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परिजन बोले-मेडिकल कालेज में लापरवाही ने ले ली बच्चों की जान
Updated Sat, 12 Aug 2017 11:15 PM IST
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संतकबीरनगर। बाबा राघवदास मेडिकल कॉलेज गोरखपुर में अपने को खोने वालों में जिले के भी दो परिवार शामिल है। इस हादसे में दो मासूमों की मौत हो गई है। इन बच्चों के परिजन मासूमों की मौत के लिए सीधे तौर पर मेडिकल कॉलेज में लापरवाही को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। परिजनों का कहना है कि यदि समय से इलाज मिलता और ऑक्सीजन की कमी नहीं होती तो बच्चों की जान बच सकती थी।
मेडिकल कॉलेज में अपनी साढ़े तीन साल की बेटी शिवानी को खोने वाले बुद्धिराम निवासी कुसमैनी ने बताया नौ अगस्त को बच्ची को उल्टी के साथ बुखार हुआ। पहले बच्ची को जिला अस्पताल ले आए, जहां स्थिति में सुधार न होता देख रात में मेडिकल कॉलेज ले जाकर भर्ती कराया। वहां अव्यवस्था का आलम था। बच्ची की तबियत बिगड़ने लगी तो परेशान हो गए। मां वंदना ने बताया कि ऑक्सीजन के लिए सिलेंडर लगाया गया था, लेकिन बात में पता चला कि वह खाली था। मां ने रोते हुए बताया कि यदि लापरवाही नहीं हुई होती तो बच्ची आज जिंदा होती। उनके पास एक बच्ची और है जो अभी डेढ़ साल की है। इसी तरह मीरगंज निवासी शाबिर अली ने अपने चार दिन के बच्चे माजिद को खो दिया है। उन्होंने बताया कि नौ अगस्त को बच्चे की तबियत खराब हुई तो जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया। सुबह तक जब बच्चे की सेहत में सुधार नहीं हुआ तो पहले बस्ती ले गए, वहां से फिर मेडिकल कॉलेज ले गए। दस अगस्त की रात में बच्चे की मौत हो गई। बच्चे की मां सलीकुन्निशा ने रोते हुए बताया कि अगर जानते कि मेडिकल कॉलेज में लापरवाही होगी तो कभी भी वहां नहीं ले जाते।
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मेडिकल कॉलेज में अपनी साढ़े तीन साल की बेटी शिवानी को खोने वाले बुद्धिराम निवासी कुसमैनी ने बताया नौ अगस्त को बच्ची को उल्टी के साथ बुखार हुआ। पहले बच्ची को जिला अस्पताल ले आए, जहां स्थिति में सुधार न होता देख रात में मेडिकल कॉलेज ले जाकर भर्ती कराया। वहां अव्यवस्था का आलम था। बच्ची की तबियत बिगड़ने लगी तो परेशान हो गए। मां वंदना ने बताया कि ऑक्सीजन के लिए सिलेंडर लगाया गया था, लेकिन बात में पता चला कि वह खाली था। मां ने रोते हुए बताया कि यदि लापरवाही नहीं हुई होती तो बच्ची आज जिंदा होती। उनके पास एक बच्ची और है जो अभी डेढ़ साल की है। इसी तरह मीरगंज निवासी शाबिर अली ने अपने चार दिन के बच्चे माजिद को खो दिया है। उन्होंने बताया कि नौ अगस्त को बच्चे की तबियत खराब हुई तो जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया। सुबह तक जब बच्चे की सेहत में सुधार नहीं हुआ तो पहले बस्ती ले गए, वहां से फिर मेडिकल कॉलेज ले गए। दस अगस्त की रात में बच्चे की मौत हो गई। बच्चे की मां सलीकुन्निशा ने रोते हुए बताया कि अगर जानते कि मेडिकल कॉलेज में लापरवाही होगी तो कभी भी वहां नहीं ले जाते।
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