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प्रत्याशी को सजा
Updated Wed, 05 Dec 2018 11:58 PM IST
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झूठा शपथ पत्र लगाने पर प्रत्याशी को चार साल की जेल
वर्ष-2010 में पकड़ी आराजी से लड़ा था प्रधान पद का चुनाव
अमर उजाला ब्यूरो
संतकबीरनगर। दुधारा थाना क्षेत्र के पकड़ी अराजी के रहने वाले व वर्ष-2010 में प्रधान पद के प्रत्याशी रहे तुफैल अहमद को चुुुनाव के दौरान झूठा शपथ पत्र लगाने के मामले में बुधवार को सीजेएम दीपकांत मणि ने चार साल की सजा सुनाई है। इसके साथ ही एक हजार का जुर्माना लगाया है। जुर्माना न अदा करने पर छह माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
पकड़ी आराजी गांव के हफीज अहमद का आरोप है कि 2010 में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में तुफैल अहमद प्रधान पद के प्रत्याशी थे। तुफैल अहमद को पूर्व में अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या सात बस्ती के न्यायालय से 10 वर्ष का कारावास और जुुुर्माना हुआ था। इस बात को 2010 के चुनाव के शपथ पत्र में तुुफैल अहमद ने जान बूझकर छुपा लिया। प्रधान पद के प्रत्याशी हफीज अहमद ने सूचना अधिकार कानून के तहत सारी जानकारी इकट्ठा कर मामले में थाने पर केस लिखे जाने के लिए प्रार्थना पत्र दिया। वहंा से कार्रवाई न होने पर एसपी को सूचना दी। इसके बाद भी कार्रवाई न होने पर न्यायालय में प्रार्थना पत्र दिया। न्यायालय से मुकदमा पंजीकृत होने के बाद मामला में विवेचक की ओर से आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया। सुनवाई के सीजेएम ने सजा सुनाई।
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वर्ष-2010 में पकड़ी आराजी से लड़ा था प्रधान पद का चुनाव
अमर उजाला ब्यूरो
संतकबीरनगर। दुधारा थाना क्षेत्र के पकड़ी अराजी के रहने वाले व वर्ष-2010 में प्रधान पद के प्रत्याशी रहे तुफैल अहमद को चुुुनाव के दौरान झूठा शपथ पत्र लगाने के मामले में बुधवार को सीजेएम दीपकांत मणि ने चार साल की सजा सुनाई है। इसके साथ ही एक हजार का जुर्माना लगाया है। जुर्माना न अदा करने पर छह माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
पकड़ी आराजी गांव के हफीज अहमद का आरोप है कि 2010 में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में तुफैल अहमद प्रधान पद के प्रत्याशी थे। तुफैल अहमद को पूर्व में अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या सात बस्ती के न्यायालय से 10 वर्ष का कारावास और जुुुर्माना हुआ था। इस बात को 2010 के चुनाव के शपथ पत्र में तुुफैल अहमद ने जान बूझकर छुपा लिया। प्रधान पद के प्रत्याशी हफीज अहमद ने सूचना अधिकार कानून के तहत सारी जानकारी इकट्ठा कर मामले में थाने पर केस लिखे जाने के लिए प्रार्थना पत्र दिया। वहंा से कार्रवाई न होने पर एसपी को सूचना दी। इसके बाद भी कार्रवाई न होने पर न्यायालय में प्रार्थना पत्र दिया। न्यायालय से मुकदमा पंजीकृत होने के बाद मामला में विवेचक की ओर से आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया। सुनवाई के सीजेएम ने सजा सुनाई।
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