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Sambhal News: सायरन की गूंज के बीच भविष्य बचाने की जद्दोजहद
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मुरादाबाद। रुस-यूक्रेन युद्ध को आज 24 फरवरी को एक वर्ष पूरा हो गया है। अपने भविष्य की खातिर आज भी मुरादाबाद के विद्यार्थी और एक परिवार यूक्रेन में ही रह रहे हैं।
उनका कहना है कि बीच में सप्ताह में एक-दो बार सायरन बजता था, लेकिन अब 24 घंटे में तीन से चार बार सायरन बज जाता है। हर बार खतरा की आशंका से डरकर वह बंकर में जाते हैं। उन्होंने कहा कि पूरा एक वर्ष दहशत और खतरे के बीच गुजारा है। अब ईश्वर से ही प्रार्थना है कि यह युद्ध बंद हो जाए।
रुस-यूक्रेन युद्ध शुरु होने के दौरान मुरादाबाद के करीब 50 लोग यूक्रेन में फंसे हुए थे, जिसमें बड़ी संख्या में एमबीबीएस करने गए विद्यार्थी थे। ये लोग हर पल धमाकों के खौफ, माइनस पांच डिग्री सेल्सियस में ठंडे फर्श पर दो दिनों तक भूखे रहने को मजबूर हुए थे। इसके बाद 40 किलोमीटर तक पैदल भी चले थे। बिस्किट और चिप्स खाकर गुजारा किया। जैसे-तैसे अपनों के बीच पहुंचे थे, लेकिन भविष्य और करियर की खातिर एक बार फिर यूक्रेन जाने को मजबूर हुए। वहां रहकर पढ़ रहे विद्यार्थियों का कहना है कि वहां पर सिर्फ दैनिक चीजों के लिए ही दुकानें खुलती हैं। बड़े-बड़े मॉल आदि बंद हैं। भविष्य की खातिर वह जोखिम के बीच रहने को मजबूर हैं।
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उनका कहना है कि बीच में सप्ताह में एक-दो बार सायरन बजता था, लेकिन अब 24 घंटे में तीन से चार बार सायरन बज जाता है। हर बार खतरा की आशंका से डरकर वह बंकर में जाते हैं। उन्होंने कहा कि पूरा एक वर्ष दहशत और खतरे के बीच गुजारा है। अब ईश्वर से ही प्रार्थना है कि यह युद्ध बंद हो जाए।
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रुस-यूक्रेन युद्ध शुरु होने के दौरान मुरादाबाद के करीब 50 लोग यूक्रेन में फंसे हुए थे, जिसमें बड़ी संख्या में एमबीबीएस करने गए विद्यार्थी थे। ये लोग हर पल धमाकों के खौफ, माइनस पांच डिग्री सेल्सियस में ठंडे फर्श पर दो दिनों तक भूखे रहने को मजबूर हुए थे। इसके बाद 40 किलोमीटर तक पैदल भी चले थे। बिस्किट और चिप्स खाकर गुजारा किया। जैसे-तैसे अपनों के बीच पहुंचे थे, लेकिन भविष्य और करियर की खातिर एक बार फिर यूक्रेन जाने को मजबूर हुए। वहां रहकर पढ़ रहे विद्यार्थियों का कहना है कि वहां पर सिर्फ दैनिक चीजों के लिए ही दुकानें खुलती हैं। बड़े-बड़े मॉल आदि बंद हैं। भविष्य की खातिर वह जोखिम के बीच रहने को मजबूर हैं।
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