{"_id":"5a033fe14f1c1b3c3d8b61e0","slug":"51510162401-sant-kabir-nagar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"अल्टीमेटम पर भड़के बाढ़ पीड़ित","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अल्टीमेटम पर भड़के बाढ़ पीड़ित
Updated Wed, 08 Nov 2017 11:35 PM IST
विज्ञापन
प्रदर्शन
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
हैंसर (संतकबीरनगर)।
घाघरा नदी की कटान से बेघर हो चुके तुर्कवलिया नायक गांव के लोगों का उस जगह पर रहना मुश्किल दिख रहा है। जहां चार साल पूूर्व प्रशासन ने उन्हें जमीन देकर बसाया था। गांव में पहुंच कर लेखपाल ने जब उनको बसाए गए जमीन को बालू का रेता बताकर खाली करने की चेतावनी दी तो बाढ़ पीड़ितो के होश उड़ गए। बुधवार को ग्राम प्रधान के नेतृत्व में तहसील पर पहुंचे बाढ़ पीड़ितों ने प्रदर्शन किया। उसके बाद एसडीएम से मिलकर उनके समक्ष अपनी पीड़ा बताई। जिस पर एसडीएम ने उन्हें न्याय दिलाने का आश्वासन दिया।
प्रधान वीरेंद्र यादव के नेतृत्व में तहसील पर पहुंचे शिवरतन, विजय लाल, इंद्रेश, हरिकेश, हरिप्रकाश, रामकेवल, रामनेवास, सीमा, सरोजा, बाबूलाल, रामसुरत आदि का कहना था कि वर्ष 2013 में घाघरा नदी में आई विनाशकारी बाढ़ की कटान से उनकी खेती और मकान सब नदी में समाहित हो गया। उसके बाद प्रशासन ने बांध के उत्तर जमीन देकर बसाया। जहां शासन द्वारा दिए गए आवास के नीचे किसी तरह रह रहे है। पांच नवबंर को हल्का के लेखपाल गांव में पहुंचे और बताया कि जिस जमीन पर बसे हुए हैं वह अभिलेख में बालूू के रेत के नाम से दर्ज है। इस कारण इस जमीन को खाली करना होगा। अन्यथा कार्रवाई होगी। बाढ़ पीड़ितों का कहना था कि जिस समय उन्हें वहंा बसाया गया था उस समय वह जमीन उनके नाम ंसे करने की बात प्रशासन ने कहा था। अगर अभी तक वह जमीन बालू व रेत के नाम से दर्ज है तो उसमें उनका क्या कसूर है? अब वहंा से उजाड़ दिया गया तो कहा जाएंगे। एसडीएम उमेशचंद निगम ने बाढ़ पीड़ितों को आश्वासन दिया कि उन्हें उजड़ने नहीं दिया जाएगा। इस बात को जिलाधिकारी के संज्ञान में लाकर समस्या का समाधान कराएंगे। उसके बाद बाढ़ पीड़ित अपने घरों को लौटे।
घाघरा नदी की कटान से बेघर हो चुके तुर्कवलिया नायक गांव के लोगों का उस जगह पर रहना मुश्किल दिख रहा है। जहां चार साल पूूर्व प्रशासन ने उन्हें जमीन देकर बसाया था। गांव में पहुंच कर लेखपाल ने जब उनको बसाए गए जमीन को बालू का रेता बताकर खाली करने की चेतावनी दी तो बाढ़ पीड़ितो के होश उड़ गए। बुधवार को ग्राम प्रधान के नेतृत्व में तहसील पर पहुंचे बाढ़ पीड़ितों ने प्रदर्शन किया। उसके बाद एसडीएम से मिलकर उनके समक्ष अपनी पीड़ा बताई। जिस पर एसडीएम ने उन्हें न्याय दिलाने का आश्वासन दिया।
प्रधान वीरेंद्र यादव के नेतृत्व में तहसील पर पहुंचे शिवरतन, विजय लाल, इंद्रेश, हरिकेश, हरिप्रकाश, रामकेवल, रामनेवास, सीमा, सरोजा, बाबूलाल, रामसुरत आदि का कहना था कि वर्ष 2013 में घाघरा नदी में आई विनाशकारी बाढ़ की कटान से उनकी खेती और मकान सब नदी में समाहित हो गया। उसके बाद प्रशासन ने बांध के उत्तर जमीन देकर बसाया। जहां शासन द्वारा दिए गए आवास के नीचे किसी तरह रह रहे है। पांच नवबंर को हल्का के लेखपाल गांव में पहुंचे और बताया कि जिस जमीन पर बसे हुए हैं वह अभिलेख में बालूू के रेत के नाम से दर्ज है। इस कारण इस जमीन को खाली करना होगा। अन्यथा कार्रवाई होगी। बाढ़ पीड़ितों का कहना था कि जिस समय उन्हें वहंा बसाया गया था उस समय वह जमीन उनके नाम ंसे करने की बात प्रशासन ने कहा था। अगर अभी तक वह जमीन बालू व रेत के नाम से दर्ज है तो उसमें उनका क्या कसूर है? अब वहंा से उजाड़ दिया गया तो कहा जाएंगे। एसडीएम उमेशचंद निगम ने बाढ़ पीड़ितों को आश्वासन दिया कि उन्हें उजड़ने नहीं दिया जाएगा। इस बात को जिलाधिकारी के संज्ञान में लाकर समस्या का समाधान कराएंगे। उसके बाद बाढ़ पीड़ित अपने घरों को लौटे।
विज्ञापन