{"_id":"6839f09273bd0a74220443c9","slug":"415-units-of-blood-donated-without-compensation-khalilabad-news-c-209-1-sgkp1040-133388-2025-05-30","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sant Kabir Nagar News: बिना भरपाई दे दिया 415 यूनिट खून","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sant Kabir Nagar News: बिना भरपाई दे दिया 415 यूनिट खून
Fri, 30 May 2025 11:23 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Fri, 30 May 2025 11:23 PM IST
विज्ञापन
सीएचसी स्थित जिला ब्लड बैंक
संतकबीरनगर। जिला अस्पताल में ही अभी तक मरीज माफियाओं पर कार्रवाई होती रही है और वह अस्पताल में सक्रिय होकर मरीजों को शोषण कर रहे थे, लेकिन इधर ब्लड बैंक में भी खेल चल रहा है। यहां भी बिना डोनर के ही 415 लोगों को रक्त दे दिया गया है, हालांकि ब्लड बैंक का दावा है कि इसमें ज्यादातर बीमार लोगों को नियमानुसार रक्त दिया गया है। ब्लड बैंक में अभी 84 यूनिट रक्त बचा है।
जानकारी के अनुसार जिला ब्लड बैंक को मार्च 2024 से अबतक विभिन्न संस्थाओं के जरिए 29 शिविर लगाकर 2730 यूनिट रक्त मिला है। जिला अस्पताल और सीएचसी पीएचसी पर अगर किसी को रक्त की आवश्यकता है तो वह निशुल्क ही ब्लड बैंक से रक्त ले सकता है, लेकिन उसे डोनर देना पड़ेगा। वहीं अगर मरीज किसी प्राइवेट अस्पताल में भर्ती है तो उसे 1100 रुपये शुल्क के साथ ही डोनर देना होता है उसके बाद रक्त मिल जाता है। सूत्राें की मानें तो जिला ब्लड बैंक से एक साल में 415 लोगों को बिना डोनर के ही रक्त दे दिया गया है। इसमें करीब 55 प्रतिशत से अधिक निजी अस्पतालों में भर्ती मरीजों को रक्त दिया गया है, वहीं सरकारी अस्पताल 45 प्रतिशत भी आंकड़ा पार नहीं कर पाए हैं। शासनादेश के अनुसार अगर सरकारी अस्पताल में मरीज भर्ती तो उसको प्राथमिकता देनी चाहिए। लेकिन यहां पर इससे उलट ही चल रहा है।
बताया जा रहा है कि कर्मचारियों की मिली भगत से बिना डोनर के ही रक्त दे दिया जाता है। इसमें कर्मचारी ही रक्त कैसे लेना है उसका उपाय बताते हैं। किसी अधिकारी व राजनीति दल से फोन कराने को कहते हैं। इसके बाद से बिना डोनर के रक्त मिल जाता है और इसमें कर्मचारियों का भी लाभ हो जाता है। हालांकि अब रक्त लेने और देने का सारा रिकाॅर्ड ऑनलाइन कंप्यूटर में दर्ज हो जाता है।
विज्ञापन
शहर के रहने वाले अब्दुल्लाह का कहना है कि दो माह पहले उन्हें रक्त की आवश्यकता थी डोनर नहीं था। एक अधिकारी से फोन कराया गया तो फीस जमा होने के बाद बिना डोनर के रक्त दे दिया गया।
विज्ञापन
जानकारी के अनुसार जिला ब्लड बैंक को मार्च 2024 से अबतक विभिन्न संस्थाओं के जरिए 29 शिविर लगाकर 2730 यूनिट रक्त मिला है। जिला अस्पताल और सीएचसी पीएचसी पर अगर किसी को रक्त की आवश्यकता है तो वह निशुल्क ही ब्लड बैंक से रक्त ले सकता है, लेकिन उसे डोनर देना पड़ेगा। वहीं अगर मरीज किसी प्राइवेट अस्पताल में भर्ती है तो उसे 1100 रुपये शुल्क के साथ ही डोनर देना होता है उसके बाद रक्त मिल जाता है। सूत्राें की मानें तो जिला ब्लड बैंक से एक साल में 415 लोगों को बिना डोनर के ही रक्त दे दिया गया है। इसमें करीब 55 प्रतिशत से अधिक निजी अस्पतालों में भर्ती मरीजों को रक्त दिया गया है, वहीं सरकारी अस्पताल 45 प्रतिशत भी आंकड़ा पार नहीं कर पाए हैं। शासनादेश के अनुसार अगर सरकारी अस्पताल में मरीज भर्ती तो उसको प्राथमिकता देनी चाहिए। लेकिन यहां पर इससे उलट ही चल रहा है।
विज्ञापन
बताया जा रहा है कि कर्मचारियों की मिली भगत से बिना डोनर के ही रक्त दे दिया जाता है। इसमें कर्मचारी ही रक्त कैसे लेना है उसका उपाय बताते हैं। किसी अधिकारी व राजनीति दल से फोन कराने को कहते हैं। इसके बाद से बिना डोनर के रक्त मिल जाता है और इसमें कर्मचारियों का भी लाभ हो जाता है। हालांकि अब रक्त लेने और देने का सारा रिकाॅर्ड ऑनलाइन कंप्यूटर में दर्ज हो जाता है।
विज्ञापन
शहर के रहने वाले अब्दुल्लाह का कहना है कि दो माह पहले उन्हें रक्त की आवश्यकता थी डोनर नहीं था। एक अधिकारी से फोन कराया गया तो फीस जमा होने के बाद बिना डोनर के रक्त दे दिया गया।