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शांतिपूर्वक 618 मूर्तियां हुई विसर्जित
Santkabirnagar
Updated Sat, 20 Oct 2018 11:02 PM IST
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अमर उजाला
- फोटो : अमर उजाला
संतकबीरनगर। जनपद में स्थापित 618 मूर्तियों का विसर्जन विजयदशमी के दिन शुक्रवार और शनिवार को पूजन के बाद निकटस्थ नदियों के पास बने कृतिम पोखरों में देर रात तक शांतिपूर्ण ढंग से की गई। आयोजक समिति के सदस्यों ने उत्साहपूर्वक जुलूस निकाल कर मूर्तियों का विसर्जन किया। जगह-जगह दशहरे के अवसर पर आयोजित होने वाले मेले में काफी रौनक रही। जिला मुख्यालय पर शुक्रवार की देर शाम तक मूर्तियां नगर परिक्रमा के बाद मगहर के लिए प्रस्थान कीं जिन्हें आमी नदी तट पर बने कृत्रिम पोखरों में विसर्जन किया गया।
मगहर प्रतिनिधि के अनुसार शुक्रवार को आयोजक समिति के सदस्य मूर्तियों के साथ कस्बे का भ्रमण करते हुए देर रात मूर्तियों का विसर्जन शांतिपूर्ण माहौल में किया गया। बघौली प्रतिनिधि के अनुसार क्षेत्र की प्रतिमाओं का विसर्जन आमी नदी के तट पर बालू शासन घाट पर शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। बेलहर प्रतिनिधि के अनुसार क्षेत्र में स्थापित दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन आमी नदी के राजघाट, पड़रिया घाट व गोनहा घाट पर हुआ। बखिरा प्रतिनिधि के अनुसार क्षेत्र में स्थापित करीब डेढ़ दर्जन मूर्तियों का विसर्जन ढोढया स्थित झील के पास बने कृत्रिम पोखरे में हुआ। खलीलाबाद में नगर परिक्रमा के लिए निकली मूर्तियों के मां समय जी, रामजानकी मंदिर, लक्ष्मीनारायण मंदिर द्वारा स्थापित प्रतिमा व उसके पीछे अन्य दुर्गा मंडपों की प्रतिमाएं निकलीं। जिनके पीछे नवयुवकों की टोलियां भक्ति गीतों के धुन पर नृत्य करती हुई देखी गई। अपने दरवाजे से होकर जाने पर श्रद्धालु मूर्तियों के जुलूस के देख रहे थे। मेंहदावल प्रतिनिधि के अनुसार कसबे में नगर परिक्रमा के बाद प्रतिमाओं का शंतिपूण ढंग से राप्ती और बखिरा झील में विसर्जन हुआ। सांथा प्रतिनिधि के अनुसार सांथा, गनवरिया, निघुरी में स्थापित मूर्तियों का विसर्जन झुड़िया नाला पर विसर्जित हुई। धर्मसिंहवा प्रतिनिधि के अनुसार देवी की प्रतिमा छिबरा, गौरीराई, धर्मसिहवा, पुनया, बढय़ा मेंहदूपार की गांव में भ्रमण के बाद बूढ़ी राप्ती में विसर्जित की गई। एसपी आकाश तोमर ने बताया कि जनपद में 645 मूर्तिया स्थापित थी। शांतिपूर्ण माहौल में शुक्रवार को 501 और शनिवार को 117 मूर्तियों का विसर्जन हुआ। शेष मूर्तियों का विसर्जन पूर्णिमा के दिन होगा।
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मगहर प्रतिनिधि के अनुसार शुक्रवार को आयोजक समिति के सदस्य मूर्तियों के साथ कस्बे का भ्रमण करते हुए देर रात मूर्तियों का विसर्जन शांतिपूर्ण माहौल में किया गया। बघौली प्रतिनिधि के अनुसार क्षेत्र की प्रतिमाओं का विसर्जन आमी नदी के तट पर बालू शासन घाट पर शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। बेलहर प्रतिनिधि के अनुसार क्षेत्र में स्थापित दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन आमी नदी के राजघाट, पड़रिया घाट व गोनहा घाट पर हुआ। बखिरा प्रतिनिधि के अनुसार क्षेत्र में स्थापित करीब डेढ़ दर्जन मूर्तियों का विसर्जन ढोढया स्थित झील के पास बने कृत्रिम पोखरे में हुआ। खलीलाबाद में नगर परिक्रमा के लिए निकली मूर्तियों के मां समय जी, रामजानकी मंदिर, लक्ष्मीनारायण मंदिर द्वारा स्थापित प्रतिमा व उसके पीछे अन्य दुर्गा मंडपों की प्रतिमाएं निकलीं। जिनके पीछे नवयुवकों की टोलियां भक्ति गीतों के धुन पर नृत्य करती हुई देखी गई। अपने दरवाजे से होकर जाने पर श्रद्धालु मूर्तियों के जुलूस के देख रहे थे। मेंहदावल प्रतिनिधि के अनुसार कसबे में नगर परिक्रमा के बाद प्रतिमाओं का शंतिपूण ढंग से राप्ती और बखिरा झील में विसर्जन हुआ। सांथा प्रतिनिधि के अनुसार सांथा, गनवरिया, निघुरी में स्थापित मूर्तियों का विसर्जन झुड़िया नाला पर विसर्जित हुई। धर्मसिंहवा प्रतिनिधि के अनुसार देवी की प्रतिमा छिबरा, गौरीराई, धर्मसिहवा, पुनया, बढय़ा मेंहदूपार की गांव में भ्रमण के बाद बूढ़ी राप्ती में विसर्जित की गई। एसपी आकाश तोमर ने बताया कि जनपद में 645 मूर्तिया स्थापित थी। शांतिपूर्ण माहौल में शुक्रवार को 501 और शनिवार को 117 मूर्तियों का विसर्जन हुआ। शेष मूर्तियों का विसर्जन पूर्णिमा के दिन होगा।
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