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तहसील सभागार में जीएसटी को लेकर व्यापारियों से हुई चर्चा
Updated Wed, 25 Oct 2017 11:47 PM IST
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मेंहदावल। भारत सरकार के संयुक्त सचिव कार्मिक एवं प्रशिक्षण देवेश चतुर्वेदी ने बुधवार को मेंहदावल तहसील सभागार में व्यापारियों के साथ बैठक कर जीएसटी को लेकर उत्पन्न हो रही समस्याओं पर चर्चा की। व्यापारियों ने अपनी समस्याएं रखीं और संयुक्त सचिव ने उनके उपाय सुझाए।
संयुक्त सचिव देवेश चतुर्वेदी ने कहा कि जीएसटी को लेकर व्यापारी ऊहापोह में नह रहें। यह व्यापारिक प्रक्रिया को आने वाले दिनों में और मजबूत करेगा। उन्होंने कहा कि जागरूकता के अभाव में लोग गुड्स एंड सर्विस टैक्स को संदेह की दृष्टि से देख रहे हैं। इसके प्रति जागरूक करने का लिए ही एक दिवसीय प्रशिक्षण का आयोजन हुआ। इसमें व्यापारियों की समस्याओं के समाधान का पूरा प्रयास हो रहा है। उन्होंने कहा कि गुड्स एंड सर्विस टैक्स अधिनियम 2016 की सम्यक जानकारी नहीं होने से वर्तमान में व्यापारी समुदाय परेशान है। इस टैक्स के पीछे सरकार की मंशा वस्तुओं और सेवाओं पर एक समान टैक्स लगाकर व्यापारियों व उपभोक्ताओं को राहत देना है। यह एक अप्रत्यक्ष कर है। जीएसटी के तहत वस्तुओं व सेवाओं पर एक समान टैक्स लगाने का प्रावधान है। जीएसटी लागू नहीं होने पर वस्तु व सेवाओं पर अलग-अलग टैक्स लिए जाते थे लेकिन देश में जीएसटी लागू होने के बाद अब हर सामान व सेवा पर सिर्फ एक टैक्स लगेगा। इसको लेकर व्यापारियों को आ रही असुविधा दूर कर जीएसटी की हर नीतियों से अवगत कराते हुए उनके भ्रम को दूर करने का प्रयास किया गया। डीएम मार्कंडेय शाही ने कहा कि जीएसटी (गुड्स एंड सर्विस टैक्स) को लेकर व्यापारी भ्रमित न होकर बल्कि जागरूक हों। यदि इससे संबंधित समस्या होती है तो उसके निराकरण के लिए प्रशासन हर स्तर का सहयोग करेगा।
बैठक में उठीं समस्याएं
सितंबर 2017 का जीएसटीआर 3 बी दाखिल करते समय विलंब शुल्क प्रदर्शित कर रहा है। जबकि जीएसटीआर 3 बी दाखिल करने की समय सीमा 20 अक्टूबर 2017 निर्धारित है।
समाधान योजना की तिथि बढ़ने के उपरांत योजना अपनाने वाले व्यापारियों का जुलाई, अगस्त, सितंबर 2017 का जीएसटीआर 3 बी दाखिल करते हुए जीएसटीआर 3 बी दाखिल नहीं हो रहा है, क्योंकि एक जुलाई 2017 से उन व्यापारियों का समाधान अपनाया जाना दिख रहा है।
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जिन व्यापारियों ने जुलाई 2017 का जीएसटीआर 3 बी दाखिल किया है, उसमें सुधार एडिट करने का विकल्प नहीं खुल रहा है।
जीएसटी का सर्वर बहुत धीमा चल रहा है एवं बार-बार लॉग आउट हो जा रहा है।
ऐसे छोटे व्यापारी जो जीएसटी में माइग्रेट हो चुके हैं, लेकिन अपना पंजीयन निरस्त करना चाहते हैं, उनके लिए कोई व्यवस्था नहीं दी गई है।
जीएसटी पोर्टल पर एमआईएस की सुविधा अभी उपलब्ध नहीं है।
व्यापारियों के जरिए नए पंजीयन के लिए आवेदन वाणिज्य कर अधिकारी एवं डिप्टी कमिश्नर के लॉगइन पर कर दिया जा रहा है, जबकि दोनों अधिकारियों के लॉगइन पर आवेदन पत्र के संबंध में पोर्टल पर सूचना उपलब्ध नहीं है। जिसकी वजह से उनके आवेदन पत्र की जांच नहीं हो पा रही है।
व्यापारियों के जरिए दाखिल रिटर्न की कोई रसीद प्राप्त नहीं हो रही है।
व्यापारियों द्वारा माह में तीन बार रिटर्न कार्रवाई होने की जगह एक ही दिन में सभी प्रक्रियाओं को पूर्ण करने का सुझाव दिया गया।
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संयुक्त सचिव देवेश चतुर्वेदी ने कहा कि जीएसटी को लेकर व्यापारी ऊहापोह में नह रहें। यह व्यापारिक प्रक्रिया को आने वाले दिनों में और मजबूत करेगा। उन्होंने कहा कि जागरूकता के अभाव में लोग गुड्स एंड सर्विस टैक्स को संदेह की दृष्टि से देख रहे हैं। इसके प्रति जागरूक करने का लिए ही एक दिवसीय प्रशिक्षण का आयोजन हुआ। इसमें व्यापारियों की समस्याओं के समाधान का पूरा प्रयास हो रहा है। उन्होंने कहा कि गुड्स एंड सर्विस टैक्स अधिनियम 2016 की सम्यक जानकारी नहीं होने से वर्तमान में व्यापारी समुदाय परेशान है। इस टैक्स के पीछे सरकार की मंशा वस्तुओं और सेवाओं पर एक समान टैक्स लगाकर व्यापारियों व उपभोक्ताओं को राहत देना है। यह एक अप्रत्यक्ष कर है। जीएसटी के तहत वस्तुओं व सेवाओं पर एक समान टैक्स लगाने का प्रावधान है। जीएसटी लागू नहीं होने पर वस्तु व सेवाओं पर अलग-अलग टैक्स लिए जाते थे लेकिन देश में जीएसटी लागू होने के बाद अब हर सामान व सेवा पर सिर्फ एक टैक्स लगेगा। इसको लेकर व्यापारियों को आ रही असुविधा दूर कर जीएसटी की हर नीतियों से अवगत कराते हुए उनके भ्रम को दूर करने का प्रयास किया गया। डीएम मार्कंडेय शाही ने कहा कि जीएसटी (गुड्स एंड सर्विस टैक्स) को लेकर व्यापारी भ्रमित न होकर बल्कि जागरूक हों। यदि इससे संबंधित समस्या होती है तो उसके निराकरण के लिए प्रशासन हर स्तर का सहयोग करेगा।
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बैठक में उठीं समस्याएं
सितंबर 2017 का जीएसटीआर 3 बी दाखिल करते समय विलंब शुल्क प्रदर्शित कर रहा है। जबकि जीएसटीआर 3 बी दाखिल करने की समय सीमा 20 अक्टूबर 2017 निर्धारित है।
समाधान योजना की तिथि बढ़ने के उपरांत योजना अपनाने वाले व्यापारियों का जुलाई, अगस्त, सितंबर 2017 का जीएसटीआर 3 बी दाखिल करते हुए जीएसटीआर 3 बी दाखिल नहीं हो रहा है, क्योंकि एक जुलाई 2017 से उन व्यापारियों का समाधान अपनाया जाना दिख रहा है।
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जिन व्यापारियों ने जुलाई 2017 का जीएसटीआर 3 बी दाखिल किया है, उसमें सुधार एडिट करने का विकल्प नहीं खुल रहा है।
जीएसटी का सर्वर बहुत धीमा चल रहा है एवं बार-बार लॉग आउट हो जा रहा है।
ऐसे छोटे व्यापारी जो जीएसटी में माइग्रेट हो चुके हैं, लेकिन अपना पंजीयन निरस्त करना चाहते हैं, उनके लिए कोई व्यवस्था नहीं दी गई है।
जीएसटी पोर्टल पर एमआईएस की सुविधा अभी उपलब्ध नहीं है।
व्यापारियों के जरिए नए पंजीयन के लिए आवेदन वाणिज्य कर अधिकारी एवं डिप्टी कमिश्नर के लॉगइन पर कर दिया जा रहा है, जबकि दोनों अधिकारियों के लॉगइन पर आवेदन पत्र के संबंध में पोर्टल पर सूचना उपलब्ध नहीं है। जिसकी वजह से उनके आवेदन पत्र की जांच नहीं हो पा रही है।
व्यापारियों के जरिए दाखिल रिटर्न की कोई रसीद प्राप्त नहीं हो रही है।
व्यापारियों द्वारा माह में तीन बार रिटर्न कार्रवाई होने की जगह एक ही दिन में सभी प्रक्रियाओं को पूर्ण करने का सुझाव दिया गया।