है। बुखार समेत अन्य बीमारियों से पीड़ित लोग प्राइवेट डॉक्टरों से उपचार कराने को विवश हैं। गांव वालों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग भी राजस्व विभाग की तरह मुंह मोड़े हुए हैं।
विज्ञापन
घाघरा नदी का जलस्तर खतरे के निशान 79.35 को पार कर 79.47 पर पहुंच गया था। इससे नदी और बांध के बीच बसे गुनवतिया, चकदहा, भौंवापार, सियरकला, गायघाट के लोग बांध पर शरण लेने को विवश हो गए। बाढ़ की चपेट में आए सुअरहा, ढोलबजा, दौलतपुर, सरैया, खरैया, सियराम अधीन सिंह समेत 15 गांव के लोग किसी तरह अपने घरों पर रुके हुए थे।
विज्ञापन
रामदीन, सूरत, कमलेश, जर्नादन, फागू, राजेंद्र, जंगीलाल आदि का कहना है कि बाढ़ का पानी दो दिनों से कम हो रहा है। परिणामस्वरूप दरवाजे पर चढ़ा पानी उतर गया। लेकिन गांव की नालियों में गंदा पानी भरा हुआ है। उससे दुर्गंध उठने लगी है। कई बच्चे बुखार की चपेट में हैं तो कई लोग पेट दर्द से परेशान हैं।
बांध पर जो लोग शरण लिए हैं, वे दो दिन बारिश में भीगे तो शनिवार को धूप में रहने को विवश हुए। इससे लोगों की तबीयत खराब होने लगी है। यहां पर न तो राजस्व विभाग का कोई सुध लेने पहुंचा और न ही स्वास्थ्य विभाग का। बीमार पड़ रहे लोग प्राइवेट डॉक्टर से इलाज कराने को विवश हैं।
बाढ़ पीड़ितों का कहना है कि सरकारी सहायता अभी तक न तो मिली और न ही मिलने की उम्मीद है। एक महीने से फसल के ऊपर पानी है जिससे वह भी सड़ गई। ऐसे में बाढ़ उतरने के बाद भी दो जून की रोटी की चिंता सता रही है।