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ांसद-विधायक के बीच हुई मारपीट का मामला
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अब टिकट के नए दावेदारों को लेकर शुरू हुई चर्चा
टिकट की आस लगाए नेताओं को दिखने लगी नई संभावना
विरोधी दल के नेता भी रखे हुए हैं हालात पर नजर
अमर उजाला ब्यूरो
संतकबीनगर। चुनाव से ठीक पहले सांसद और विधायक के बीच हुई मारपीट ने चुनाव लड़ने की आस लगाए भाजपा नेताओं को उम्मीद की नई किरण दिख रही है। वे मानकर चल रहे हैं कि संगठन छवि बचाने के लिए सख्त निर्णय लेगा। ऐसी परिस्थिति में नए दावेदारों को मौका मिल सकता है। वहीं विरोधी दलों के नेता भी भाजपा नेतृत्व के निर्णय की प्रतीक्षा में हैं। इस विवाद के चलते हो रही किरकिरी से भाजपा कार्यकर्ता आहत नजर आ रहे हैं।
जिले में भाजपा ने अपनी चुनावी तैयारी नवंबर से ही शुरू कर दी थी। उप मुख्यमंत्री केशव मौर्या की मौजूदगी में पांचों विधानसभा क्षेत्रों के पदाधिकारियों की बैठक में चुनाव के टिप्स दिए गए थे। इसके बाद से लगातार कार्यक्रम चल रहे थे। फरवरी में सभी बूथों पर कमलदीप जलाकर पार्टी के लिए वोट देने की अपील की गई थी। योजनाओं के लाभार्थियों के घर जाकर भी प्रचार किया गया, लेकिन छह मार्च को जिला योजना समिति की बैठक में हुई मारपीट के चलते अचानक सब कुछ रुक गया। सांसद और विधायक का प्रकरण अब वरिष्ठ नेताओं के बीच है। इस मामले में संगठन चाहे जो निर्णय ले, लेकिन राजनीति से जुड़े लोग यह मानकर चल रहे हैं कि चुनाव में इसका असर जरूर पड़ेगा। टिकट की आस लगाए कई नेता तो बदलाव की उम्मीद में अपना पक्ष मजबूत बनाने में भी जुट गए हैं। वहीं विपक्षी दलों के नेता भी इस प्रकरण में होने वाली कार्रवाई पर नजर गड़ाए हुए हैं। उन्हें चुनाव प्रचार के दौरान इस मुद्दे पर भाजपा को घेरने का अवसर मिलने की पूरी उम्मीद है। इन सबके बीच भाजपा की हो रही किरकिरी से पदाधिकारी ही नहीं कार्यकर्ता भी आहत हैं। घटना के बाद से ही भाजपा के नेता चौराहों पर कम ही नजर आ रहे हैं। पार्टी के कार्यक्रमों में अगली कतार में दिखने वाले कार्यकर्ता भी शांत बैठे हैं।
अब भी सर्वाधिक चर्चा में है प्रकरण
संतकबीरनगर। सांसद-विधायक के बीच हुई घटना अभी भी सबसे अधिक चर्चा का विषय है। सरकारी दफ्तर हों या चाय की दुकान, हर जगह केवल उसी प्रकरण पर बात चल रही है। सोशल मीडिया पर भी सबसे अधिक चुटकुले इसी मुद्दे पर भेजे जा रहे हैं।
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टिकट की आस लगाए नेताओं को दिखने लगी नई संभावना
विरोधी दल के नेता भी रखे हुए हैं हालात पर नजर
अमर उजाला ब्यूरो
संतकबीनगर। चुनाव से ठीक पहले सांसद और विधायक के बीच हुई मारपीट ने चुनाव लड़ने की आस लगाए भाजपा नेताओं को उम्मीद की नई किरण दिख रही है। वे मानकर चल रहे हैं कि संगठन छवि बचाने के लिए सख्त निर्णय लेगा। ऐसी परिस्थिति में नए दावेदारों को मौका मिल सकता है। वहीं विरोधी दलों के नेता भी भाजपा नेतृत्व के निर्णय की प्रतीक्षा में हैं। इस विवाद के चलते हो रही किरकिरी से भाजपा कार्यकर्ता आहत नजर आ रहे हैं।
जिले में भाजपा ने अपनी चुनावी तैयारी नवंबर से ही शुरू कर दी थी। उप मुख्यमंत्री केशव मौर्या की मौजूदगी में पांचों विधानसभा क्षेत्रों के पदाधिकारियों की बैठक में चुनाव के टिप्स दिए गए थे। इसके बाद से लगातार कार्यक्रम चल रहे थे। फरवरी में सभी बूथों पर कमलदीप जलाकर पार्टी के लिए वोट देने की अपील की गई थी। योजनाओं के लाभार्थियों के घर जाकर भी प्रचार किया गया, लेकिन छह मार्च को जिला योजना समिति की बैठक में हुई मारपीट के चलते अचानक सब कुछ रुक गया। सांसद और विधायक का प्रकरण अब वरिष्ठ नेताओं के बीच है। इस मामले में संगठन चाहे जो निर्णय ले, लेकिन राजनीति से जुड़े लोग यह मानकर चल रहे हैं कि चुनाव में इसका असर जरूर पड़ेगा। टिकट की आस लगाए कई नेता तो बदलाव की उम्मीद में अपना पक्ष मजबूत बनाने में भी जुट गए हैं। वहीं विपक्षी दलों के नेता भी इस प्रकरण में होने वाली कार्रवाई पर नजर गड़ाए हुए हैं। उन्हें चुनाव प्रचार के दौरान इस मुद्दे पर भाजपा को घेरने का अवसर मिलने की पूरी उम्मीद है। इन सबके बीच भाजपा की हो रही किरकिरी से पदाधिकारी ही नहीं कार्यकर्ता भी आहत हैं। घटना के बाद से ही भाजपा के नेता चौराहों पर कम ही नजर आ रहे हैं। पार्टी के कार्यक्रमों में अगली कतार में दिखने वाले कार्यकर्ता भी शांत बैठे हैं।
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अब भी सर्वाधिक चर्चा में है प्रकरण
संतकबीरनगर। सांसद-विधायक के बीच हुई घटना अभी भी सबसे अधिक चर्चा का विषय है। सरकारी दफ्तर हों या चाय की दुकान, हर जगह केवल उसी प्रकरण पर बात चल रही है। सोशल मीडिया पर भी सबसे अधिक चुटकुले इसी मुद्दे पर भेजे जा रहे हैं।
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