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Sambhal News: दो धाराओं ने रुकवाई जामा मस्जिद कमेटी के सदर की रिहाई

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Thu, 31 Jul 2025 01:14 AM IST
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Two sections stopped the release of the head of Jama Masjid Committee
संभल। बवाल में गिरफ्तार किए गए जामा मस्जिद कमेटी के सदर जफर अली एडवोकेट की रिहाई में फिर से कानूनी पेंच फंस गया है। एसआईटी ने चार्जशीट में दो धाराएं बढ़ा दी थीं। जिसमें जमानत खारिज हो गई है। चंदौसी स्थित एमपी/एमएलए कोर्ट में बुधवार को जमानत पर सुनवाई की गई। इसके बाद जमानत अर्जी खारिज कर दी गई। अब बृहस्पतिवार को एमपी/एमएलए कोर्ट सत्र न्यायालय में जमानत पर सुनवाई होनी है।
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23 मार्च को जिन धाराओं के तहत जफर अली की गिरफ्तारी की गई थी, उसमें हाईकोर्ट से 24 जुलाई को जमानत मिल गई है, लेकिन चार्जशीट दाखिल होने के दौरान पुलिस ने विवेचना कर जो धाराएं बढ़ाई थीं, उनका उल्लेख हाईकोर्ट में नहीं किया गया। इसके चलते अब उन धाराओं में जमानत के लिए एमपी/एमएलए कोर्ट प्रार्थना पत्र दिया गया था।
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जामा मस्जिद कमेटी के सदर पर 24 नवंबर को जामा मस्जिद सर्वे के दौरान हुए बवाल की साजिश रचने और गंभीर अपराध में झूठे बयान देने जैसे गंभीर आरोप हैं। इन्हीं आरोप के तहत एसआईटी ने 23 मार्च को गिरफ्तार कर लिया था। उसके बाद से वह जेल में बंद हैं। सेशन कोर्ट से जमानत खारिज होने के बाद परिजन हाईकोर्ट गए थे। हाईकोर्ट में जमानत के लिए जो प्रार्थना पत्र दिया गया था।
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उसमें गिरफ्तारी के समय की धाराएं शामिल थीं। एसआईटी ने जब चार्जशीट दाखिल की तो बीएनएस की धारा 353(2), 61(2)(a) बढ़ा दी। गिरफ्तारी के समय की धाराओं में हाईकोर्ट ने जमानत दे दी लेकिन जो धाराएं अब चार्जशीट के दौरान बढ़ाई गई हैं। उन पर जमानत के लिए एमपी/एमएलए कोर्ट में बुधवार को सुनवाई हुई।
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