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Sambhal News: दहेज उत्पीड़न के मुकदमे का 33 साल बाद आया फैसला
Tue, 31 Oct 2023 01:46 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
Updated Tue, 31 Oct 2023 01:46 AM IST
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चंदौसी। दहेज उत्पीड़न व मारपीट के केस में सोमवार को 33 साल के बाद फैसला आया है। सिविल जज जूनियर डिवीजन एफटीसी संभल स्थित चंदौसी के न्यायालय ने आरोपी पति को जेल में बितायी अवधि और पांच हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है।
सहायक अभियोजन अधिकारी ने बताया कि बिलारी निवासी महिला का निकाह 19 जून 1993 को बहजोई के मोहल्ला कुरैशियान निवासी नसीम अहमद से हआ था। आरोप था कि ससुराल पक्ष के लोग उसे दहेज के लिए प्रताड़ित करते थे। पति के दूसरी महिला से प्रेम संबंध थे। उसने विरोध किया तो पति उससे 30 हजार रुपये की मांग करने लगा। आरोप लगाया था कि पति गर्भाव्स्था में भी मांग पूरी न होने पर उसके साथ मारपीट करता था। साथ ही जान से मारने की धमकी देता था। जिसके बाद वह मायके आ गई। कुछ दिन बाद पति उसके मायके आया और उसके साथ मारपीट करते हुए तलाक दे दिया। पीड़िता ने बहजोई थाने में तहरीर देकर दहेज उत्पीड़न का केस दर्ज कराया था। मुकदमे की सुनवाई सिविल जज जूनियर डिवीजन एफ टीसी संभल स्थित चंदौसी विजय प्रकाश के न्यायालय ने आरोपी नसीम अहमद को दोषी पाया। आरोपी के अधिवक्ता ने उम्र 70 वर्ष होने का तर्क रखते हुए दोषमुक्त करने की गुजारिश की। जिस पर कोर्ट ने आरोपी की आयु को देखते हुए जेल में बिताई गई अवधि व पांच हजार रुपये जुर्माने से दंडित किया है।
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सहायक अभियोजन अधिकारी ने बताया कि बिलारी निवासी महिला का निकाह 19 जून 1993 को बहजोई के मोहल्ला कुरैशियान निवासी नसीम अहमद से हआ था। आरोप था कि ससुराल पक्ष के लोग उसे दहेज के लिए प्रताड़ित करते थे। पति के दूसरी महिला से प्रेम संबंध थे। उसने विरोध किया तो पति उससे 30 हजार रुपये की मांग करने लगा। आरोप लगाया था कि पति गर्भाव्स्था में भी मांग पूरी न होने पर उसके साथ मारपीट करता था। साथ ही जान से मारने की धमकी देता था। जिसके बाद वह मायके आ गई। कुछ दिन बाद पति उसके मायके आया और उसके साथ मारपीट करते हुए तलाक दे दिया। पीड़िता ने बहजोई थाने में तहरीर देकर दहेज उत्पीड़न का केस दर्ज कराया था। मुकदमे की सुनवाई सिविल जज जूनियर डिवीजन एफ टीसी संभल स्थित चंदौसी विजय प्रकाश के न्यायालय ने आरोपी नसीम अहमद को दोषी पाया। आरोपी के अधिवक्ता ने उम्र 70 वर्ष होने का तर्क रखते हुए दोषमुक्त करने की गुजारिश की। जिस पर कोर्ट ने आरोपी की आयु को देखते हुए जेल में बिताई गई अवधि व पांच हजार रुपये जुर्माने से दंडित किया है।
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