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Sambhal News: पांचवीं सदी का है बेरनी रतनपुर का प्राचीन शिव मंदिर

Tue, 05 Mar 2024 01:38 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल Updated Tue, 05 Mar 2024 01:38 AM IST
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The ancient Shiva temple of Berani Ratanpur is from the fifth century.
चंदौसी (संभल)। बेरनी रतनपुर में बना शिव मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। इसका प्रमाण तो नहीं हैं लेकिन लोग मंदिर का निर्माण पांचवी सदी में राजा बेन के समय होना मानते हैं। महाशिवरात्रि पर यहां पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। आसपास के हजारों कांवड़िये जलाभिषेक करते हैं। मंदिर में स्थापित शिवलिंग की कोई थाह नहीं है। इसकी विशेषता भी दूर-दूर फैली है।
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पंडित सतीश चंद्र शर्मा ने बताया कि 2013-2014 में पुरातत्व विभाग ने यहां पर सर्वे करने के साथ ही खोदाई की थी। खोदाई में पांचवीं सदी से जुड़ी कुछ वस्तुएं और मूर्ति मंदिर के समीप टीले से मिली थी। जिससे प्रतीत होता है कि मंदिर की स्थापना पांचवी सदी में हुई थी। बेरनी गांव को पांचवीं सदी के राजा बेन की नगरी भी माना जाता है। बताया कि मंदिर में स्थापित शिवलिंग की खास बात यह है कि कोई भी व्यक्ति अपनी बाहों में नहीं भर सका है। साथ ही जमीन में इसकी गहराई की कोई सीमा नहीं है। शिवलिंग के यह विशेषता दूर-दूर तक फैली है। यहां जलाभिषेक कर लोग मन्नत मांगते हैं। मान्यता है कि यहां झाड़ू चढ़ाने पर चर्म रोग से मुक्ति मिलती है। वहीं स्वास्तिक चढ़ाने पर संतान की प्राप्ति हो जाती है।
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मंदिर के भवन का अब तक चार बार हो चुका है निर्माण
ग्रामीण बताते हैं कि अगस्त 2009 में बारिश के चलते मंदिर का भवन गिर गया था। उस समय मलबा हटाकर भवन के जीर्णोद्धार कराया गया। बताते हैं शिवलिंग के आसपास 15 फीट गहराई तक खोदाई की गई थी, लेकिन शिवलिंग का अंतिम छोर नहीं मिला। जिसके बाद खोदाई बंद कर दी गई। खोदाई के समय मंदिर परिसर से सवा फीट लंबी और एक फीट चौड़ी ईंट निकली थी। जिसका वजन करीब चार किलो था। पुरातत्व विभाग के अनुसार ये ईंट पांचवी शताब्दी की थीं।
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