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उर्स-ए-अजमली का आगाज
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संभल। मरकजी मदरसा अहले सुन्नत अजमल उल उलूम के संस्थापक मुफ्ती अजमल शाह के 60 वें उर्स-ए-अजमली का शुक्रवार को आगाज हो गया। कार्यक्रम की शुरुआत कारी शाहिद अशरफी ने तिलावत से की। समीर आलम ने हम्द और अब्दुल्लाह ने नात पढ़ी। ख्वाजा कलीम अशरफ संभली ने मुफ्ती अजमल शाह के जीवन चर्चा पर जोर दिया।
मुफ्ती आसिफ मिस्बाही ने अपना लेख पढ़ते हुए कहा कि हजरत मुफ्ती अजमल शाह के फतवे इस तरह होते थे कि उस वक्त के बड़े-बड़े आलिम और आज के मुफ्ती भी उन फतवों को मानते हैं और देश विदेश में बड़े सेमिनारों में मुफ्ती अजमल शाह के फतवों की दलील पेश की जाती है। मुफ्ती इकराम उल हक ने कहा कि मुफ्ती अजमल शाह बहुत बड़े मुनाजिर थे। शहर मुफ्ती कारी अलाउद्दीन अजमली ने मुफ्ती अजमल शाह की जीवनी पर रोशनी डाली।
संचालन मुफ्ती आलम नूरी ने किया। शहर मुफ्ती ने मुल्क और कौम के लिए दुआ कराई। अंत में हाजी जफीर अहमद, सय्यद अब्दुल कदीर, हाजी नदीम, कारी वसी अशरफ ने अतिथियों को बैग वितरित किए। कारी तंजीम अशरफ अजमली ने लोगों का आभार व्यक्त किया। मुफ्ती अहमद, मुफ्ती अशफाक, मौलाना जहीरुल इस्लाम, मौलाना नईम अशरफी, मौलाना जफीर, कारी मुअज्जम, कारी साजिद, कारी अनीस, कारी यामीन, कारी शुऐब अजमली, तकी अशरफ, गुलवेज कमर मौजूद रहे।
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मुफ्ती आसिफ मिस्बाही ने अपना लेख पढ़ते हुए कहा कि हजरत मुफ्ती अजमल शाह के फतवे इस तरह होते थे कि उस वक्त के बड़े-बड़े आलिम और आज के मुफ्ती भी उन फतवों को मानते हैं और देश विदेश में बड़े सेमिनारों में मुफ्ती अजमल शाह के फतवों की दलील पेश की जाती है। मुफ्ती इकराम उल हक ने कहा कि मुफ्ती अजमल शाह बहुत बड़े मुनाजिर थे। शहर मुफ्ती कारी अलाउद्दीन अजमली ने मुफ्ती अजमल शाह की जीवनी पर रोशनी डाली।
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संचालन मुफ्ती आलम नूरी ने किया। शहर मुफ्ती ने मुल्क और कौम के लिए दुआ कराई। अंत में हाजी जफीर अहमद, सय्यद अब्दुल कदीर, हाजी नदीम, कारी वसी अशरफ ने अतिथियों को बैग वितरित किए। कारी तंजीम अशरफ अजमली ने लोगों का आभार व्यक्त किया। मुफ्ती अहमद, मुफ्ती अशफाक, मौलाना जहीरुल इस्लाम, मौलाना नईम अशरफी, मौलाना जफीर, कारी मुअज्जम, कारी साजिद, कारी अनीस, कारी यामीन, कारी शुऐब अजमली, तकी अशरफ, गुलवेज कमर मौजूद रहे।
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