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खलीलाबाद शहर के मुखलिसपुर रेलवे क्रासिंग बंद होने का मामला
Updated Tue, 18 Dec 2018 12:03 AM IST
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रोजगार ठप होने से नाराज व्यापारी बेचेंगे घर
खलीलाबाद शहर के मुखलिसपुर रेलवे क्रॉसिंग का मामला
दो साल पहले क्रासिंग पर बना था ओवरब्रिज, व्यापारी कर रहे हैं अंडरपास की मांग
फोटो है
अमर उजाला ब्यूरो
संतकबीरनगर। खलीलाबाद शहर के मुखलिसपुर रेलवे क्रॉसिंग पर ओवरब्रिज बनने के बाद पुल के नीचे स्थित दुकानों का कारोबार ठप हो गया है। परेशान व्यापारी यहां अंडरपास बनवाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन कोई कार्रवाई न होने तथा रोजगार छिनने से परेशान व्यापारियों ने अपने घरों को बेचने के लिए बोर्ड टंगा दिया है। ‘मकान बिकाऊ है’ के लगे बोर्ड शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है।
खलीलाबाद शहर का हृदय माने जाने वाले मोहल्ला गोला बाजार दक्षिण व औद्योगिक नगर को मुखलिसपुर रेलवे क्रॉसिंग दो हिस्सों में बांटती है। 22 मार्च-2016 को इस रेलवे क्रॉसिंग पर ओवरब्रजि का निर्माण कराया गया। इसके बाद नीचे से आवागमन बंद कर दिया गया। अब इधर से कुछ स्कूली बच्चे व मोहल्ले के लोग ही आते-जाते हैं। इसके चलते ओवरब्रिज के नीचे की दुकानों की बिक्री ठप हो गई। ओवरब्रिज के नीचे लोग अपनी गाड़ियां खड़ी करते हैं। रोजगार चौपट होता देख व्यापारियों ने अंडरपास बनाओ संघर्ष मोर्चा का गठन कर आंदोलन शुरू किया। संघर्ष मोर्चा के वरिष्ठ सदस्यों सुबोध शर्मा, प्रदीप चटर्जी, राम शंकर जायसवाल, देवानंद वर्मा, गोलू वर्मा, महेश जायसवाल, राजेश मिश्र, विजय नारायण, आलोक श्रीवास्तव, उमेश शर्मा आदि का कहना है कि इस मामले को लेकर वे लोग सांसद, विधायक व डीएम के अलावा रेलवे के महाप्रबंधक गोरखपुर से भी मिल चुके हैं। अब तक सकारात्मक पहल नहीं हुई। लिहाजा अपनी दुकान बंद करने व घर बेचकर कहीं अन्यत्र बसने का विकल्प ढूंढ रहे हैं।
जीवन यापन करना हुआ मुश्किल
विवेक वर्मा ‘गोलू’ का कहना है कि ओवरब्रिज बन जाने के बाद मोहल्ले के अलावा बाहरी लोगों का आना-जाना नहीं होता। इसका असर कारोबार पर पड़ रहा है। रामशंकर जायसवाल बताते हैं कि पूंजी लगाकर दिन भर इंतजार के बाद भी दुकान पर ग्राहक ही नहीं आते हैं। रोजगार खत्म हुआ तो यहां कैसे रहकर जीवन यापन होगा। महेश जायसवाल कहते हैं कि अंडरपास नहीं होने के चलते उन लोगों को पड़ोसी मोहल्ले के लोगों से भी मिलने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। रोजगार भी ठप है तो घर बेचना मजबूरी है। आलोक श्रीवास्तव का कहना है कि यहां अंडरपास बहुत जरूरी है। आवागमन संबंधी दिक्कत के चलते उनके किराएदार भी नहीं मिल रहे हैं। आय का स्रोत बंद होने के बाद यहां जीवन यापन संभव नहीं है।
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चुनाव में भी करेंगे विरोध
अंडरपास नहीं होने से परेशान दानिश खान, विजय नारायण, सिद्धार्थ जैन, आशुतोष जायसवाल, बिल्लू गुप्ता, बबलू वर्मा, मुकेश वर्मा, राजेश मिश्र, जैनेन्द्र जायसवाल, अशोक कसौधन, मोनू वर्मा, विनीत चड्ढा, कादिर खान, रामलखन, परमात्मा चौधरी, उमेश शर्मा, नेबुलाल गुप्ता, हाफिजुल्लाह, लल्लू गुप्ता, श्री राम सिंह, सुनील साहनी, अमित पाठक, कमलेश गुप्ता, लल्लू गुप्ता, भीमसेन मिश्रा आदि लोगों ने आगामी लोकसभा चुनाव में भी इस मुद्दे पर आंदोलन का निर्णय लिया है।
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खलीलाबाद शहर के मुखलिसपुर रेलवे क्रॉसिंग का मामला
दो साल पहले क्रासिंग पर बना था ओवरब्रिज, व्यापारी कर रहे हैं अंडरपास की मांग
फोटो है
अमर उजाला ब्यूरो
संतकबीरनगर। खलीलाबाद शहर के मुखलिसपुर रेलवे क्रॉसिंग पर ओवरब्रिज बनने के बाद पुल के नीचे स्थित दुकानों का कारोबार ठप हो गया है। परेशान व्यापारी यहां अंडरपास बनवाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन कोई कार्रवाई न होने तथा रोजगार छिनने से परेशान व्यापारियों ने अपने घरों को बेचने के लिए बोर्ड टंगा दिया है। ‘मकान बिकाऊ है’ के लगे बोर्ड शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है।
खलीलाबाद शहर का हृदय माने जाने वाले मोहल्ला गोला बाजार दक्षिण व औद्योगिक नगर को मुखलिसपुर रेलवे क्रॉसिंग दो हिस्सों में बांटती है। 22 मार्च-2016 को इस रेलवे क्रॉसिंग पर ओवरब्रजि का निर्माण कराया गया। इसके बाद नीचे से आवागमन बंद कर दिया गया। अब इधर से कुछ स्कूली बच्चे व मोहल्ले के लोग ही आते-जाते हैं। इसके चलते ओवरब्रिज के नीचे की दुकानों की बिक्री ठप हो गई। ओवरब्रिज के नीचे लोग अपनी गाड़ियां खड़ी करते हैं। रोजगार चौपट होता देख व्यापारियों ने अंडरपास बनाओ संघर्ष मोर्चा का गठन कर आंदोलन शुरू किया। संघर्ष मोर्चा के वरिष्ठ सदस्यों सुबोध शर्मा, प्रदीप चटर्जी, राम शंकर जायसवाल, देवानंद वर्मा, गोलू वर्मा, महेश जायसवाल, राजेश मिश्र, विजय नारायण, आलोक श्रीवास्तव, उमेश शर्मा आदि का कहना है कि इस मामले को लेकर वे लोग सांसद, विधायक व डीएम के अलावा रेलवे के महाप्रबंधक गोरखपुर से भी मिल चुके हैं। अब तक सकारात्मक पहल नहीं हुई। लिहाजा अपनी दुकान बंद करने व घर बेचकर कहीं अन्यत्र बसने का विकल्प ढूंढ रहे हैं।
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जीवन यापन करना हुआ मुश्किल
विवेक वर्मा ‘गोलू’ का कहना है कि ओवरब्रिज बन जाने के बाद मोहल्ले के अलावा बाहरी लोगों का आना-जाना नहीं होता। इसका असर कारोबार पर पड़ रहा है। रामशंकर जायसवाल बताते हैं कि पूंजी लगाकर दिन भर इंतजार के बाद भी दुकान पर ग्राहक ही नहीं आते हैं। रोजगार खत्म हुआ तो यहां कैसे रहकर जीवन यापन होगा। महेश जायसवाल कहते हैं कि अंडरपास नहीं होने के चलते उन लोगों को पड़ोसी मोहल्ले के लोगों से भी मिलने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। रोजगार भी ठप है तो घर बेचना मजबूरी है। आलोक श्रीवास्तव का कहना है कि यहां अंडरपास बहुत जरूरी है। आवागमन संबंधी दिक्कत के चलते उनके किराएदार भी नहीं मिल रहे हैं। आय का स्रोत बंद होने के बाद यहां जीवन यापन संभव नहीं है।
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चुनाव में भी करेंगे विरोध
अंडरपास नहीं होने से परेशान दानिश खान, विजय नारायण, सिद्धार्थ जैन, आशुतोष जायसवाल, बिल्लू गुप्ता, बबलू वर्मा, मुकेश वर्मा, राजेश मिश्र, जैनेन्द्र जायसवाल, अशोक कसौधन, मोनू वर्मा, विनीत चड्ढा, कादिर खान, रामलखन, परमात्मा चौधरी, उमेश शर्मा, नेबुलाल गुप्ता, हाफिजुल्लाह, लल्लू गुप्ता, श्री राम सिंह, सुनील साहनी, अमित पाठक, कमलेश गुप्ता, लल्लू गुप्ता, भीमसेन मिश्रा आदि लोगों ने आगामी लोकसभा चुनाव में भी इस मुद्दे पर आंदोलन का निर्णय लिया है।