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घाघरा की कटान से 38 गांवों के अस्तित्व पर खतरा
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 06 Jul 2018 11:21 PM IST
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धनघटा में कटान करती घाघरा नदी।
- फोटो : अमर उजाला
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हैंसर। घाघरा की कटान से धनघटा तहसील क्षेत्र के 38 गांवों पर खतरा मंडराने लगा है। एमबीडी बांध और नदी के बीच गांवों की ओर हो रही कटान से ग्रामीण सहम गए हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि नदी उन लोगों को भूमिहीन तो बना ही रही है, अब ऐसा लगता है कि उनका आशियाना भी नहीं बचेगा। कटान रोकने का प्रयास नहीं किए जाने से गांव वालों के होश उड़ गए हैं।
जिले के पश्चिमी छोर बस्ती जिले की सीमा पर पड़रिया गांव के समीप घाघरा नदी कटान करते हुए रामपुर मकदूमपुर बांध को छूने को बेताब है तो पूर्वी छोर गोरखपुर जिले के बॉर्डर पर बसे गांव गायघाट से लेकर दौलतपुर, रामपुर दक्षिणी तक कटान करते हुए चनगंहा, सीयरकला, सियरामअधीन, गुनवतिया, सुअरहा, ढोलबजा, कंचनपुर समेत 38 गांवों की ओर तेजी से बढ़ रही है।
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ग्रामीण रामशंकर यादव, बंशी, संतू, राजकुमार, राधेश्याम, इंद्रेश, तुलसी आदि का कहना है कि नदी की धारा उत्तर तरफ मुड़ने से पानी गांव के करीब पहुंच गया है। नदी की धारा को यदि दूसरी तरफ नहीं मोड़ा गया तो भिखारीपुर, अशरफपुर की तरह यहां भी नदी और बांध के बीच के गांव नदी में समाहित हो जाएंगे।
गांव वालों का कहना है कि प्रशासन की नींद तब खुलती है, जब नदी बांध को क्षति पहुंचाना शुरू कर देती है। वैसे सिंचाई विभाग के लोग कटान को रोकने का प्रयास नहीं करते हैं। गांव वालों का कहना है कि नदी के उत्तरी छोर पर जिस तरह मशीन से बालू का खनन किया गया है।
उसी का नतीजा है कि नदी अंबेडकरनगर और आजमगढ़ की सीमा को छोड़ते हुए संतकबीरनगर, बस्ती व गोरखपुर जिले में बढ़ती जा रही है। इससे बांध और नदी के बीच बसे गांव सुरक्षित नहीं रह गए हैं। अब तक हर साल बाढ़ आने पर उजड़ कर बांध पर शरण लेने के बाद पानी हटने के बाद घर लौट आते थे।
लेकिन जब घर नदी में समाहित हो जाएगा तो कहां जाएंगे, कहां रहेंगे। इस संबंध में सिंचाई विभाग के अधिशाषी अभियंता आरएन सिंह यादव का कहना है कि नदी बांध से काफी दूरी पर है।
जिस जगह कटान हो रही है, वहां पर कटान रोकने का इंतजाम करना मुश्किल है। राप्ती नदी स्थिर है। अभी जिले में राप्ती के करमैनी-बेलौली और घाघरा के रामपुर मकदूमपुर बांध को कहीं कोई खतरा नहीं है। बांधों की सुरक्षा पर सतर्क दृष्टि रखी जा रही है।
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ग्रामीणों का कहना है कि नदी उन लोगों को भूमिहीन तो बना ही रही है, अब ऐसा लगता है कि उनका आशियाना भी नहीं बचेगा। कटान रोकने का प्रयास नहीं किए जाने से गांव वालों के होश उड़ गए हैं।
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जिले के पश्चिमी छोर बस्ती जिले की सीमा पर पड़रिया गांव के समीप घाघरा नदी कटान करते हुए रामपुर मकदूमपुर बांध को छूने को बेताब है तो पूर्वी छोर गोरखपुर जिले के बॉर्डर पर बसे गांव गायघाट से लेकर दौलतपुर, रामपुर दक्षिणी तक कटान करते हुए चनगंहा, सीयरकला, सियरामअधीन, गुनवतिया, सुअरहा, ढोलबजा, कंचनपुर समेत 38 गांवों की ओर तेजी से बढ़ रही है।
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ग्रामीण रामशंकर यादव, बंशी, संतू, राजकुमार, राधेश्याम, इंद्रेश, तुलसी आदि का कहना है कि नदी की धारा उत्तर तरफ मुड़ने से पानी गांव के करीब पहुंच गया है। नदी की धारा को यदि दूसरी तरफ नहीं मोड़ा गया तो भिखारीपुर, अशरफपुर की तरह यहां भी नदी और बांध के बीच के गांव नदी में समाहित हो जाएंगे।
गांव वालों का कहना है कि प्रशासन की नींद तब खुलती है, जब नदी बांध को क्षति पहुंचाना शुरू कर देती है। वैसे सिंचाई विभाग के लोग कटान को रोकने का प्रयास नहीं करते हैं। गांव वालों का कहना है कि नदी के उत्तरी छोर पर जिस तरह मशीन से बालू का खनन किया गया है।
उसी का नतीजा है कि नदी अंबेडकरनगर और आजमगढ़ की सीमा को छोड़ते हुए संतकबीरनगर, बस्ती व गोरखपुर जिले में बढ़ती जा रही है। इससे बांध और नदी के बीच बसे गांव सुरक्षित नहीं रह गए हैं। अब तक हर साल बाढ़ आने पर उजड़ कर बांध पर शरण लेने के बाद पानी हटने के बाद घर लौट आते थे।
लेकिन जब घर नदी में समाहित हो जाएगा तो कहां जाएंगे, कहां रहेंगे। इस संबंध में सिंचाई विभाग के अधिशाषी अभियंता आरएन सिंह यादव का कहना है कि नदी बांध से काफी दूरी पर है।
जिस जगह कटान हो रही है, वहां पर कटान रोकने का इंतजाम करना मुश्किल है। राप्ती नदी स्थिर है। अभी जिले में राप्ती के करमैनी-बेलौली और घाघरा के रामपुर मकदूमपुर बांध को कहीं कोई खतरा नहीं है। बांधों की सुरक्षा पर सतर्क दृष्टि रखी जा रही है।