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Sambhal News: 56 लाख रुपये के गबन में सहकारी समिति का प्रभारी सचिव निलंबित

Wed, 01 Nov 2023 01:57 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल Updated Wed, 01 Nov 2023 01:57 AM IST
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Secretary in-charge of cooperative society suspended for embezzlement of Rs 56 lakh
संभल। गुन्नौर के गांव खजरा स्थित किसान सेवा सहकारी समिति के आंकिक और प्रभारी सचिव वीरेंद्र सिंह को 56 लाख रुपये के गबन के आरोप में निलंबित कर दिया है। वह नौ माह से गैरहाजिर चल रहा है। ग्राम प्रधान राजवती देवी की शिकायत पर की गई जांच में वह दोषी पाया गया है।
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क्षेत्र के गांव खजरा की प्रधान राजवती देवी ने किसान सेवार सहकारी समिति के आंकिक और प्रभारी सचिव वीरेंद्र सिंह पर किसानों के नाम पर फर्जी तरीके से ऋण लेकर धनराशि का गबन करने का आरोप लगाया था। शिकायत पर सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहाकारिता वीरेंद्र प्रकाश उपाध्याय ने दो जून-2022 को जांच के आदेश दिए थे। गुन्नौर तहसील के अपर जिला सहकारी अधिकारी राजेश कुमार त्रिपाठी, बदायूं जिला सहकारी बैंक के उप महाप्रबंधक शिव प्रसाद और बदायूं जिला सहकारी बैंक के शाखा प्रबंधक सत्यव्रत जौहरी को जांच टीम में शामिल थे। जांच में सामने आया कि वीरेंद्र सिंह वर्ष-2007 से साधन सहकारी समिति पर कार्यरत है। पंद्रह वर्ष की अवधि के दौरान किसानों के नाम फर्जी तरीके से नए केसीसी कार्ड जारी कराए। इसके बदले 34 लाख रुपये की जो धनराशि बैंक से ऋण के रूप में मिली, उसका गबन कर लिया गया। समिति पर इसका कोई लेखा-जोखा भी नही है। वहीं, कैश व कैरी का असल 7.64 लाख रुपये एवं इस पर ब्याज 13.17 लाख रुपये सहित कुल 20.81 लाख रुपये के खाद-बीज के स्टॉक का न होना, प्रत्यक्ष रूप से उर्वरक धनराशि का गबन है। साथ ही इस अवधि में किसानों को खाद-बीज नहीं मिला। यह भी कार्रवाई की श्रेणी में आता है। इसी के साथ पीडीएस व्यवसाय के 1.20 लाख रुपये के गबन की पुष्टि हुई। जांच कमेटी ने जांच का आधार, कारण और विवरण सहित कुल 119 पेज की आख्या तैयार की। कार्रवाई की संस्तुति सहित यह आख्या एआर कोऑपरेटिव को भेजी। एआर कोऑपरेटिव ने वर्तमान में समिति के सभापति नवलेश और सचिव हरिशंकर को निर्देशित कर आंकिक और प्रभारी सचिव रहे वीरेंद्र प्रकाश को निलंबित करने के आदेश दिए थे।
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यह था मामला
-वर्ष-2022 में प्रधान राजवती देवी के सामने कई ऐसे मामले आए कि उनके नाम लोन था, लेकिन उन्हें जानकारी ही नहीं थी। जब वे लोग लोन लेने के लिए पहुंचे तो पता चला कि उनके नाम पर पहले से ही लोन है। प्रधान ने इस मामले की शिकायत एआर कोऑपरेटिव से की। इस पर जांच हुई। जांच में आंकिक व प्रभारी सचिव रहे वीरेंद्र प्रकाश दोषी पाए गए।
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गहनता से हो जांच तो फंस सकते हैं कई अधिकारी व कर्मचारी
साधन सहकारी समिति से सीधे किसी को लोन नहीं होता है। समिति के ऐसे सदस्य जिन्हें लोन चाहिए, वह सिर्फ समिति के अधिकारियों के समक्ष अपनी मांग रख सकते हैं। इसके बाद संबंधित जिला सहकारी बैंक के अधिकारी इसे सत्यापन करते हैं। जिस किसान को लोन दिया जा रहा होता है, उसे बैंक अधिकारियों के समक्ष पेश होना पड़ता है। तभी लोन मिलता है। लेकिन यहां ऐसा नहीं हुआ। किसान तो बैंक छोड़िए समिति तक नहीं गए। इसके कागज भी तैयार हो गए और फिर बैंक से लोन स्वीकृत होकर खातों तक पहुंचा और फिर इसे निकाल लिया गया। इसकी गहनता से जांच हो तो कई और अधिकारी और कर्मचारियों पर गाज गिर सकती है।


बैंक प्रबंधक और कैशियर भी शक के दायरे में...
फर्जीवाड़ा करके खाते में लोन की धनराशि तो बैंक ने ट्रांसफर कर दी। उसके बाद बिना खाताधारक के ही खाते से निकासी भी कर ली। जबकि स्पष्ट है कि खाते से धनराशि तभी निकलेगी जब खाताधारक मौजूद हो, लेकिन यहां ऐसा नहीं हुआ। फर्जीवाड़ा के साथ बिना जानकारी बैंक खाते से निकासी भी संदिग्ध लग रही है। इसमें गहन जांच हो, तो उस समय के प्रबंधक, कैशियर समेत कई कर्मचारी फंस सकते हैं। बताया यह रहा है कि यह तो सिर्फ जांच मात्र है। घोटाला एक करोड़ रुपये से अधिक का हो सकता है। सिर्फ गहन जांच की जरूरत है।


कोट
गबन में निलंबित आंकिक और प्रभारी सचिव रहे वीरेंद्र सिंह के खिलाफ जांच जारी रहेगी। यह भी देखा जाएगा कि धनराशि का गबन होता रहा और किसी स्तर पर कार्रवाई नहीं हुई। घोटाला बड़ा भी हो सकता है। इसी को ध्यान में रखकर गहनता से जांच कराएंगे। -वीरेंद्र प्रकाश उपाध्याय, एआर कोऑपरेटिव, सहकारिता
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