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कमाल के बिजली अफसर, आपदा में ढूंढ लिया भ्रष्टाचार का अवसर
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संभल। बिजली अफसर कमाल के निकले। आपदा में भी भ्रष्टाचार का अवसर तलाश लिया। चंदौसी संभल मेें चली तेज हवा में चंदौसी डिविजन के खंभे टूटे तो सही पर पीवीवीएनएल अधिकारियों ने इसमें खेल कर दिया। दिखा दिया कि 43 गांवों में 177 खंभे टूट गए हैं पर धरातल पर कुछ और ही है। शुक्रवार को अमर उजाला टीम ने मौके पर जाकर प्रभावित दस गांवों में पड़ताल की तो पाया कि 74 खंभे टूटे हैं जबकि विभाग ने 95 दर्शाएं हैं। कई गांव तो ऐसे हैं जहां एक भी खंभा नहीं टूटा पर रिपोर्ट में लिख दिया कि खंभे टूटे हैं। इसी तरह का गड़बड़झाला इन सभी गांवों में है।
यह है बिजली विभाग की दैवी आपदा कहानी
विभाग का दावा है कि मंगलवार को दैवी आपदा आ गई। आंधी बारिश इतनी तेज आई कि 43 गांवों के खंभे टूटे गए। रिपोर्ट तैयार की गई कि इन गांवों में चंदौसी डिविजन से जाने वाली लाइनों के कंक्रीट के 177 खंभे टूट गए। इससे बिजली विभाग को करीब 7.70 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। विभाग ने इस क्षति की रिपोर्ट तैयार कर प्रशासन और बिजली विभाग के आला अधिकारियों को भी भेज दी है।
.....पर पड़ताल में मिला कहानी में झोल
इस कहानी की सत्यता को परखने के लिए शुक्रवार को अमर उजाला की टीम ने ऐसे दस गांवों का दौरा किया जिनका जिक्र बिजली विभाग ने अपनी रिपोर्ट में किया है और यहां बड़ा नुकसान बताया है। टीम ने देखा कि वास्तव में यहां कितने खंभे टूटे हैं। विभाग ने इन दस गांवों में 95 खंभों का टूटना बताया है जबकि पड़ताल में आया कि खंभे तो 74 ही टूटे हैं। हर गांव में ग्रामीणों ने भी अमर उजाला की पड़ताल की पुष्टि की। यानी इन दस गांवों में ही 21 खंभों का अंतर आया तो 43 गांवों में यह आंकड़ा दोगुना या इससे ज्यादा भी हो सकता है।
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इन गांवों में मिली गड़बड़ी
संभल। गांव मोहम्मदपुर बाबई में रिपोर्ट के अंदर 11 खंभे टूटे दिखाए हैं। जबकि हकीकत में 6 खंभेे टूटे हैं। नगला खाकम में चार खंभे टूटे दिखाए गए हैं जबकि दो ही खंभों को नुकसान हुआ है। गांव मंगलपुर में चार खंभे टूटे दर्ज किए गए लेकिन हकीकत में इस गांव का एक भी खंभा नहीं टूटा है। गांव रायपुर नहर के पास पांच खंभे टूटे होने की जानकारी बिजली विभाग ने दर्ज की है पर हकीकत में दो ही खंभे टूटे हैं। गांव मुजफ्फरपुर में 12 खंभे टूटे दर्ज किए गए हैं जबकि हकीकत में मुख्य लाइन के दस खंभे टूटे हैं। गांव रसूलपुर में तीन खंभे टूटे दर्ज किए गए लेकिन दो खंभों के टूटने की पुष्टि हुई। गांव चिरौली भगवंतपुर में एक खंभा टूटा दर्ज किया गया है पर हकीकत में कोई खंभा नहीं टूटा। गांव बंजरपुरी में दो खंभे टूट दर्ज किए गए लेकिन कोई खंभा नहीं टूटा। गांव लहर शीश में तीन खंभे टूटे दर्ज किए गए लेकिन इस गांव में भी कोई खंभा टूटा नहीं मिला।
बिजली विभाग की रिपोर्ट के अनुसार इन गांवों में टूटे हैं खंभे।
चंदौसी डिविजन के गांव पुरा में 11, फत्तेपुर शमशोई 2, मरतरा साईट 2, मझोला 2, जैरोई 1, करेली 2, कैथल 3, पतराऔ 1, रसूलपुर 1, सैजनी 4, नवाबपुरा 4, ढंकनगला 1, नगलिया बल्लू 11, नगला खाकम 4, बबाई 11, मंगलपुर 4, कैली 1, बेहटा साहू 5, नरौली मऊअस्सू मार्ग पर 6,फरीदपुर 8, मझावली मैन लाईन जनैटा से बड़ागांव 11, जनैटा नंबर 15 ब्रांच से आगे 2, मंडनपुर 2, बहापुर 2, मऊ 1, मझोला 2, लहरशीश 3, बंजरपुरी 2, रसूलपुर 3, चिरौली भगवंतपुर 1, मुजफ्फरपुर 12, किरारी 6, आढ़ोल 4, हनुमानगढ़ी बिजलीघर चंदौसी 9, आईटीआई के सामने बिजलीघर चंदौसी 11, पावर हाउस बिजलीघर चंदौसी 2, मौलागढ़ 4, खानूपुरा 2, लखनपुर 2, कैलमुण्डी 1, लधनपुर 5, रायपुर निकट नहर 5, खिरनी निजी नलकूप के 2 खंभे टूटे हैं। इन गांवों में बिजली आपूर्ति बाधित हो गई है।
मुरादाबाद क्षेत्र में आंधी नहीं आई। संभल में भले ही भारतीय मौसम विज्ञान विभाग का केंद्र न हो पर इतनी तेज आंधी आती तो सूचना जरूर मिलती। अब खंभे कैसे गिरे यह तो पता नहीं। बवंडर से ऐसा कई बार हो जाता है। वहां क्या हुआ पता नहीं - आरके सिंह, मौसम वैज्ञानिक, पंतनगर विश्वविद्यालय
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यह है बिजली विभाग की दैवी आपदा कहानी
विभाग का दावा है कि मंगलवार को दैवी आपदा आ गई। आंधी बारिश इतनी तेज आई कि 43 गांवों के खंभे टूटे गए। रिपोर्ट तैयार की गई कि इन गांवों में चंदौसी डिविजन से जाने वाली लाइनों के कंक्रीट के 177 खंभे टूट गए। इससे बिजली विभाग को करीब 7.70 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। विभाग ने इस क्षति की रिपोर्ट तैयार कर प्रशासन और बिजली विभाग के आला अधिकारियों को भी भेज दी है।
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.....पर पड़ताल में मिला कहानी में झोल
इस कहानी की सत्यता को परखने के लिए शुक्रवार को अमर उजाला की टीम ने ऐसे दस गांवों का दौरा किया जिनका जिक्र बिजली विभाग ने अपनी रिपोर्ट में किया है और यहां बड़ा नुकसान बताया है। टीम ने देखा कि वास्तव में यहां कितने खंभे टूटे हैं। विभाग ने इन दस गांवों में 95 खंभों का टूटना बताया है जबकि पड़ताल में आया कि खंभे तो 74 ही टूटे हैं। हर गांव में ग्रामीणों ने भी अमर उजाला की पड़ताल की पुष्टि की। यानी इन दस गांवों में ही 21 खंभों का अंतर आया तो 43 गांवों में यह आंकड़ा दोगुना या इससे ज्यादा भी हो सकता है।
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इन गांवों में मिली गड़बड़ी
संभल। गांव मोहम्मदपुर बाबई में रिपोर्ट के अंदर 11 खंभे टूटे दिखाए हैं। जबकि हकीकत में 6 खंभेे टूटे हैं। नगला खाकम में चार खंभे टूटे दिखाए गए हैं जबकि दो ही खंभों को नुकसान हुआ है। गांव मंगलपुर में चार खंभे टूटे दर्ज किए गए लेकिन हकीकत में इस गांव का एक भी खंभा नहीं टूटा है। गांव रायपुर नहर के पास पांच खंभे टूटे होने की जानकारी बिजली विभाग ने दर्ज की है पर हकीकत में दो ही खंभे टूटे हैं। गांव मुजफ्फरपुर में 12 खंभे टूटे दर्ज किए गए हैं जबकि हकीकत में मुख्य लाइन के दस खंभे टूटे हैं। गांव रसूलपुर में तीन खंभे टूटे दर्ज किए गए लेकिन दो खंभों के टूटने की पुष्टि हुई। गांव चिरौली भगवंतपुर में एक खंभा टूटा दर्ज किया गया है पर हकीकत में कोई खंभा नहीं टूटा। गांव बंजरपुरी में दो खंभे टूट दर्ज किए गए लेकिन कोई खंभा नहीं टूटा। गांव लहर शीश में तीन खंभे टूटे दर्ज किए गए लेकिन इस गांव में भी कोई खंभा टूटा नहीं मिला।
बिजली विभाग की रिपोर्ट के अनुसार इन गांवों में टूटे हैं खंभे।
चंदौसी डिविजन के गांव पुरा में 11, फत्तेपुर शमशोई 2, मरतरा साईट 2, मझोला 2, जैरोई 1, करेली 2, कैथल 3, पतराऔ 1, रसूलपुर 1, सैजनी 4, नवाबपुरा 4, ढंकनगला 1, नगलिया बल्लू 11, नगला खाकम 4, बबाई 11, मंगलपुर 4, कैली 1, बेहटा साहू 5, नरौली मऊअस्सू मार्ग पर 6,फरीदपुर 8, मझावली मैन लाईन जनैटा से बड़ागांव 11, जनैटा नंबर 15 ब्रांच से आगे 2, मंडनपुर 2, बहापुर 2, मऊ 1, मझोला 2, लहरशीश 3, बंजरपुरी 2, रसूलपुर 3, चिरौली भगवंतपुर 1, मुजफ्फरपुर 12, किरारी 6, आढ़ोल 4, हनुमानगढ़ी बिजलीघर चंदौसी 9, आईटीआई के सामने बिजलीघर चंदौसी 11, पावर हाउस बिजलीघर चंदौसी 2, मौलागढ़ 4, खानूपुरा 2, लखनपुर 2, कैलमुण्डी 1, लधनपुर 5, रायपुर निकट नहर 5, खिरनी निजी नलकूप के 2 खंभे टूटे हैं। इन गांवों में बिजली आपूर्ति बाधित हो गई है।
मुरादाबाद क्षेत्र में आंधी नहीं आई। संभल में भले ही भारतीय मौसम विज्ञान विभाग का केंद्र न हो पर इतनी तेज आंधी आती तो सूचना जरूर मिलती। अब खंभे कैसे गिरे यह तो पता नहीं। बवंडर से ऐसा कई बार हो जाता है। वहां क्या हुआ पता नहीं - आरके सिंह, मौसम वैज्ञानिक, पंतनगर विश्वविद्यालय