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Sambhal News: उपेक्षा से सुस्त पड़ी संस्कृत के श्लोकों की गूंज

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 17 Jun 2025 01:53 AM IST
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The resonance of Sanskrit shlokas has become dull due to neglect
चंदौसी। पहले के समय में जिले में दो संस्कृत महाविद्यालय और तीन इंटर कॉलेजों में गूंजने वाले संस्कृत के श्लोकों की गूंज सुस्त पड़ चुकी है। उपेक्षा के कारण जिले के दो इंटरमीडिएट संस्कृत विद्यालय और एक महाविद्यालय बंद हो चुके हैं। वर्तमान समय में एक इंटरमीडिएट और एक संस्कृत महाविद्यालय बंद होने की कगार पर हैं। इन विद्यालयों के भवन जर्जर हो चुके हैं। साथ ही यहां शिक्षा के पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। ऐसे में ये विद्यालय अपना अस्तित्व बचाने के लिए जूझ रहे हैं।
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जिले में संस्कृत का अध्ययन करने के लिए माध्यमिक संस्कृत शिक्षा विभाग द्वारा श्री भागीरथी संस्कृत विद्यालय नगला अजमेरी, श्री शंकर संस्कृत महाविद्यालय मडिकवाली, श्री कल्याण संस्कृत महाविद्यालय दवथरा, श्री सनातन धर्म संस्कृत महाविद्यालय चंदौसी और श्री रघुनाथ ब्रह्मचर्य आश्रम संस्कृत महाविद्यालय स्थापित किए गए थे। लेकिन शासन की ओर से इन विद्यालयों की ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया और न ही संसाधन उपलब्ध कराए गए। जिसके चलते श्री शंकर संस्कृत महाविद्यालय मडिकवाली, श्री कल्याण संस्कृत महाविद्यालय दवथरा, श्री सनातन धर्म संस्कृत महाविद्यालय चंदौसी बंद हो गए।
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इस समय संस्कृत इंटर तक की शिक्षा के लिए श्री भागीरथी संस्कृत विद्यालय नगला अजमेरी ही एकमात्र कॉलेज बचा है। जहां मौजूदा समय में 70 छात्र शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। जिनकी देखभाल के लिए तीन शिक्षक हैं। वहीं चंदौसी के सीता आश्रम स्थित श्री रघुनाथ आश्रम महाविद्यालय में सिर्फ दो शिक्षक की ही तैनाती है।
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मौजूदा समय में ये दोनों विद्यालय शासन की अनदेखी के चलते उपेक्षा का शिकार हो रहे हैं। इन विद्यालयों के रखरखाव पर शासन की ओर से ध्यान नहीं दिया जा रहा और न ही यहां संसाधन उपलब्ध कराए गए। इसी का परिणाम है कि दोनों विद्यालयों के भवन जर्जर हो चुके हैं। जिसके चलते छात्रों का संस्कृत से मोहभंग होता जा रहा है।
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संस्कृत विद्यालयों की बदतर स्थिति से शासन को अवगत कराया जाएगा। उम्मीद है कि दोनों विद्यालयों का कायाकल्प शासन द्वारा किया जाएगा।
श्यामा कुमार, डीआईओएस
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