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जल स्तर बढ़ने लगा

Mon, 13 Aug 2018 11:24 PM IST
Updated Mon, 13 Aug 2018 11:24 PM IST
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जल स्तर बढ़ने लगा
राप्ती का जलस्तर बढ़ने से तटबंध पर खतरा
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किलोमीटर शून्य से तीन के बीच तटबंध की हालत ज्यादा खराब
विशुन बांगर तटबंध से सटकर बह रही नदी
फोटो है
अमर उजाला व्यूरो
मेंहदावल। राप्ती नदी के जलस्तर में फिर से बढ़ोतरी शुरू हो गई है। बीते 24 घंटे में जलस्तर में 20 सेंटीमीटर की वृद्धि दर्ज की गई है। जलस्तर बढ़ने के चलते करमैनी-बेलौली तटबंध पर दबाव बढ़ गया है। नदी विशुनपुर बांगर में तटबंध से सटकर बह रही है। यहां बैकरोलिंग भी हो रहा है, जिससे बांध को नुकसान पहुंचने का खतरा है।
मेंहदावल क्षेत्र में राप्ती का जलस्तर चौथी बार बढ़ा है। जुलाई महीने के दूसरे पखवारे में ही नदी का जलस्तर बढ़ने लगा था। पांच दिन पूर्व नदी का जलस्तर 78.60 मीटर पर था। शुक्रवार को पानी घटने लगा। रविवार को यह 77.95 मीटर तक आ गया था। लेकिन सोमवार को फिर जलस्तर में वृद्धि दर्ज की गई। सोमवार की सुबह आठ बजे जलस्तर 78.15 मीटर पर पहुंच गया था। शाम चार बजे 78.22 मीटर दर्ज किया गया। नदी विशुनपुर बांगर गांव के सामने करमैनी-बेलौली तटबंध से सटकर बह रही है। यहां बैकरोलिंग भी हो रहा है। ड्रेनेज खंड के अफसर तटबंध की निगरानी कर रहे हैं। ड्रेनेज खंड के सहायक अभियंता प्रेमलाल कहना है कि जलस्तर में चौथी बार वृद्धि दर्ज की गई है। हालांकि करमैनी-बेलौली तटबंध पर पानी का दबाव है लेकिन बांध पूरी तरह सुरक्षित है। एहतियात के तौर पर बांध की निगरानी कराई जा रही है।
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रास्ते पर बह रहा है पानी, फसलें जलमग्न
पशुओं के चारे का संकट गहराया, बच्चों की पढ़ाई हो रही प्रभावित
फोटो है
अमर उजाला ब्यूरो
धनघटा/हैंसर।
घाघरा नदी के पानी से क्षेत्र के आठ गांव चारों तरफ से घिरे हुए हैं। रास्तों पर पानी बह रहा है और फसलें जलमग्न हो गई हैं। एक सप्ताह से पानी जमा होने के कारण संक्रामक बीमारियां फैलने की आशंका है, पशुओं के चारे का संकट है। बच्चे जान जोखिम में डालकर स्कूल जा रहे हैं। गंभीर रूप से बीमार लोगों को दवाई नहीं मिल पा रही है, लेकिन प्रशासन इन आठ गांवों के लोगों को अभी तक बाढ़ पीड़ित नहीं मान रहा है। घाघरा के जलस्तर में हुई बढ़ोतरी के चलते धनघटा क्षेत्र के आठ गांव भौवापार, गुनवतिया, चकदहा, सरैया, दौलतपुर, ढोलबजा, गायघाट, सुअरहा आदि के चारों तरफ पानी जमा है। कंचनपुर- तिघरा मार्ग पर बह रहा है, जिससे जगह-जगह रास्ता क्षतिग्रस्त हो गया है। नदी का जलस्तर पहले से कम जरूर हुआ है लेकिन लोगों की मुश्किलें जस की तस हैं। गायघाट गांव की लालमती का कहना है कि एक सप्ताह से गांव के चारों तरफ पानी जमा होने से बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। घर में खाने-पीने का सामान खत्म होने के कगार पर है। रास्ते पर पानी बह रहा है लेकिन प्रशासन की तरफ से अब तक कोई मदद उपलब्ध नहीं कराई गई है। भौवापार निवासी राममूरत का कहना है कि बांध और नदी के बीच बसे गांव में जन्म लेना ही किसी अभिशाप से कम नहीं है। घाघरा नदी के पानी से फसलें जलमग्न होकर बर्बाद हो रही हैं। लेकिन प्रशासन इसे मानने को तैयार नहीं है। एसडीएम बाबूराम का कहना है कि नदी का जल स्तर कम हो रहा है। लेखपाल और कानूनगो की ड्यूटी लगी है। जरूरत पड़ने पर प्रशासन लोगों को हर संभव मदद उपलब्ध कराएगा। बाबूलाल कहते हैं कि बच्चों को स्कूल भेजते वक्त डर लग रहा है क्योंकि रास्तों पर पानी बह रहा है और बच्चों को उसी के बीच से होकर जाना पड़ रहा है। पशुओं के लिए चारा नहीं मिल रहा है। दो-चार दिन में इंसानों को भी राशन संकट का सामना करना पड़ेगा। जयप्रकाश का कहना है कि पिछले साल बाढ़ से घिरे गांवों में प्रशासन ने नाव, खाद्यान्न, मिटटी का तेल, माचिस आदि सामान मुहैया कराया था लेकिन इस वर्ष कोई हाल जानने भी नहीं पहुंचा। कई दिन से पानी जमा होने के चलते संक्रामक बीमारी फैलने की आशंका बढ़ गई है।
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