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शासन ने पौधरोपण अभियान की जियो टैगिंग का दिया है निर्देश
Fri, 31 May 2019 12:00 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
Santkabir Nagar
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Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 31 May 2019 12:00 AM IST
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plant
- फोटो : plant
संतकबीरनगर। जिले में पिछले वर्ष जुलाई-अगस्त महीने में 8.85 लाख (वन विभाग द्वारा 2.92 और अन्य विभागाें द्वारा 5.93 लाख) पौधे लगाए गए थे। सरकारी विभागों ने इसके लिए खूब वाहवाही लूटी। यही वाहवाही अब मुसीबत का सबब बन गई है। कारण कि इन पौधों की जियो टैगिंग (फोटो खींचकर मोबाइल ऐप पर लोड करना) का निर्देश शासन ने दिया है। अक्तूबर 2018 से शुरू हुआ जियो टैगिंग के कार्य को वन विभाग ने तो पूरा कर दिया। वहीं अन्य विभाग इससे कतराते रहे। हाल ही में वीडियो काफ्रेंसिंग में संबंधित विभाग के प्रमुख सचिव ने इसकी जानकारी मांगी तो पता चला कि वन विभाग ने तो अपने द्वारा लगाए गए 2.92 लाख की जियो टैगिंग कर दी। वहीं अन्य विभाग दस फीसदी ही कार्य अब तक कर सके हैं। इस कार्य को पूरा करने के लिए डीएम ने दस दिन का वक्त दिया है। ऐसे में अब पौधरोपण कराने वाले विभिन्न विभागों को 10 जून से पूर्व जियो टैगिंग के कार्य को पूरा कर लेना है।दरअसल, सरकार इस वर्ष पौधरोपण शुरू कराने से पूर्व पिछले वर्ष लगाए गए पौधों की वास्तविक स्थिति जानना चाह रही है। जिससे आगे की कार्य योजना तैयार की जा सके। इसके लिए अक्तूबर से जियो टैगिंग शुरू हुई।
दिक्कत यह भी ः जियो टैगिंग करने में सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि अधिकांश जगह पौधे या तो सूख गए या कागज में ही लगाए गए थे। अब उनकी जियो टैगिंग कैसे करें। वन विभाग द्वारा तैयार एप पर फोटो खींचते ही स्वत: लोेकेशन फीड हो जाएगी। इससे दूसरा व्यक्ति इसकी फोटो नहीं खींच सके गा। यही नहीं इसका विवरण भी देना है। जियो टैगिंग में सबसे अधिक दिक्कत शिक्षा विभाग को है। क्योंकि ग्रामीण क्षेत्र में बिना किसी सुरक्षा के स्कूल परिसर में लगाए गए अधिकांश पौधे नष्ट हो चुके हैं। अब जब पौधे ही नहीं बचे हैं तो उनकी फोटो कैसे खींचकर मोबाइल ऐप पर अपलोड हो यह बड़ी समस्या है।
हर हाल में होनी है जियो टैगिंग
डीएफओ वी रंगाराजू का कहना है कि जियो टैगिंग के जरिए शासन इस बात की तस्दीक करेगा कि कितने पौधे वास्तव में लगाए गए हैं। जो लगे हैं उनमें से वर्तमान में कितने पौधे सुरक्षित हैं। इस साल भी अभियान चलना है, पिछले साल के पौधों की जियो टैगिंग होने से इस साल लगाए जाने वाले पौधों की सुरक्षा व देखभाल के लिए रणनीति बनाने में सहूलियत होगी।
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दिक्कत यह भी ः जियो टैगिंग करने में सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि अधिकांश जगह पौधे या तो सूख गए या कागज में ही लगाए गए थे। अब उनकी जियो टैगिंग कैसे करें। वन विभाग द्वारा तैयार एप पर फोटो खींचते ही स्वत: लोेकेशन फीड हो जाएगी। इससे दूसरा व्यक्ति इसकी फोटो नहीं खींच सके गा। यही नहीं इसका विवरण भी देना है। जियो टैगिंग में सबसे अधिक दिक्कत शिक्षा विभाग को है। क्योंकि ग्रामीण क्षेत्र में बिना किसी सुरक्षा के स्कूल परिसर में लगाए गए अधिकांश पौधे नष्ट हो चुके हैं। अब जब पौधे ही नहीं बचे हैं तो उनकी फोटो कैसे खींचकर मोबाइल ऐप पर अपलोड हो यह बड़ी समस्या है।
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हर हाल में होनी है जियो टैगिंग
डीएफओ वी रंगाराजू का कहना है कि जियो टैगिंग के जरिए शासन इस बात की तस्दीक करेगा कि कितने पौधे वास्तव में लगाए गए हैं। जो लगे हैं उनमें से वर्तमान में कितने पौधे सुरक्षित हैं। इस साल भी अभियान चलना है, पिछले साल के पौधों की जियो टैगिंग होने से इस साल लगाए जाने वाले पौधों की सुरक्षा व देखभाल के लिए रणनीति बनाने में सहूलियत होगी।
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