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‘राज्यसभा में विपक्षी दलों ने क्यों अटकाया तीन तलाक बिल’
ब्यूरो अमर उजाला / संभ्ाल
Updated Tue, 13 Mar 2018 12:46 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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मुस्लिम महिलाओं के हक के लिए आवाज उठाने वाली संभल की समीना ने अब राज्यसभा में तीन तलाक बिल के अटक जाने पर कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना था कि अगर कांग्रेस समेत सभी विपक्षी दल सकारात्मक रुख अपनाते तो अब तक तीन तलाक बिल पारित हो गया होता और मुस्लिम महिलाओं के हालातों में सुधार नजर आता।
उन्होंने कहा कि लोकसभा में भाजपा का बहुमत था इसलिए तीन तलाक पर बना कानून पारित हो गया पर विपक्षी दलों के कारण राज्यसभा में यही बिल फंस गया। विपक्षी दलों में सिर्फ नीतीश कुमार ऐसे नेता थे, जिन्होंने बिल का समर्थन किया जबकि विपक्षी दलों के अधिकतर नेता मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के रुख का समर्थन कर रहे थे।इस मामले में हमें उम्मीद है कि राज्यसभा में भाजपा का बहुमत होने पर तीन तलाक बिल पारित होगा।
कांग्रेस कुछ नहीं कर पाएगी। समीना वही हैं जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट में हलाला और बहु विवाह के खिलाफ बड़ी आवाज उठाई है। समीना ने सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम पर्सनल बोर्ड के कामकाज पर रोक की मांग उठाई है।
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वर्ष 1980 के दशक में तीन तलाक से पीड़ित हुई शाहबानो ने गुजारा भत्ता मांगा। इसके लिए वह सुप्रीम कोर्ट तक लड़ीं। कोर्ट ने उनकी परेशानी को समझकर कानून बनवाया लेकिन संसद में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने सुप्रीम कोर्ट की मंशा को पूरा नहीं किया।
वहीं इसके बाद वर्ष 2017 में तीन तलाक को लेकर शायरा बानो ने कानूनी लड़ाई लड़ी। सुप्रीम कोर्ट ने शायरा बानो के मामले में तीन तलाक को असंवैधानिक करार दिया। इसके बाद भारतीय संसद में एक बिल लाया गया जो अब राज्यसभा में है। समीना ने हलाला और मुस्लिम मर्दों के बहुविवाह को गलत ठहराते हुए इसे रोके जाने की मांग की है।
उन्होंने इस बारे में सुप्रीम कोर्ट में याचिका की है। मूल रूप से संभल की निवासी समीना दिल्ली में रहती हैं। उन्हें दो बार तीन तलाक झेलना पड़ा। 15 वर्ष तक कष्ट झेलने के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंची समीना अब मुस्लिम महिलाओं के लिए आंदोलन की आवाज बन गईं हैं।
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उन्होंने कहा कि लोकसभा में भाजपा का बहुमत था इसलिए तीन तलाक पर बना कानून पारित हो गया पर विपक्षी दलों के कारण राज्यसभा में यही बिल फंस गया। विपक्षी दलों में सिर्फ नीतीश कुमार ऐसे नेता थे, जिन्होंने बिल का समर्थन किया जबकि विपक्षी दलों के अधिकतर नेता मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के रुख का समर्थन कर रहे थे।इस मामले में हमें उम्मीद है कि राज्यसभा में भाजपा का बहुमत होने पर तीन तलाक बिल पारित होगा।
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कांग्रेस कुछ नहीं कर पाएगी। समीना वही हैं जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट में हलाला और बहु विवाह के खिलाफ बड़ी आवाज उठाई है। समीना ने सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम पर्सनल बोर्ड के कामकाज पर रोक की मांग उठाई है।
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वर्ष 1980 के दशक में तीन तलाक से पीड़ित हुई शाहबानो ने गुजारा भत्ता मांगा। इसके लिए वह सुप्रीम कोर्ट तक लड़ीं। कोर्ट ने उनकी परेशानी को समझकर कानून बनवाया लेकिन संसद में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने सुप्रीम कोर्ट की मंशा को पूरा नहीं किया।
वहीं इसके बाद वर्ष 2017 में तीन तलाक को लेकर शायरा बानो ने कानूनी लड़ाई लड़ी। सुप्रीम कोर्ट ने शायरा बानो के मामले में तीन तलाक को असंवैधानिक करार दिया। इसके बाद भारतीय संसद में एक बिल लाया गया जो अब राज्यसभा में है। समीना ने हलाला और मुस्लिम मर्दों के बहुविवाह को गलत ठहराते हुए इसे रोके जाने की मांग की है।
उन्होंने इस बारे में सुप्रीम कोर्ट में याचिका की है। मूल रूप से संभल की निवासी समीना दिल्ली में रहती हैं। उन्हें दो बार तीन तलाक झेलना पड़ा। 15 वर्ष तक कष्ट झेलने के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंची समीना अब मुस्लिम महिलाओं के लिए आंदोलन की आवाज बन गईं हैं।