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राप्ती का जलस्तर
Updated Sat, 19 Aug 2017 06:23 PM IST
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संतकबीरनगर। राप्ती नदी का जलस्तर जहां लगातार बढ़ रहा है, वहीं घाघरा स्थिर हो गई है। राप्ती खतरे के निशान से एक मीटर 40 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है, वहीं घाघरा खतरे के निशान से 35 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच कर रुकी हुई है। घाघरा की बाढ़ से नदी और बांध के बीच बसे 22 गांव मैरुंड हो गए हैं। इन गांवों के प्रभावित हुए 1000 परिवार एमबीडी बांध पर पहुंच कर शरण लेने को विवश हैं, जबकि राप्ती के करमैनी- बेलौली बांध पर तीन जगह रिसाव शुरू हुआ तो ड्रेनेज खंड ने मजदूर लगाकर तत्काल बंद करा दिया।
मेंहदावल प्रतिनिधि के अनुसार राप्ती के खतरे के निशान 79.50 मीटर है, जबकि शनिवार की शाम को जलस्तर बढ़ कर 80.90 मीटर पर पहुंच गया है। ऐसे में नदी खतरे के निशान से एक मीटर 40 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। करमैनी- बेलौली बांध पर नौंगो,जोरवा व डुमरियाबाबू के पास नया रिसाव शुरू होने की खबर पर हडकंप मच गया। एसडीएम,तहसीलदार तत्काल ड्रेनेज खंड के अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंच गए और मजदूरों को लगाकर गिट्टी, मोरंग व सादा बालू से पिचिंग करवाते हुए रिसाव को रोकने की कवायद शुरू की। बढ़ते जलस्तर के कारण तटबंध पर अब भी पानी का भारी दबाव हैं, वहीं लोग दहशत में हैं। तटबंध से सटे गांव बेलौहा, नौगों, तिवारीपुर, छपियापराग, जोरवा, बानडूमर, विशुनपुर, बढया, इंदरपुर, कुसौना, डुमरियाबाबू, थरौली, खैरा, बेलौली तथा गोरखपुर जनपद का जलारे आदि ऐसे गांव हैं, जो तटबंध से सटे बसे हैं और नदी से इनकी सुरक्षा मात्र करमैनी-बेलौली तटबंध से होती है। ऐसे में इन गांवों में रहने वाले लोग काफी परेशान व चितिंत हैं।
हैंसर प्रतिनिधि के अनुसार घाघरा का जलस्तर शनिवार को स्थिर था। जल स्तर 79 70 मीटर मापा गया,जो खतरे के निशान से 35 सेंटीमीटर ऊपर था। एमबीडी बांध और नदी के बीच में बसे क्षेत्र के 22 गांवों में घाघरा का पानी घुस गया। उनके गांवों के लोगों के लिए प्रशासन की ओर से 14 नावें लगा दी गई हैं। उन गांवों के लोग एमबीडी बांध पर पहुंच गए।
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भूख से तड़फड़ा रहे बच्चे, लोग परेशान
क्षेत्र के कंचनपुर,ढोलबजा, गुनवतिया, चकदहा, सियारामअधीन,सीयर कला, दौलतपुर, भौवापार, गायघाट, भरवटिया, जगदीशपुर, खालेपुरवा, पटौवा, आगापुर गुलरिहा समेत 22 गांवों में पानी घुस गया, जिसकी वजह से इन गांवों के लोग एमबीडी बांध पर पहुंच कर शरण लिए हुए है। बाढ़ पीड़ित दयाराम, फूलचंद, रामशंकर, लालचंद,कैलाश,सुभागी, प्रमिला ,इसलावती आदि ने बताया कि प्रशासन पॉलिथीन मुहैया कराने के बाद कुछ अन्य व्यवस्था नहीं किया, जिसकी वजह से शनिवार को पूरे दिन छोटे- छोटे बच्चे भूख से बिलबिलाते रहे। मिट्टी तेल देने की जिम्मेदारी कोटेदार पर थी, लेकिन नहीं मिला। एसडीएम रामजीवन ने बताया कि क्षेत्र में 14 नावें लगा दी गई है। बाढ़ से प्रभावित हुए 41 परिवार बांध पर पहुंच चुके है। जिन्हें पालीथीन का वितरण करा दिया गया है। जबकि भोजन आदि सामग्री की व्यवस्था कराई जा रही है।
बांध में रिसाव से दर्जनों गांव सहमे
धर्मसिंहवा प्रतिनिधि के अनुसार सिद्घार्थनगर जनपद की सीमा से सटे राप्ती के बांध पर भुवही, सुरही, बंजरहा, व अजगरा के पास हो रहे रिसाव से सांथा ब्लॉक के दर्जनो गांव के लोग सहमे हुए हैं। सांथा क्षेत्र के गांव मेंहदूपार,भुलकी, केचुआखोर, जमया, खटहां, पुनया,अतरी नानकार, झौवा कोमर, बरघाट, सेवहां चौबे, दुबौली, मुसहरा, सिंगहा, टोटहा, कचराबारी, हर्रैया, गहबा, इटौवा, रैधरपार, सेवाइचपार, बरगदवा, बरईपार, तथा मेंहदावल क्षेत्र के बिसौवा, पिपरी, कुड़वां, जमुअरिया, नटवा, ददरा, आदि ऐसे गांव है जो कि बंधे के टूटने से प्रभावित हो जाएंगे। क्षेत्र के रामचंद्र शुक्ल, जयचंद्र, नगेंद्र पाण्डेय, संतोष शुक्ला, विनोद शुक्ला, मनीष त्रिपाठी, बालमुकुंद, नरसिंह शुक्ला आदि ने बताया कि बंजरहा से लेकर भुवही तक अगर कहीं पर भी बांध टूटेगा है तो 20-25 गांव प्रभावित हो जाएंगे।
आमी नदी का जल स्तर स्थिर
बेलहर, नंदौर और बखिरा प्रतिनिधियों के अनुसार आमी नदी का जलस्तर भी स्थिर है। क्षेत्र के बसहिया, कुशहरा, लौकी मिश्र, किठिऊरी, रमवापुर, पिपरीबरडाड़,मलौली, औरहिया मंझरिया, पवरिहा, करदहा ,जल्लहिया, सुरसा चमनजोत, अकलोहना आदि गांवों के समीप पानी पहुुंच गया है। इतना ही नही इन गांवो को जोड़ने वाले संपर्क मार्ग पर भी बाढ का पानी भर जाने से लोगो को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। लोगों ने बताया कि बसहिया गांव के रहने वाले 55 वर्षीय राम कुमार यादव पुत्र वंशराज यादव शुक्रवार को आमी के पानी में भैंस चराते दौरान डूब गए थे। जिनकी तलाश हुई,लेकिन अब तक पता नही चल पाया है। ड्रेनेज खंड के एक्सईएन आरपी सिंह यादव ने बताया कि राप्ती का जलस्तर बढ़ रहा है और खतरे के निशान से एक मीटर 40 सेंटीमीटर है। जबकि घाघरा स्थिर है और खतरे के निशान से 35 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। बांध को कही कोई खतरा नही है।
इंसेट
सिद्घार्थनगर भेजवाई गई 20 नावे
शनिवार को कमिश्नर दिनेश कुमार सिंह और डीआईजी बस्ती सिद्वार्थनगर में बाढ़ क्षेत्र का निरीक्षण करने के लिए जाते दौरान दुधारा थाने पर कुछ देर के लिए रुके। दुधारा थाने की स्थापना वर्ष, तथा इस थाने का सबसे चर्चित अपराध क्या है तथा इस थाने में कितने गांव है तथा थाने में कितने हल्के है,इसकी जानकारी हासिल की। नए भवन में यह सभी जानकारियां अंकित कराने का निर्देश दिया। कमिश्नर ने बताया कि संतकबीरनगर जिले से 20 नावें सिद्घार्थनगर भेजवाई गई है।
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मेंहदावल प्रतिनिधि के अनुसार राप्ती के खतरे के निशान 79.50 मीटर है, जबकि शनिवार की शाम को जलस्तर बढ़ कर 80.90 मीटर पर पहुंच गया है। ऐसे में नदी खतरे के निशान से एक मीटर 40 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। करमैनी- बेलौली बांध पर नौंगो,जोरवा व डुमरियाबाबू के पास नया रिसाव शुरू होने की खबर पर हडकंप मच गया। एसडीएम,तहसीलदार तत्काल ड्रेनेज खंड के अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंच गए और मजदूरों को लगाकर गिट्टी, मोरंग व सादा बालू से पिचिंग करवाते हुए रिसाव को रोकने की कवायद शुरू की। बढ़ते जलस्तर के कारण तटबंध पर अब भी पानी का भारी दबाव हैं, वहीं लोग दहशत में हैं। तटबंध से सटे गांव बेलौहा, नौगों, तिवारीपुर, छपियापराग, जोरवा, बानडूमर, विशुनपुर, बढया, इंदरपुर, कुसौना, डुमरियाबाबू, थरौली, खैरा, बेलौली तथा गोरखपुर जनपद का जलारे आदि ऐसे गांव हैं, जो तटबंध से सटे बसे हैं और नदी से इनकी सुरक्षा मात्र करमैनी-बेलौली तटबंध से होती है। ऐसे में इन गांवों में रहने वाले लोग काफी परेशान व चितिंत हैं।
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हैंसर प्रतिनिधि के अनुसार घाघरा का जलस्तर शनिवार को स्थिर था। जल स्तर 79 70 मीटर मापा गया,जो खतरे के निशान से 35 सेंटीमीटर ऊपर था। एमबीडी बांध और नदी के बीच में बसे क्षेत्र के 22 गांवों में घाघरा का पानी घुस गया। उनके गांवों के लोगों के लिए प्रशासन की ओर से 14 नावें लगा दी गई हैं। उन गांवों के लोग एमबीडी बांध पर पहुंच गए।
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भूख से तड़फड़ा रहे बच्चे, लोग परेशान
क्षेत्र के कंचनपुर,ढोलबजा, गुनवतिया, चकदहा, सियारामअधीन,सीयर कला, दौलतपुर, भौवापार, गायघाट, भरवटिया, जगदीशपुर, खालेपुरवा, पटौवा, आगापुर गुलरिहा समेत 22 गांवों में पानी घुस गया, जिसकी वजह से इन गांवों के लोग एमबीडी बांध पर पहुंच कर शरण लिए हुए है। बाढ़ पीड़ित दयाराम, फूलचंद, रामशंकर, लालचंद,कैलाश,सुभागी, प्रमिला ,इसलावती आदि ने बताया कि प्रशासन पॉलिथीन मुहैया कराने के बाद कुछ अन्य व्यवस्था नहीं किया, जिसकी वजह से शनिवार को पूरे दिन छोटे- छोटे बच्चे भूख से बिलबिलाते रहे। मिट्टी तेल देने की जिम्मेदारी कोटेदार पर थी, लेकिन नहीं मिला। एसडीएम रामजीवन ने बताया कि क्षेत्र में 14 नावें लगा दी गई है। बाढ़ से प्रभावित हुए 41 परिवार बांध पर पहुंच चुके है। जिन्हें पालीथीन का वितरण करा दिया गया है। जबकि भोजन आदि सामग्री की व्यवस्था कराई जा रही है।
बांध में रिसाव से दर्जनों गांव सहमे
धर्मसिंहवा प्रतिनिधि के अनुसार सिद्घार्थनगर जनपद की सीमा से सटे राप्ती के बांध पर भुवही, सुरही, बंजरहा, व अजगरा के पास हो रहे रिसाव से सांथा ब्लॉक के दर्जनो गांव के लोग सहमे हुए हैं। सांथा क्षेत्र के गांव मेंहदूपार,भुलकी, केचुआखोर, जमया, खटहां, पुनया,अतरी नानकार, झौवा कोमर, बरघाट, सेवहां चौबे, दुबौली, मुसहरा, सिंगहा, टोटहा, कचराबारी, हर्रैया, गहबा, इटौवा, रैधरपार, सेवाइचपार, बरगदवा, बरईपार, तथा मेंहदावल क्षेत्र के बिसौवा, पिपरी, कुड़वां, जमुअरिया, नटवा, ददरा, आदि ऐसे गांव है जो कि बंधे के टूटने से प्रभावित हो जाएंगे। क्षेत्र के रामचंद्र शुक्ल, जयचंद्र, नगेंद्र पाण्डेय, संतोष शुक्ला, विनोद शुक्ला, मनीष त्रिपाठी, बालमुकुंद, नरसिंह शुक्ला आदि ने बताया कि बंजरहा से लेकर भुवही तक अगर कहीं पर भी बांध टूटेगा है तो 20-25 गांव प्रभावित हो जाएंगे।
आमी नदी का जल स्तर स्थिर
बेलहर, नंदौर और बखिरा प्रतिनिधियों के अनुसार आमी नदी का जलस्तर भी स्थिर है। क्षेत्र के बसहिया, कुशहरा, लौकी मिश्र, किठिऊरी, रमवापुर, पिपरीबरडाड़,मलौली, औरहिया मंझरिया, पवरिहा, करदहा ,जल्लहिया, सुरसा चमनजोत, अकलोहना आदि गांवों के समीप पानी पहुुंच गया है। इतना ही नही इन गांवो को जोड़ने वाले संपर्क मार्ग पर भी बाढ का पानी भर जाने से लोगो को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। लोगों ने बताया कि बसहिया गांव के रहने वाले 55 वर्षीय राम कुमार यादव पुत्र वंशराज यादव शुक्रवार को आमी के पानी में भैंस चराते दौरान डूब गए थे। जिनकी तलाश हुई,लेकिन अब तक पता नही चल पाया है। ड्रेनेज खंड के एक्सईएन आरपी सिंह यादव ने बताया कि राप्ती का जलस्तर बढ़ रहा है और खतरे के निशान से एक मीटर 40 सेंटीमीटर है। जबकि घाघरा स्थिर है और खतरे के निशान से 35 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। बांध को कही कोई खतरा नही है।
इंसेट
सिद्घार्थनगर भेजवाई गई 20 नावे
शनिवार को कमिश्नर दिनेश कुमार सिंह और डीआईजी बस्ती सिद्वार्थनगर में बाढ़ क्षेत्र का निरीक्षण करने के लिए जाते दौरान दुधारा थाने पर कुछ देर के लिए रुके। दुधारा थाने की स्थापना वर्ष, तथा इस थाने का सबसे चर्चित अपराध क्या है तथा इस थाने में कितने गांव है तथा थाने में कितने हल्के है,इसकी जानकारी हासिल की। नए भवन में यह सभी जानकारियां अंकित कराने का निर्देश दिया। कमिश्नर ने बताया कि संतकबीरनगर जिले से 20 नावें सिद्घार्थनगर भेजवाई गई है।