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घाघरा की कटान

Wed, 10 Nov 2021 12:27 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 10 Nov 2021 12:27 AM IST
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7 houses has  gone in Ghaghra river
घाघरा नदी में 24 घंटे में सात और मकान समा गए
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धनघटा (संतकबीरनगर)। घाघरा नदी की बाढ़ झेल रहे गायघाट दक्षिणी गांव पर कटान का कहर जारी है। बीते 24 घंटों में सात और लोगों के मकान नदी में समा गए हैं। जबकि 14 लोगों का मकान कटान की जद में आ गए हैं। ये लोग अपना आशियाना अपने ही हाथों तोड़ने के लिए विवश हैं।
जानकारी के मुताबिक गायघाट दक्षिणी गांव की आबादी 3000 है। इस गांव में 200 घर थे। पिछले साल कटान के कारण 21 घर घाघरा नदी में विलीन हो गए थे। इस साल अब तक 20 घर नदी में समा चुके हैं। इस प्रकार पिछले दो साल में 41 मकान नदी में समा चुके हैं। जबकि 14 लोगों का मकान कभी भी नदी में समा सकता है। इन लोगों ने अपना मकान छोड़कर दूसरी जगहों पर शरण ली है। अभी तक किसी को भी स्थायी तौर पर बसाया नहीं जा सका है।
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एमबीडी बांध और घाघरा नदी के मध्य बसे गायघाट दक्षिणी पर नदी की कटान का कहर पिछले वर्ष अगस्त माह में शुरू हुआ था। जिनके मकान नदी में विलीन हो गए हैं वे सभी एमबीडी बांध पर शरण लिए हैं। पिछले साल उजड़े लोगों को बसाया भी नहीं गया था था कि नदी ने इस साल फिर कटान शुरू कर दिया। उजड़े लोग रिश्तेदारों के यहां रहकर किसी तरह जीवनयापन कर रहे हैं।
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24 घंटों में इनके मकान नदी में समाए
सोमवार शाम से मंगलवार सुबह तक बुद्धिराम, दिलीप, सुभाष, मिठाई, धर्मेंद्र, वीरेंद्र और सुंदर के मकान नदी में समाहित हो गए। बेघर हुए लोग अपना सामान और मवेशी लेकर दूसरों के यहां शरण लेने को मजबूर हैं।
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करीब 41 लोगों का मकान कटान की वजह से नदी में समा चुके हैं। यह सभी लोग बेघर हो गए हैं। प्रशासन ने किसी को अभी तक कहीं नहीं बसाया है। लोग किसी तरह अपना गुजारा कर रहे हैं। ये सभी लोग संकट में हैं। न बच्चों की पढ़ाई हो पा रही है न इनकी कोई कमाई हो पा रही है। प्रशासन की तरफ से कोई सार्थक पहल नहीं की जा रही है। इसी तरह कटान होती रही तो 20 और लोगों का मकान एक दो दिन में नदी की धारा में समा जाएगा। कटान के भय से कई लोग अपना मकान तोड़ रहे हैं।

- बालेंद्र उर्फ पप्पू, ग्राम प्रधान
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पिछले साल जिन लोगों का मकान कट गया था उनको बसाने के लिए जमीन आवंटित कर दी गई है। हाल ही में जिनका मकान कटा है उनके भी रहने-खाने का बंदोबस्त किया जा रहा है। जल्द ही जमीन चिह्नित करके आवंटित कर दी जाएगी।
- रत्नेश तिवारी, तहसीलदार
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