{"_id":"5b4f7d164f1c1b40748b5885","slug":"121531936022-sant-kabir-nagar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"घाघरा निगल गई 600 एकड़ जमीन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
घाघरा निगल गई 600 एकड़ जमीन
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 18 Jul 2018 11:36 PM IST
विज्ञापन
ghaghra river
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हैंसर। घाघरा स्थिर भले है, लेकिन कटान तेजी से हो रही है। नदी की कटान से किसान खेत विहीन होते जा रहे हैं। फसल और चारागाह वाली जमीन को नदी निगलती जा रही है। इससे किसानों की समस्या विकराल होती जा रही है। अब तक नदी 600 एकड़ जमीन को समाहित कर चुकी है।
किसानों का कहना है कि नदी की कटान से धान, अरहर, परवल, तिल, मक्का की फसल तो नदी की धारा मेें समा ही रही है। चारागाह की जमीन भी नदी में समाती जा रही है। इससे भविष्य में उन्हें भोजन की और वर्तमान में पशुओं के सामने चारे का संकट खड़ा हो गया है।
बता दें कि घाघरा नदी करीब 32 किलोमीटर की लंबाई में संतकबीरनगर जिले में बहती है। पश्चिम में बस्ती जिले के सीमा पर नदी रामपुर मकदूमपुर बांध के करीब कटान कर रही है।
विज्ञापन
आगे बढ़ने पर पड़रिया गांव के सीवान से कटान करते हुए पूर्वी सीमा पर गायघाट गांव तक रोजाना कटान करते हुए उत्तर की दिशा में बढ़ती जा रही है। गांव वालों का कहना है कि इस समय नदी की धारा संतकबीरनगर जिले में बह रही है।
दक्षिण में अंबेडकरनगर व आजमगढ़ जिले से नदी बाहर निकल गई है। नदी की धारा उत्तर दिशा में मुड़ने और इधर बालू की खनन से नीची हुई जमीन कटान का रास्ता साफ कर दी है। इसका परिणाम है कि पश्चिम से पूरब तक के छोर तक नदी छह सौ एकड़ से अधिक जमीन निगल चुकी है।
रामप्रीत, रामउजागिर, मनमोहन, जयराम, रामप्रताप, जगदीश, सुरेश आदि किसानों का कहना है कि किसानों ने नदी के छोर पर परवल की खेती की थी। उसे काटकर नदी अब धान, अरहर समेत अन्य फसलों को निगल रही है।
दियारा के हजारों पशु जिस जमीन पर चारा चर कर पेट भरते थे, वह जमीन अब नदी की धारा में समाती जा रही है। किसानों का कहना है कि फसल कटने से भोजन पर असर तो बाद में दिखेगा, लेकिन पशुओं के लिए चारे का संकट मुंह बाए खड़ा हो गया है।
इस समय हो रही कटान को देखकर यही लग रहा है कि इस वर्ष बांध के दक्षिण न तो खेती योग्य भूमि रहेगी और न ही रहने के लिए घर बचेगा। एसडीएम बाबूराम ने कहा कि नदी की कटान पर नजर रखी जा रही है। खतरे की अभी कोई बात नहीं है। जरूरत पड़ने पर लोगों की मदद करने की तैयारी पूर्ण कर ली गई है।
विज्ञापन
किसानों का कहना है कि नदी की कटान से धान, अरहर, परवल, तिल, मक्का की फसल तो नदी की धारा मेें समा ही रही है। चारागाह की जमीन भी नदी में समाती जा रही है। इससे भविष्य में उन्हें भोजन की और वर्तमान में पशुओं के सामने चारे का संकट खड़ा हो गया है।
विज्ञापन
बता दें कि घाघरा नदी करीब 32 किलोमीटर की लंबाई में संतकबीरनगर जिले में बहती है। पश्चिम में बस्ती जिले के सीमा पर नदी रामपुर मकदूमपुर बांध के करीब कटान कर रही है।
विज्ञापन
आगे बढ़ने पर पड़रिया गांव के सीवान से कटान करते हुए पूर्वी सीमा पर गायघाट गांव तक रोजाना कटान करते हुए उत्तर की दिशा में बढ़ती जा रही है। गांव वालों का कहना है कि इस समय नदी की धारा संतकबीरनगर जिले में बह रही है।
दक्षिण में अंबेडकरनगर व आजमगढ़ जिले से नदी बाहर निकल गई है। नदी की धारा उत्तर दिशा में मुड़ने और इधर बालू की खनन से नीची हुई जमीन कटान का रास्ता साफ कर दी है। इसका परिणाम है कि पश्चिम से पूरब तक के छोर तक नदी छह सौ एकड़ से अधिक जमीन निगल चुकी है।
रामप्रीत, रामउजागिर, मनमोहन, जयराम, रामप्रताप, जगदीश, सुरेश आदि किसानों का कहना है कि किसानों ने नदी के छोर पर परवल की खेती की थी। उसे काटकर नदी अब धान, अरहर समेत अन्य फसलों को निगल रही है।
दियारा के हजारों पशु जिस जमीन पर चारा चर कर पेट भरते थे, वह जमीन अब नदी की धारा में समाती जा रही है। किसानों का कहना है कि फसल कटने से भोजन पर असर तो बाद में दिखेगा, लेकिन पशुओं के लिए चारे का संकट मुंह बाए खड़ा हो गया है।
इस समय हो रही कटान को देखकर यही लग रहा है कि इस वर्ष बांध के दक्षिण न तो खेती योग्य भूमि रहेगी और न ही रहने के लिए घर बचेगा। एसडीएम बाबूराम ने कहा कि नदी की कटान पर नजर रखी जा रही है। खतरे की अभी कोई बात नहीं है। जरूरत पड़ने पर लोगों की मदद करने की तैयारी पूर्ण कर ली गई है।