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व्यापारियों ने जीएसटी से संबंधित समस्याओं के निराकरण को सौंपा ज्ञापन
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चंदौसी (संभल)। अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के पदाधिकारियों ने जीएसटी से संबंधित विभिन्न समस्याओं के निराकरण की मांग को लेकर प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन असिस्टेंट कमिश्नर वाणिज्य कर को सौंपा।
व्यापारियों का कहना है कि जीएसटी अधिनियम की धारा 190 के अंतर्गत अधिकरण का गठन किया जाए। अधिकरण पीठों के गठन होने तक वेट अधिनियम के अंतर्गत वर्तमान में कार्यरत सभी वाणिज्य कर अधिकारी पीठों को जीएसटी की द्वितीय अपील सुनने का अधिकार दिया जाए। उच्चतम न्यायालय एवं अधिकरण द्वारा वेट अधिनियम के अंतर्गत पारित निर्णय को जीएसटी में भी मान्यता प्रदान की जाए। रिटर्न दाखिल करने के विलंब पर लेट फीस प्रतिदिन के आधार पर न लगाकर मासिक अथवा साप्ताहिक आधार पर लगाई जाए। इसकी अधिकतम सीमा 1000 रुपये निर्धारित की जाए। प्रत्यके रिटर्न की लेट फीस को समाप्त किया जाए। कोरोना काल व अन्य अव्यवस्थाओं के चलते व्यापारी रजिस्ट्रेशन रिवोकेशन प्रार्थना पत्र दाखि नहीं कर सके। उन्हें एक अवसर प्रदान किया जाए। कोई भी नया रिटर्न वित्तीय वर्ष के आरंभ के अंतर्गत एक अप्रैल से ही बदल दिया जाना चाहिए। बार-बार फार्म बदला जाना अव्यवहारिक है। जिससे अधिवक्ताओं का न केवल समय खराब होता है। दिल्ली सरकार की भांति अधिवक्ताओं के बीमा व उनके परिवार को चिकित्सा बीमा की सुविधा प्रदेश सरकार द्वारा उपलब्ध कराई जाए। व्यापारियों उक्त मांगों का निस्तारण शीघ्र कराने की मांग की है। ज्ञापन देने वालों में प्रेम ग्रोवर, शाह आलम मंसूरी, प्रभात कृष्णा, सुशाल अग्रवाल, अनुज अग्रवला, वसीम अख्तर, राजू चड्ढा, विकास मिश्रा आदि मौजूद रहे।
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व्यापारियों का कहना है कि जीएसटी अधिनियम की धारा 190 के अंतर्गत अधिकरण का गठन किया जाए। अधिकरण पीठों के गठन होने तक वेट अधिनियम के अंतर्गत वर्तमान में कार्यरत सभी वाणिज्य कर अधिकारी पीठों को जीएसटी की द्वितीय अपील सुनने का अधिकार दिया जाए। उच्चतम न्यायालय एवं अधिकरण द्वारा वेट अधिनियम के अंतर्गत पारित निर्णय को जीएसटी में भी मान्यता प्रदान की जाए। रिटर्न दाखिल करने के विलंब पर लेट फीस प्रतिदिन के आधार पर न लगाकर मासिक अथवा साप्ताहिक आधार पर लगाई जाए। इसकी अधिकतम सीमा 1000 रुपये निर्धारित की जाए। प्रत्यके रिटर्न की लेट फीस को समाप्त किया जाए। कोरोना काल व अन्य अव्यवस्थाओं के चलते व्यापारी रजिस्ट्रेशन रिवोकेशन प्रार्थना पत्र दाखि नहीं कर सके। उन्हें एक अवसर प्रदान किया जाए। कोई भी नया रिटर्न वित्तीय वर्ष के आरंभ के अंतर्गत एक अप्रैल से ही बदल दिया जाना चाहिए। बार-बार फार्म बदला जाना अव्यवहारिक है। जिससे अधिवक्ताओं का न केवल समय खराब होता है। दिल्ली सरकार की भांति अधिवक्ताओं के बीमा व उनके परिवार को चिकित्सा बीमा की सुविधा प्रदेश सरकार द्वारा उपलब्ध कराई जाए। व्यापारियों उक्त मांगों का निस्तारण शीघ्र कराने की मांग की है। ज्ञापन देने वालों में प्रेम ग्रोवर, शाह आलम मंसूरी, प्रभात कृष्णा, सुशाल अग्रवाल, अनुज अग्रवला, वसीम अख्तर, राजू चड्ढा, विकास मिश्रा आदि मौजूद रहे।
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