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शिप में मक्का भरने के समय हुए थे धमाके
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सिरसी के मोहल्ला चौधरियान में यूक्रेन से लौटे कैप्टन रजा अब्बास नकवी अपने बेटे के साथ।
- फोटो : SAMBHAL
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संभल। सिरसी के रजा अब्बास नकवी रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच काला सागर में शिप पर 13 दिन तक फंसे रहे। भारत सरकार और यूक्रेन में भारतीय दूतावास की मदद से वह 13 दिन के बाद गुरुवार रात अपने घर लौटे हैं। उनकी सकुशल वापसी से परिवार में खुुशी का माहौल है।
सिरसी के मोहल्ला चौधरियान निवासी रजा अब्बास नकवी पुत्र शबीउल हसन नकवी एक कंपनी के मालवाहक शिप पर कैप्टन हैं। रजा अब्बास नकवी ने बताया कि वह 21 फरवरी को इटली से यूक्रेन गए थे। 23 फरवरी को वह शिप पर मौजूद 22 लोगों के साथ काला सागर (ब्लैक सी) में यूक्रेन के माइको लीव पोर्ट पर शिप पर मक्का भर रहे थे। तभी वहां से करीब 14 किलोमीटर दूर धमाकों की आवाज आने लगीं। जिससे शिप पर मौजूद सभी लोग डर गए और दहशत में आ गए। इस दौरान हमें पानी में शिप पर ही रहने के लिए कहा गया था।
उन्होंने बताया कि बमबारी की दहशत में 13 दिन हमने शिप पर ही गुजारे। जब आसपास कहीं समुद्र में धमाका होता था तो शिप पानी में हिलने लगता था। हम रात में शिप की सभी लाइटें बंद कर देते थे। बमुश्किल ही कोई सो पाता था। उन्होंने बताया कि भारतीय दूतावास और एक एजेंसी ने संपर्क किया। 7 मार्च की सुबह करीब साढ़े 5 बजे हमने शिप छोड़ दिया था। भारतीय दूतावास की बस हमें लेने आ गई थी। बस से पहले हम यूक्रेन के पड़ोसी देश मोल्दावा गए थे। वहां से रोमानिया गए थे। भारतीय एयर फोर्स के हवाई जहाज से गाजियाबाद के हिंडन एयरबेस पर गुरुवार को आ गए। गुरुवार की रात रजा अब्बास नकवी के घर पहुंचने पर परिजनों में खुशी की लहर दौड़ गई।
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सिरसी के मोहल्ला चौधरियान निवासी रजा अब्बास नकवी पुत्र शबीउल हसन नकवी एक कंपनी के मालवाहक शिप पर कैप्टन हैं। रजा अब्बास नकवी ने बताया कि वह 21 फरवरी को इटली से यूक्रेन गए थे। 23 फरवरी को वह शिप पर मौजूद 22 लोगों के साथ काला सागर (ब्लैक सी) में यूक्रेन के माइको लीव पोर्ट पर शिप पर मक्का भर रहे थे। तभी वहां से करीब 14 किलोमीटर दूर धमाकों की आवाज आने लगीं। जिससे शिप पर मौजूद सभी लोग डर गए और दहशत में आ गए। इस दौरान हमें पानी में शिप पर ही रहने के लिए कहा गया था।
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उन्होंने बताया कि बमबारी की दहशत में 13 दिन हमने शिप पर ही गुजारे। जब आसपास कहीं समुद्र में धमाका होता था तो शिप पानी में हिलने लगता था। हम रात में शिप की सभी लाइटें बंद कर देते थे। बमुश्किल ही कोई सो पाता था। उन्होंने बताया कि भारतीय दूतावास और एक एजेंसी ने संपर्क किया। 7 मार्च की सुबह करीब साढ़े 5 बजे हमने शिप छोड़ दिया था। भारतीय दूतावास की बस हमें लेने आ गई थी। बस से पहले हम यूक्रेन के पड़ोसी देश मोल्दावा गए थे। वहां से रोमानिया गए थे। भारतीय एयर फोर्स के हवाई जहाज से गाजियाबाद के हिंडन एयरबेस पर गुरुवार को आ गए। गुरुवार की रात रजा अब्बास नकवी के घर पहुंचने पर परिजनों में खुशी की लहर दौड़ गई।
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