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मगहर महोत्सव--2
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‘जब से उर्दू से मोहब्बत हो गई, मेरी हिंदी और अच्छी हो गई’
मगहर महोत्सव में हुआ कवि सम्मेलन और मुशायरा
कड़ाके की ठंड में देर रात जुटे रहे साहित्यप्रेमी
फोटो
अमर उजाला ब्यूरो
मगहर। मगहर महोत्सव की पहली रात शनिवार को अखिल भारतीय कवि सम्मेलन व मुशायरे की महफिल सजी थी। कवि व शायरों ने अपने अंदाज से सभी गुदगुदाया तो गंभीर बातें कहकर लोगों को चिंतन पर विवश कर दिया। कड़ाके की ठंड में भी देर रात तक लोग कवियों व शायरों की हौसला आफजाई करते रहे।
पहले कवि व शायरों को स्मृति चिह्न और अंग वस्त्र देकर स्वागत किया गया। शायर काबिश रूदौलवी ने तेरी कुदरत बेमिसाल अल्लाहो, सबमें तेरा ही जमाल अल्लाहो कलाम पढ़ा। काशी से आईं कवयित्री पूनम श्रीवास्तव ने ‘पग तल बसा ले जननी’ सुनाकर मां सरस्वती की आराधना की। अबरार गोरखपुरी ने ‘जमुना की तरंग मेरी गंगा की लहर मेरी’ सुनाया। संचालन कर रहे हरिनारायण हरीश ने हिंदी-उर्दू जुगलबंदी की वकालत करते हुए पढ़ा ‘जब से उर्दू से मोहब्बत हो गई, मेरी हिंदी और अच्छी हो गई’। कवयित्री शिखा श्रीवास्तव ने ‘यादों की गुलिस्तां में चाहत की हवा रखना, मिलने की उम्मीदों में मौसम को हरा रखना’ सुनाकर माहौल को रंगीनी दी। पटना से आए कवि शंकर कैमूरी ने संत कबीर को समर्पित कविता ‘हक बात जब भी कोई इंसान बोलता है, उसकी जुबां पर गोया कुरान बोलता है’ सुनाया तो पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। शायरा चांदनी शबनम ने ‘रस्मो रिवाजों की जंजीर तोड़ के आ गई, ले मैं तेरे वास्ते सब कुछ छोड़ के आ गई’ सुनाया। शायर काविश रूदौलवी की रचना ‘ये चुंदरी तेरी सलमा सितारों वाली और जिस्म मेरा निचोड़ कर देखो, हिंदी की रोटी उर्दू का पानी है’ पर भी खूब वाहवाही लूटी। कवयित्री पूनम श्रीवास्तव ने ‘अनमोल शहर की मैं अनमोल निशानी हूं, सुबह-ए-बनारस हूं, गंगा की रवानी हूं’ सुनाकर वाहवाही लूटी। शायर अम्बर बस्तवी ने मुझसे जो भी खुशी से मिलता है, दिल मेरा भी उसी से मिलता है सुनाया। भोजपुरी कवि डॉ. कमलेश राय ने ‘उ धरती क धूर भारत बेटा हउवे मजूर के’ सुनाकर आम आदमी के दर्द को बयां किया। शायरा शाइस्ता सना ने ‘कभी खुशबू समझती हूं कभी संदल समझती हूं, मैं अपने आंसू को गंगाजल समझती हूं’ सुनाया। अध्यक्षता कर रहे मशहूर शायर कुंवर जावेद ने ‘दिवालियों पे वो ईदों पर क्यों नहीं लिखते, सभी की सोई हुई उम्मीदों पे क्यों नहीं लिखते, किताब लिखने का ही शौक है तो नेताओं, मेरे वतन के शहीदों पर क्यों नहीं लिखते’ सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। रात में तीन बजे तक चले इस कार्यक्रम में कवयित्री संज्ञा तिवारी, शायर महमूद खान, कवि पवन श्रीवास्तव, शायर असद निजामी, सारिक खलीलाबाद, ताराचंद तन्हा आदि ने भी रचनाएं पढ़ीं।
इस मौके पर सीडीओ हाकिम सिंह, सीओ सदर रमेश कुमार, एसओ धनघटा करुणाकर पांडेय, प्रभारी कोतवाल मनोज कुमार, एसआई धर्मेंद्र तिवारी, चौकी इंचार्ज शर्मा सिंह यादव, वेदप्रकाश चौबे, नासिर अली खान, सैय्यद शमीम, अवधेश सिंह, जिया अंसारी, बब्बू सिंह, मेराज खान आदी लोग मौजूद रहे।
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वाणी से बदलेगा हृदय, तभी होगा परिवर्तन
मगहर महोत्सव में आए प्रमुख कवि व शायर से बातचीत पर आधारित
आफताब आलम
मगहर। समाज में परिवर्तन हमेशा साहित्य के जरिए ही हुआ है। शब्दों के चमत्कार से ही लोगों का हृदय बदलता है। ऐसा परिवर्तन ही स्थाई होता है। चौदहवीं शताब्दी में छाए धार्मिक अंधकार को संत कबीर ने अपनी वाणी के जरिए ही दूर करने का प्रयास किया था। पांच सौ वर्ष बाद भी उनके शब्द उतने ही प्रासंगिक हैं।
ये बातें मगहर महोत्सव की सांस्कृतिक संध्या में शिरकत करने आए हरिनरायन हरीश ने कहीं। गाजीपुर के रहने वाले कवि हरीश ने आठवीं कक्षा में पढ़ाई के दौरान ही कविताएं लिखनी शुरू कर दी थी। राष्ट्रीय स्तर के अनगिनत मंचों पर कविता पढ़ चुके हरीश वर्तमान परिवेश से चिंतित नजर आए। उनका कहना था कि साहित्य मर रहा है। कवि सम्मेलनों व मुशायरों में गंभीरता का अभाव है। थोड़ी सी साख पूर्वांचल में ही बची है। मशहूर शायरा शाइस्ता सना भी कविता व शायरी के गिरते स्तर से चिंतित नजर आईं। बरेली जिले के बहेड़ी कस्बे की रहने वालीं शाइस्ता को बचपन से ही शायरी का शौक था। वर्ष-1998 से वे शायरी के मंच पर अपनी दमदार मौजूदगी जता रही हैं। मुशायरे की अहमियत घटने के सवाल पर उनका कहना था कि न पहले जैसे श्रोता रहे न ही मुशायरा कराने वाले लोग। भारत से बेहतर श्रोता अब विदेशों में रह रही भारतीय हैं।
हेल्दी बेबी शो में अंश चैंपियन, शशांक को दूसरा व श्रेयांश को तीसरा पुरस्कार
मगहर महोत्सव के दूसरे दिन स्वास्थ्य विभाग की गोष्ठी का आयोजन
फोटो
अमर उजाला ब्यूरो
मगहर। महोत्सव के दूसरे दिन स्वास्थ्य विभाग की तरफ से जागरूकता गोष्ठी एवं हेल्दी बेबी शो का आयोजन किया गया। दूर-दूर से आए लोगों को पोलियो उन्मूलन, कुष्ठ उन्मूलन, रुबेला टीकाकरण व आयुष्मान भारत समेत कई अन्य योजनाओं की जानकारी दी गई।
नगर पंचायत की चेयरमैन संगीता वर्मा ने कहा कि स्वस्थ जीवन ही सुखी जीवन का आधार है। सरकार लोगों के अच्छे स्वास्थ्य के लिए कोशिश कर रही है। गर्भावस्था से लेकर प्रसव तक महिलाओं की देखभाल के लिए योजना के अलावा जन्म से लेकर बुजुर्ग तक देखभाल के लिए भी योजनाएं हैं। लोग सरकारी अस्पतालों से योजनाओं का लाभ लें। क्षय रोग अधिकारी डॉ. एसडी ओझा, सीएचसी खलीलाबाद के अधीक्षक डॉ. वीपी पांडेय, डॉ. आलोक सिन्हा ने विभिन्न योजनाओं के बारे में विस्तार से बताया। इसके बाद हेल्दी बेबी शो में सबसे स्वस्थ बच्चे का चयन किया गया। इसमें मगहर की रेखा का बेटा अंश प्रथम स्थान पर रहा। साधना का बेटा शशांक दूसरे व ललिता का बेटा श्रेयांश को तीसरा स्थान मिला। तीनों बच्चों को उनके माता-पिता समेत सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर ईओ ज्योतिमा वर्मा, परामर्शदाता मुमताज खातून, वेदप्रकाश चौबे, नुरूज्जमा अंसारी, जिया अंसारी, अवधेश सिंह आदि मौजूद रहे।
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मगहर महोत्सव में हुआ कवि सम्मेलन और मुशायरा
कड़ाके की ठंड में देर रात जुटे रहे साहित्यप्रेमी
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अमर उजाला ब्यूरो
मगहर। मगहर महोत्सव की पहली रात शनिवार को अखिल भारतीय कवि सम्मेलन व मुशायरे की महफिल सजी थी। कवि व शायरों ने अपने अंदाज से सभी गुदगुदाया तो गंभीर बातें कहकर लोगों को चिंतन पर विवश कर दिया। कड़ाके की ठंड में भी देर रात तक लोग कवियों व शायरों की हौसला आफजाई करते रहे।
पहले कवि व शायरों को स्मृति चिह्न और अंग वस्त्र देकर स्वागत किया गया। शायर काबिश रूदौलवी ने तेरी कुदरत बेमिसाल अल्लाहो, सबमें तेरा ही जमाल अल्लाहो कलाम पढ़ा। काशी से आईं कवयित्री पूनम श्रीवास्तव ने ‘पग तल बसा ले जननी’ सुनाकर मां सरस्वती की आराधना की। अबरार गोरखपुरी ने ‘जमुना की तरंग मेरी गंगा की लहर मेरी’ सुनाया। संचालन कर रहे हरिनारायण हरीश ने हिंदी-उर्दू जुगलबंदी की वकालत करते हुए पढ़ा ‘जब से उर्दू से मोहब्बत हो गई, मेरी हिंदी और अच्छी हो गई’। कवयित्री शिखा श्रीवास्तव ने ‘यादों की गुलिस्तां में चाहत की हवा रखना, मिलने की उम्मीदों में मौसम को हरा रखना’ सुनाकर माहौल को रंगीनी दी। पटना से आए कवि शंकर कैमूरी ने संत कबीर को समर्पित कविता ‘हक बात जब भी कोई इंसान बोलता है, उसकी जुबां पर गोया कुरान बोलता है’ सुनाया तो पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। शायरा चांदनी शबनम ने ‘रस्मो रिवाजों की जंजीर तोड़ के आ गई, ले मैं तेरे वास्ते सब कुछ छोड़ के आ गई’ सुनाया। शायर काविश रूदौलवी की रचना ‘ये चुंदरी तेरी सलमा सितारों वाली और जिस्म मेरा निचोड़ कर देखो, हिंदी की रोटी उर्दू का पानी है’ पर भी खूब वाहवाही लूटी। कवयित्री पूनम श्रीवास्तव ने ‘अनमोल शहर की मैं अनमोल निशानी हूं, सुबह-ए-बनारस हूं, गंगा की रवानी हूं’ सुनाकर वाहवाही लूटी। शायर अम्बर बस्तवी ने मुझसे जो भी खुशी से मिलता है, दिल मेरा भी उसी से मिलता है सुनाया। भोजपुरी कवि डॉ. कमलेश राय ने ‘उ धरती क धूर भारत बेटा हउवे मजूर के’ सुनाकर आम आदमी के दर्द को बयां किया। शायरा शाइस्ता सना ने ‘कभी खुशबू समझती हूं कभी संदल समझती हूं, मैं अपने आंसू को गंगाजल समझती हूं’ सुनाया। अध्यक्षता कर रहे मशहूर शायर कुंवर जावेद ने ‘दिवालियों पे वो ईदों पर क्यों नहीं लिखते, सभी की सोई हुई उम्मीदों पे क्यों नहीं लिखते, किताब लिखने का ही शौक है तो नेताओं, मेरे वतन के शहीदों पर क्यों नहीं लिखते’ सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। रात में तीन बजे तक चले इस कार्यक्रम में कवयित्री संज्ञा तिवारी, शायर महमूद खान, कवि पवन श्रीवास्तव, शायर असद निजामी, सारिक खलीलाबाद, ताराचंद तन्हा आदि ने भी रचनाएं पढ़ीं।
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इस मौके पर सीडीओ हाकिम सिंह, सीओ सदर रमेश कुमार, एसओ धनघटा करुणाकर पांडेय, प्रभारी कोतवाल मनोज कुमार, एसआई धर्मेंद्र तिवारी, चौकी इंचार्ज शर्मा सिंह यादव, वेदप्रकाश चौबे, नासिर अली खान, सैय्यद शमीम, अवधेश सिंह, जिया अंसारी, बब्बू सिंह, मेराज खान आदी लोग मौजूद रहे।
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वाणी से बदलेगा हृदय, तभी होगा परिवर्तन
मगहर महोत्सव में आए प्रमुख कवि व शायर से बातचीत पर आधारित
आफताब आलम
मगहर। समाज में परिवर्तन हमेशा साहित्य के जरिए ही हुआ है। शब्दों के चमत्कार से ही लोगों का हृदय बदलता है। ऐसा परिवर्तन ही स्थाई होता है। चौदहवीं शताब्दी में छाए धार्मिक अंधकार को संत कबीर ने अपनी वाणी के जरिए ही दूर करने का प्रयास किया था। पांच सौ वर्ष बाद भी उनके शब्द उतने ही प्रासंगिक हैं।
ये बातें मगहर महोत्सव की सांस्कृतिक संध्या में शिरकत करने आए हरिनरायन हरीश ने कहीं। गाजीपुर के रहने वाले कवि हरीश ने आठवीं कक्षा में पढ़ाई के दौरान ही कविताएं लिखनी शुरू कर दी थी। राष्ट्रीय स्तर के अनगिनत मंचों पर कविता पढ़ चुके हरीश वर्तमान परिवेश से चिंतित नजर आए। उनका कहना था कि साहित्य मर रहा है। कवि सम्मेलनों व मुशायरों में गंभीरता का अभाव है। थोड़ी सी साख पूर्वांचल में ही बची है। मशहूर शायरा शाइस्ता सना भी कविता व शायरी के गिरते स्तर से चिंतित नजर आईं। बरेली जिले के बहेड़ी कस्बे की रहने वालीं शाइस्ता को बचपन से ही शायरी का शौक था। वर्ष-1998 से वे शायरी के मंच पर अपनी दमदार मौजूदगी जता रही हैं। मुशायरे की अहमियत घटने के सवाल पर उनका कहना था कि न पहले जैसे श्रोता रहे न ही मुशायरा कराने वाले लोग। भारत से बेहतर श्रोता अब विदेशों में रह रही भारतीय हैं।
हेल्दी बेबी शो में अंश चैंपियन, शशांक को दूसरा व श्रेयांश को तीसरा पुरस्कार
मगहर महोत्सव के दूसरे दिन स्वास्थ्य विभाग की गोष्ठी का आयोजन
फोटो
अमर उजाला ब्यूरो
मगहर। महोत्सव के दूसरे दिन स्वास्थ्य विभाग की तरफ से जागरूकता गोष्ठी एवं हेल्दी बेबी शो का आयोजन किया गया। दूर-दूर से आए लोगों को पोलियो उन्मूलन, कुष्ठ उन्मूलन, रुबेला टीकाकरण व आयुष्मान भारत समेत कई अन्य योजनाओं की जानकारी दी गई।
नगर पंचायत की चेयरमैन संगीता वर्मा ने कहा कि स्वस्थ जीवन ही सुखी जीवन का आधार है। सरकार लोगों के अच्छे स्वास्थ्य के लिए कोशिश कर रही है। गर्भावस्था से लेकर प्रसव तक महिलाओं की देखभाल के लिए योजना के अलावा जन्म से लेकर बुजुर्ग तक देखभाल के लिए भी योजनाएं हैं। लोग सरकारी अस्पतालों से योजनाओं का लाभ लें। क्षय रोग अधिकारी डॉ. एसडी ओझा, सीएचसी खलीलाबाद के अधीक्षक डॉ. वीपी पांडेय, डॉ. आलोक सिन्हा ने विभिन्न योजनाओं के बारे में विस्तार से बताया। इसके बाद हेल्दी बेबी शो में सबसे स्वस्थ बच्चे का चयन किया गया। इसमें मगहर की रेखा का बेटा अंश प्रथम स्थान पर रहा। साधना का बेटा शशांक दूसरे व ललिता का बेटा श्रेयांश को तीसरा स्थान मिला। तीनों बच्चों को उनके माता-पिता समेत सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर ईओ ज्योतिमा वर्मा, परामर्शदाता मुमताज खातून, वेदप्रकाश चौबे, नुरूज्जमा अंसारी, जिया अंसारी, अवधेश सिंह आदि मौजूद रहे।