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आज सुबह तक हंगरी पहुंचे जाएंगे संभल के छात्
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यूक्रेन संकट के चलते भारत के प्रयासों के बावजूद भी यूक्रेन में भारतीय छात्रों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। संभल के छात्र सुरक्षित स्थान की ओर भागे हैं। सोमवार रात को खारकीव पर हुए हमले के बाद से रातभर छात्र दहशत में रहे। मंगलवार सुबह वह हंगरी के लिए ट्रेन से रवाना हुए हैं। छात्र बुधवार सुबह तक हंगरी पहुंच जाएंगे।
खारकीव की वीएन राष्ट्रीय यूनिवर्सिटी में संभल जिले के चार छात्र भी फंसे हुए थे। मंगलवार सुबह नौ बजे यूनिवर्सिटी के हॉस्टल से छात्र निकल निकले और पांच किलोमीटर दूर तक पैदल चले। कई जगह रास्ते में गोलीबारी के निशान मिले। गांव हाजीपुर निवासी मोहम्मद शादमान के पिता मोहम्मद इमरान ने बताया है कि मंगलवार दोपहर उनकी बेटे से बात हुई। उन्हें बेटे ने बताया है कि सोमवार सारी रात धमाकों की आवाजें आती रहीं। हॉस्टल के बेसमेंट में जितने भी छात्र-छात्राएं थीं। किसी को नींद नहीं आई। पीने को पानी तक नहीं बचा था। इसलिए मंगलवार की सुबह नौ बजे (यूक्रेन के समय अनुसार) उनका बेटा मोहम्मद शादमान, उसके साथी गांव मदाला निवासी अदनान पुत्र मोहम्मद असरार, मोहम्मद आतिफ पुत्र आसिफ और बदरूद्दीन पुत्र गुलाम साबिर के साथ पांच किलोमीटर दूर तक पैदल चले और एक रेलवे स्टेशन से हंगरी बॉर्डर को जाने वाली ट्रेन से रवाना हो गए हैं।
मोहम्मद इमरान के मुताबिक, उनके बेटे ने बताया है कि हंगरी बॉर्डर तक जाने में करीब 15 घंटे लगेंगे। बुधवार सुबह तक हंगरी पहुंच जाएंगे। इसके बाद भारतीय दूतावास से संपर्क करेंगे। संभल के गांव सैफ खां सराय निवासी सलमान आलम यूक्रेन की उजहोरोद राष्ट्रीय विश्वविद्यालय से हंगरी बॉर्डर के लिए मंगलवार को ट्रेन से निकल गए हैं। उन्होंने यह जानकारी अपने परिजनों को दी है। परिजनों की उम्मीद जागी है कि उनका बेटा जल्द वतन तक आ जाएगा।
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सुबह बिस्किट व शाम को जीने लायक खाना खाया
संभल। यूक्रेन के शहर खारकीव में फंसे संभल के छात्रों का कहना है कि दो दिन पहले बाजार बंद हो गया था। जो खाने पीने का सामान खरीदा था, वह भी कम बचा था। इसलिए सुबह को नाश्ता बिस्किट से कर रहे थे और दोपहर व शाम का खाना जीने लायक ही खा रहे थे। अब सफर में निकले हैं तो खाने पीने का सामान नहीं हैं। मोहम्मद शादमान ने बताया कि वह घर वापसी के लिए अपने साथियों के साथ लगे हुए हैं। हंगरी पहुंचने पर ही घर आने की तारीख तय हो पाएगी। खारकीव शहर से सुरक्षित निकलने पर छात्रों के परिजनों ने भी राहत महसूस की है। छात्रों का दावा है कि रूस के हमले सोमवार से बहुत ज्यादा बढ़ गए हैं।
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खारकीव की वीएन राष्ट्रीय यूनिवर्सिटी में संभल जिले के चार छात्र भी फंसे हुए थे। मंगलवार सुबह नौ बजे यूनिवर्सिटी के हॉस्टल से छात्र निकल निकले और पांच किलोमीटर दूर तक पैदल चले। कई जगह रास्ते में गोलीबारी के निशान मिले। गांव हाजीपुर निवासी मोहम्मद शादमान के पिता मोहम्मद इमरान ने बताया है कि मंगलवार दोपहर उनकी बेटे से बात हुई। उन्हें बेटे ने बताया है कि सोमवार सारी रात धमाकों की आवाजें आती रहीं। हॉस्टल के बेसमेंट में जितने भी छात्र-छात्राएं थीं। किसी को नींद नहीं आई। पीने को पानी तक नहीं बचा था। इसलिए मंगलवार की सुबह नौ बजे (यूक्रेन के समय अनुसार) उनका बेटा मोहम्मद शादमान, उसके साथी गांव मदाला निवासी अदनान पुत्र मोहम्मद असरार, मोहम्मद आतिफ पुत्र आसिफ और बदरूद्दीन पुत्र गुलाम साबिर के साथ पांच किलोमीटर दूर तक पैदल चले और एक रेलवे स्टेशन से हंगरी बॉर्डर को जाने वाली ट्रेन से रवाना हो गए हैं।
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मोहम्मद इमरान के मुताबिक, उनके बेटे ने बताया है कि हंगरी बॉर्डर तक जाने में करीब 15 घंटे लगेंगे। बुधवार सुबह तक हंगरी पहुंच जाएंगे। इसके बाद भारतीय दूतावास से संपर्क करेंगे। संभल के गांव सैफ खां सराय निवासी सलमान आलम यूक्रेन की उजहोरोद राष्ट्रीय विश्वविद्यालय से हंगरी बॉर्डर के लिए मंगलवार को ट्रेन से निकल गए हैं। उन्होंने यह जानकारी अपने परिजनों को दी है। परिजनों की उम्मीद जागी है कि उनका बेटा जल्द वतन तक आ जाएगा।
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सुबह बिस्किट व शाम को जीने लायक खाना खाया
संभल। यूक्रेन के शहर खारकीव में फंसे संभल के छात्रों का कहना है कि दो दिन पहले बाजार बंद हो गया था। जो खाने पीने का सामान खरीदा था, वह भी कम बचा था। इसलिए सुबह को नाश्ता बिस्किट से कर रहे थे और दोपहर व शाम का खाना जीने लायक ही खा रहे थे। अब सफर में निकले हैं तो खाने पीने का सामान नहीं हैं। मोहम्मद शादमान ने बताया कि वह घर वापसी के लिए अपने साथियों के साथ लगे हुए हैं। हंगरी पहुंचने पर ही घर आने की तारीख तय हो पाएगी। खारकीव शहर से सुरक्षित निकलने पर छात्रों के परिजनों ने भी राहत महसूस की है। छात्रों का दावा है कि रूस के हमले सोमवार से बहुत ज्यादा बढ़ गए हैं।